Eid-ul-Azha 2025 When will the moon be visible in Saudi and India, note the date: ईद-उल-अजहा 2025 (Eid-ul-Adha 2025) का त्योहार इस्लामी कैलेंडर के जुल हिज्जा महीने की 10वीं तारीख को मनाया जाएगा। इसकी तारीख चांद के दिखने (Moon Sighting) पर निर्भर करती है। बकरीद हजरत इब्राहीम के बलिदान और अल्लाह के प्रति उनकी निष्ठा का प्रतीक है। सऊदी अरब और भारत में चांद दिखने की तारीखें अलग-अलग हैं, जिसके आधार पर ईद की तारीख तय होगी। यह त्योहार हज यात्रा के साथ भी जुड़ा है। आइए, इस पवित्र त्योहार की तारीख, परंपरा और महत्व को समझते हैं।
Eid-ul-Azha 2025: सऊदी अरब में बकरीद की तारीख
सऊदी अरब में जुल हिज्जा 1446 AH का चांद 27 मई 2025 को देखा जाएगा। अगर चांद उसी दिन दिखता है, तो 28 मई को जुल हिज्जा का पहला दिन होगा। इस स्थिति में सऊदी में ईद-उल-अजहा (Eid-ul-Adha 2025) 6 जून 2025 को मनाई जाएगी। चांद दिखने (Moon Sighting) की पुष्टि सऊदी की चांद कमेटी करती है। यह तारीख हज यात्रा के कार्यक्रम को भी प्रभावित करती है। सऊदी में बकरीद की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो चुकी हैं।
भारत में ईद की तारीख
भारत में जुल हिज्जा का चांद 28 मई 2025 को दिखने की संभावना है। अगर चांद उसी दिन दिखता है, तो 29 मई से जुल हिज्जा शुरू होगा। इस आधार पर भारत में ईद-उल-अजहा 7 जून 2025 को मनाई जाएगी। लेकिन अगर चांद 29 मई को दिखता है, तो ईद 8 जून को होगी। स्थानीय मस्जिदें और चांद कमेटियां इसकी पुष्टि करेंगी। बकरीद के लिए लोग अभी से उत्साहित हैं।
बकरीद का धार्मिक महत्व
बकरीद हजरत इब्राहीम के त्याग और समर्पण को याद करती है। धार्मिक मान्यताओं (Religious Significance) के अनुसार, अल्लाह के आदेश पर उन्होंने अपने बेटे हजरत इस्माईल की कुर्बानी का संकल्प लिया। अल्लाह ने उनकी निष्ठा देखकर इस्माईल की जगह एक मेंढा भेज दिया। तभी से कुर्बानी की परंपरा (Sacrifice Tradition) शुरू हुई। यह त्योहार विश्वास, त्याग और भक्ति का संदेश देता है। कुर्बानी का मांस तीन हिस्सों में बांटा जाता है—गरीबों, रिश्तेदारों और अपने लिए।
कुर्बानी और उत्सव की परंपरा
ईद-उल-अजहा पर मुस्लिम समुदाय नमाज अदा करता है। इसके बाद कुर्बानी की जाती है। यह परंपरा (Sacrifice Tradition) न केवल धार्मिक है, बल्कि सामाजिक एकता को भी बढ़ाती है। लोग गरीबों को मांस बांटकर खुशियां साझा करते हैं। बकरीद का उत्सव परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर मनाया जाता है। यह त्योहार अल्लाह के प्रति समर्पण और दान की भावना को मजबूत करता है। ईद-उल-अजहा 2025 (Eid-ul-Adha 2025) भी इस संदेश को दोहराएगा।












