ईपीएफओ ने पेंशनर्स के लिए घर बैठे जीवन प्रमाण पत्र बनवाने की सुविधा शुरू की है। डाकिया फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए यह काम मुफ्त में करेगा। लक्ष्य 2026 तक सभी मामले निपटाना है।
नई दिल्ली. देशभर के लाखों पेंशनभोगियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ की तरफ से एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर आई है। अक्सर देखा जाता है कि बुजुर्ग पेंशनधारकों को अपना जीवन प्रमाण पत्र जमा करने के लिए बैंकों या ईपीएफओ कार्यालयों की लंबी लाइनों में लगना पड़ता है।
लेकिन अब इस परेशानी से हमेशा के लिए मुक्ति मिलने वाली है। ईपीएफओ ने एक नई पहल शुरू की है जिसके तहत अब आपको कहीं जाने की जरूरत नहीं है बल्कि डाकिया खुद आपके घर आकर आपका डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र बनाएगा।
बुजुर्गों को मिली बड़ी राहत
इस नई व्यवस्था के तहत इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक और डाक विभाग के कर्मचारी घर घर जाकर सेवा प्रदान करेंगे। यह सुविधा खास तौर पर उन बुजुर्गों और बीमार पेंशनर्स के लिए वरदान साबित होगी जो चलने फिरने में असमर्थ हैं या जो दूरदराज के गांवों में रहते हैं। ईपीएफओ का मकसद तकनीक का इस्तेमाल करके पेंशनर्स के जीवन को आसान बनाना है।
कैसे काम करेगी यह प्रक्रिया
इस सुविधा का लाभ उठाना बेहद आसान है। इसके लिए डाकिया आपके घर आएगा और पूरी प्रक्रिया को डिजिटल तरीके से पूरा करेगा।
दस्तावेज सत्यापन: डाकिया सबसे पहले आपके पेंशन पेमेंट ऑर्डर यानी पीपीओ और आधार कार्ड की जानकारी सत्यापित करेगा।
फेस ऑथेंटिकेशन: इसके बाद फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक के जरिए आपका चेहरा स्कैन किया जाएगा। यह एक उन्नत तकनीक है जिससे बिना फिंगरप्रिंट के भी पहचान हो जाती है।
बायोमेट्रिक विकल्प: अगर किसी तकनीकी कारण या बुढ़ापे की वजह से चेहरे की पहचान नहीं हो पाती है तो बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट मशीन का इस्तेमाल किया जाएगा।
एसएमएस अलर्ट: जैसे ही प्रक्रिया पूरी होगी पेंशनर के मोबाइल पर एक एसएमएस आ जाएगा और प्रमाण पत्र सीधे जीवन प्रमाण पोर्टल पर अपलोड हो जाएगा।
निशुल्क सेवा: सबसे अच्छी बात यह है कि घर बैठे मिलने वाली इस सेवा के लिए पेंशनर को कोई शुल्क नहीं देना होगा।
पुराने मामलों का होगा निपटारा
ईपीएफओ ने अपने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को सख्त निर्देश दिए हैं कि पेंडिंग मामलों को जल्द से जल्द सुलझाया जाए। इसके लिए एक विशेष अभियान चलाया जाएगा।
विभाग ने तय किया है कि सबसे पहले उन मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी जिनका जीवन प्रमाण पत्र पिछले 5 साल या उससे अधिक समय से जमा नहीं हुआ है। इसके बाद उन लोगों से संपर्क किया जाएगा जिनका प्रमाण पत्र 2 साल से पेंडिंग है।
फर्जीवाड़ा रोकने में मिलेगी मदद
इस भौतिक सत्यापन का एक बड़ा फायदा यह भी होगा कि अगर किसी पेंशनर की मृत्यु हो चुकी है और परिवार ने इसकी सूचना नहीं दी है तो डाकिया मौके पर ही इसकी रिपोर्ट कर देगा।
इससे मृत व्यक्तियों के नाम पर जा रही पेंशन को रोका जा सकेगा और संबंधित पीपीओ को बंद किया जा सकेगा। ईपीएफओ ने साल 2026 तक सभी लंबित मामलों को निपटाने का लक्ष्य रखा है।
FAQ’s
प्रश्न: क्या जीवन प्रमाण पत्र बनवाने के लिए डाकिया को पैसे देने होंगे?
उत्तर: नहीं, ईपीएफओ द्वारा शुरू की गई इस पहल के तहत डाकिया द्वारा घर पर जीवन प्रमाण पत्र बनाने की सेवा पूरी तरह निशुल्क है।
प्रश्न: यह सुविधा किन पेंशनर्स के लिए है?
उत्तर: यह सुविधा कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत आने वाले सभी पेंशनभोगियों के लिए उपलब्ध है।
प्रश्न: अगर फेस ऑथेंटिकेशन फेल हो जाए तो क्या होगा?
उत्तर: अगर फेस ऑथेंटिकेशन से पहचान नहीं हो पाती है तो डाकिया बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट डिवाइस का उपयोग करके प्रक्रिया पूरी करेगा।
प्रश्न: ईपीएफओ का मुख्य लक्ष्य क्या है?
उत्तर: ईपीएफओ का लक्ष्य साल 2026 तक 5 साल और 2 साल से लंबित सभी जीवन प्रमाण पत्र मामलों का निपटारा करना और डेटा अपडेट करना है।
पेंशन मामलों के जानकारों का कहना है कि यह कदम डिजिटल इंडिया को मजबूती देने वाला है। इससे न केवल पेंशनर्स को सुविधा मिलेगी बल्कि ईपीएफओ के पास भी एकदम सटीक डेटा उपलब्ध होगा। इससे पेंशन रुकने की समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी।












