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Good Friday Kyu Manaya Jata Hai: गुड फ्राइडे क्यों मनाया जाता है, जानिए इस पवित्र दिन का इतिहास और महत्व

On: April 17, 2025 7:28 AM
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Good Friday Kyu Manaya Jata Hai: गुड फ्राइडे क्यों मनाया जाता है, जानिए इस पवित्र दिन का इतिहास और महत्व
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Good Friday Kyu Manaya Jata Hai Good Friday Kab Hai 2025:  गुड फ्राइडे ईसाई धर्म का एक ऐसा पवित्र दिन है, जो प्रभु यीशु मसीह के बलिदान और उनके मानवता के लिए किए गए कार्यों को याद करता है। यह दिन न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि प्रेम, क्षमा, और शांति का संदेश भी देता है। इसे होली फ्राइडे, ब्लैक फ्राइडे, या ग्रेट फ्राइडे भी कहा जाता है। हर साल ईस्टर संडे से ठीक पहले आने वाले शुक्रवार को यह दिन मनाया जाता है। आइए, जानते हैं कि 2025 में गुड फ्राइडे कब है, इसका इतिहास क्या है, और इसे क्यों मनाया जाता है।

गुड फ्राइडे 2025: तारीख और समय

इस साल गुड फ्राइडे 18 अप्रैल 2025 को मनाया जाएगा। इसके ठीक दो दिन बाद, 20 अप्रैल को ईस्टर संडे का उत्सव होगा। यह दिन दुनिया भर के ईसाई समुदायों के लिए बेहद खास होता है, और कई देशों में इस दिन सार्वजनिक अवकाश भी होता है। लोग इस दिन चर्च में प्रार्थना करते हैं, उपवास रखते हैं, और प्रभु यीशु के बलिदान को याद करते हैं।

Good Friday Kyu Manaya Jata Hai: गुड फ्राइडे का धार्मिक महत्व

गुड फ्राइडे का दिन ईसाई धर्म के लिए गहरा दुख और श्रद्धा का प्रतीक है। यह वह दिन है जब प्रभु यीशु मसीह को यरुशलम में सूली पर चढ़ाया गया था। मान्यता है कि यीशु ने मानवता की भलाई के लिए भाईचारा, शांति, और प्रेम का संदेश दिया। उनकी बढ़ती लोकप्रियता से तत्कालीन यहूदी शासक जलने लगे और उन्होंने यीशु पर राजद्रोह का झूठा आरोप लगाकर उन्हें सूली पर लटकाने का आदेश दिया।

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इस दौरान यीशु को असहनीय यातनाएं दी गईं। उन्हें कांटों का ताज पहनाया गया, सूली को कंधे पर ढोने के लिए मजबूर किया गया, और अंत में उनके हाथों में कीलें ठोककर सूली पर लटका दिया गया। फिर भी, यीशु ने अपने अंतिम क्षणों में मानवता के लिए प्रेम और क्षमा का संदेश दिया। उन्होंने कहा, “हे ईश्वर, इन्हें माफ कर दे, क्योंकि ये नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हैं।” यही वजह है कि यह दिन “गुड” फ्राइडे कहलाता है, क्योंकि यीशु ने मानव कल्याण के लिए अपना बलिदान दिया।

गुड फ्राइडे का इतिहास

गुड फ्राइडे का नाम भले ही “गुड” हो, लेकिन यह दिन दुख और शोक का प्रतीक है। मान्यता है कि जिस शुक्रवार को यीशु को सूली पर चढ़ाया गया, उस दिन उनकी मृत्यु हुई। उनके बलिदान ने ईसाई धर्म में एक नया अध्याय लिखा और यह दिन उनके प्रेम, करुणा, और क्षमा के संदेश को याद करने का अवसर बन गया। यीशु का यह बलिदान ईसाई धर्म के मूल में है, जो मानवता को पापों से मुक्ति और प्रेम की राह दिखाता है।

गुड फ्राइडे पर क्या होता है?

गुड फ्राइडे के दिन ईसाई समुदाय विशेष प्रार्थनाएं और अनुष्ठान करता है। चर्चों में मिस्सा अनुष्ठान आयोजित होता है, जहां लोग अपने पापों का प्रायश्चित करते हैं। इस दिन चर्च की घंटियां नहीं बजाई जातीं, बल्कि लकड़ी के बक्से को बजाया जाता है, जो यीशु के दुख और मृत्यु का प्रतीक है। कई लोग उपवास रखते हैं और दोपहर 3 बजे तक प्रार्थना करते हैं, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि यीशु इसी समय सूली पर लटके थे।

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यह दिन शोक और आत्मचिंतन का है, लेकिन साथ ही यह प्रभु यीशु के प्रेम और बलिदान की याद दिलाता है। दुनिया भर के ईसाई इस दिन को गंभीरता और श्रद्धा के साथ मनाते हैं।

गुड फ्राइडे का संदेश

गुड फ्राइडे का संदेश सिर्फ ईसाई समुदाय तक सीमित नहीं है। यह दिन हमें प्रेम, क्षमा, और मानवता की सेवा का महत्व सिखाता है। यीशु का बलिदान हमें यह बताता है कि मुश्किल हालातों में भी दूसरों के लिए अच्छा सोचना और करना कितना जरूरी है। यह दिन हमें एकजुटता और शांति की राह पर चलने की प्रेरणा देता है।

आप भी इस गुड फ्राइडे पर प्रभु यीशु के संदेश को अपनाएं और अपने जीवन में प्रेम व करुणा को जगह दें। क्या आप इस दिन कोई विशेष प्रार्थना या अनुष्ठान करने की योजना बना रहे हैं? अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें!

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अमित गुप्ता

पत्रकारिता में पिछले 30 वर्षों का अनुभव। दैनिक भास्कर, अमर उजाला में पत्रकारिता की। दैनिक भास्कर में 20 वर्षों तक काम किया। अब अपने न्यूज पोर्टल हरियाणा न्यूज पोस्ट (Haryananewspost.com) पर बतौर संपादक काम कर रहा हूं। खबरों के साथ साथ हरियाणा के हर विषय पर पकड़। हरियाणा के खेत खलियान से राजनीति की चौपाल तक, हरियाणा सरकार की नीतियों के साथ साथ शहर के विकास की बात हो या हर विषयवस्तु पर लिखने की धाकड़ पकड़। म्हारा हरियाणा, जय हरियाणा।

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