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हरियाणा के किसानों की बल्ले-बल्ले! 2000 एकड़ में शुरू होगी स्मार्ट खेती, मोरनी ब्लॉक बनेगा राज्य का पहला मॉडल

On: June 8, 2026 6:19 PM
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हरियाणा के किसानों की बल्ले-बल्ले! 2000 एकड़ में शुरू होगी स्मार्ट खेती, मोरनी ब्लॉक बनेगा राज्य का पहला मॉडल
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हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार शाम कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के श्रीमद्भगवद्गीता सदन में आयोजित ‘प्राकृतिक खेती एवं क्लस्टर गठन’ कार्यक्रम में किसानों के लिए एक क्रांतिकारी योजना का बिगुल फूंक दिया है। मुख्यमंत्री ने मंच से आधिकारिक घोषणा करते हुए कहा कि राज्य में आधुनिक तकनीक के समन्वय से 2000 एकड़ के क्लस्टर में ‘स्मार्ट एग्रीकल्चर योजना’ के तहत प्राकृतिक खेती की शुरुआत की जाएगी। सबसे बड़ी बात यह है कि इस नई पद्धति को अपनाने वाले किसानों को यदि फसल चक्र में किसी भी प्रकार का वित्तीय नुकसान होता है, तो उसकी शत-प्रतिशत भरपाई सीधे हरियाणा सरकार करेगी। इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे सीएम के साथ गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और सूबे के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा भी मौजूद रहे।

हरियाणा सरकार की स्मार्ट एग्रीकल्चर योजना क्या है?

इस योजना का मुख्य उद्देश्य रासायनिक खादों से बंजर हो रही जमीन को बचाना और आम आदमी को जहर मुक्त अनाज उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्राकृतिक खेती भारत की सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा है, जिसने हमारी मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को हमेशा जिंदा रखा। जल, जंगल और जमीन हमारे जीवन का असली आधार हैं और इस समय इनका संरक्षण करना बेहद जरूरी हो चुका है। सरकार अब पारंपरिक खेती को आधुनिकतम तकनीकों से जोड़कर क्लस्टर आधारित कृषि प्रणाली विकसित कर रही है, ताकि किसानों की लागत कम हो और पैदावार की गुणवत्ता वैश्विक मानकों के अनुरूप हो सके।

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हरियाणा में प्राकृतिक खेती के लिए कहां-कहां बने हैं प्रशिक्षण केंद्र?

मुख्यमंत्री ने विस्तृत आंकड़े साझा करते हुए बताया कि हरियाणा सरकार ने साल 2022 में ही प्राकृतिक खेती योजना की नींव रख दी थी। इसके लिए एक विशेष समर्पित डिजिटल पोर्टल भी लाइव किया गया है, जिस पर अब तक सूबे के लगभग 2 लाख किसान अपना पंजीकरण करा चुके हैं। किसानों को इस खेती के वैज्ञानिक गुर सिखाने के लिए गुरुकुल कुरुक्षेत्र, हमेटी जींद, मंगियाना सिरसा और घरौंडा करनाल में चार अत्याधुनिक प्रशिक्षण केंद्र पूरी तरह सक्रिय हैं। कुरुक्षेत्र के गुरुकुल केंद्र में एक राज्य सलाहकार की नियुक्ति भी की गई है, जहां अब तक 12,188 किसान, ग्रामीण महिलाएं और सरकारी कृषि कर्मचारी ट्रेनिंग पूरी कर चुके हैं।

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कृषि विभाग की 800 एकड़ भूमि को लेकर सीएम ने क्या घोषणा की?

किसानों को जमीन के मोर्चे पर मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एक और बेहद बड़ा नीतिगत फैसला सुनाया है। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग के स्वामित्व वाली लगभग 800 एकड़ सरकारी भूमि अब केवल और केवल उन प्रगतिशील किसानों को पट्टे (लीज) पर दी जाएगी, जो लिखित रूप में कम से कम 10 वर्षों तक सिर्फ प्राकृतिक या जैविक खेती करने का पक्का संकल्प लेंगे। इस जमीन आवंटन को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार बहुत जल्द एक नई पट्टा नीति तैयार करने जा रही है। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने पंचकूला जिले के मोरनी ब्लॉक को पूरे राज्य के लिए प्राकृतिक और जैविक खेती का मुख्य ‘मॉडल क्षेत्र’ घोषित किया है।

रासायनिक खेती से सेहत पर क्या प्रतिकूल असर पड़ रहा है?

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समारोह को संबोधित करते हुए कुरुक्षेत्र गुरुकुल के संरक्षक और गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने लाइव उदाहरण देते हुए बताया कि वर्तमान में गुरुकुल कुरुक्षेत्र की 180 एकड़ भूमि पर पूरी तरह से सफल प्राकृतिक खेती की जा रही है, जिसमें यूरिया या किसी भी जहरीले कीटनाशक का इस्तेमाल शून्य है। वहीं, हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि विकसित भारत के बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्राकृतिक खेती का देशव्यापी विस्तार अब अनिवार्य है। उन्होंने आगाह किया कि रासायनिक खेती के अंधाधुंध चलन से हमारी धरती, मंडियों के अनाज और अंततः देश के आम नागरिकों की सेहत पर बेहद खतरनाक और प्रतिकूल असर पड़ रहा है, जिसे तुरंत रोकना होगा।

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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