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Gita Jayanti : ऐसे 70 साल पहले गीता जयंती की हुई शुरुआत, 52 देशों तक पहुंची महोत्सव की महक

On: नवम्बर 5, 2025 7:28 अपराह्न
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Gita Jayanti : ऐसे 70 साल पहले गीता जयंती की हुई शुरुआत, 52 देशों तक पहुंची महोत्सव की महक
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कुरुक्षेत्र (Gita Jayanti )। महाभारत युद्व के दौरान करीब 5161 साल पहले मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया गीता का उपदेश पूरी मानवता के लिए अमर संदेश था। इसका मर्म समझ आज हर कोई अपने जीवन की राह को आसान बनाने को आतुर है। यही कारण है कि आज दुनिया के कौने-कौने तक इस संदेश की सार्थकता मानी जा रही है।

इसी संदेश को दुनिया तक पहुंचाने के लिए ही हर साल पवित्र ब्रह्मसरोवर तट पर गीता महोत्सव मनाया जा रहा है। इस बार महोत्सव 15 नवंबर से पांच दिसंबर तक मनाया जा रहा है। गीता जयंती एक दिसंबर को है, लेकिन 21 दिन तक चलने वाले इस महोत्सव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 25 नवंबर को शामिल होंगे।

यह महोत्सव अपने पूर्ण अंतरराष्ट्रीय स्वरूप में दिखाई देगा लेकिन इस स्तर तक पहुंचने में करीब 70 साल का सफर तय करना पड़ा। इस बार महोत्सव के दौरान जहां 15 देशों के करीब 25 स्कॉलर गीता पर धर्मनगरी में ही मंथन करेंगे तो वहीं 60 देशों की विभिन्न भाषाओं में लिखी गीता भी महोत्सव की महत्ता व स्वरूप को कईं गुना बढ़ाएंगी। 2022 में ही तंजानियां सहित पांच देशों के शिल्पकार पहुंचे थे तो इस बार विदेशों से पहुंचने वाले शिल्पकारों के लिए करीब 40 स्टॉल होंगे। दूतावासों के माध्यम से 52 देशों में गीता महोत्सव मनाया जा रहा है।

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घर-घर ही मनाई जाती थी Gita Jayanti

केडीबी मानद सचिव उपेंद्र सिंघल के मुताबिक पहले शहर में ही अपने-अपने घर गीता जयंती मनाई जाती थी, लेकिन करीब 70 साल पहले भारत सेवा आश्रम, गीता धाम व हिंदू मिशन ज्योतिसर की ओर से सामाजिक तौर पर कार्यक्रम किया जाने लगा था।

वहीं श्री जयराम विद्यापीठ ने वर्ष 1984 में मनाना शुरू किया। वहीं श्री जयराम संस्थाओं से जुड़े राजेश सिंगला बताते हैं कि संस्था की ओर से अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर महोत्सव के चलते 1992 से शोभा यात्रा निकाली जा रही है जबकि 1989 से एक सप्ताह के लिए ब्रह्मसरोवर के पुरूषोत्तमपुरा बाग में कथा का आयोजन शुरू किया गया था।

34 साल पहले 1991 में संत मोरारी बापू ने सामाजिक संस्थाओं के सार्थक प्रयासों के चलते ही ब्रह्मसरोवर के पुरुषोत्तमपुरा बाग में 16 से 24 मार्च तक श्रीराम कथा की थी। वर्ष 2022 में पहली बार केडीबी के साथ 101 संस्थाएं जुड़ी थी।

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2002 में मिला राष्ट्रीय दर्जा तो 2016 से अंतरराष्ट्रीय

समय के साथ गीता महोत्सव का स्वरूप भी बदलता रहा। समाजसेवी एवं केडीबी सदस्य अशोक रोशा बताते हैं कि

कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड 1968 में बना लेकिन 1989 में बोर्ड की ओर से गीता जयंती समारोह मनाया जाने लगा था। पहले यह कुरुक्षेत्र उत्सव के नाम से ही मनाया जाता रहा। इसमें कॉलेज स्तर के विद्यार्थी ही गीता श्लोकाचारण करते थे। वर्ष 2000 में शिल्प मेला शुरू किया गया तो वर्ष 2003 में लाइट एंड सांउड शो महाभारत व गीता संदेश थीम पर शुरू किया। महोत्सव को 2002 में राष्ट्रीय दर्जा मिला तो उस समय केंद्र सरकार ने महाभारत उत्सव के तौर पर व्यापक स्तर पर मनाया था, जिसमें तत्कालीन उपराष्ट्रपति भैरो सिंह शेखावत और उपप्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी भी पहुंचे थे।

इस बार गीता जयंती के मुख्य कार्यक्रम

अंतरराष्ट्रीय गीता सम्मेलन- 24 से 26 नवंबर
स्वामी रामभद्राचार्य की कथा- 26 से 30 नवंबर
संत सम्मेलन- 29 नवंबर
देव स्थानम सम्मेलन- 30 नवंबर
गीत जयंती दोपोत्सव व 18 हजार बच्चों द्वारा श्लोकोच्चारण -1 दिसंबर

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2016 से होने लगा अंतरराष्ट्रीय स्वरूप

वर्ष 2003 से 2015 तक कुरुक्षेत्र उत्सव के रूप में ही यह समारोह मनाया जाता रहा, लेकिन वर्ष 2015 में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने समारोह में ही बतौर मुख्यातिथि अगले साल से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाने का एलान किया। अब तक 2019 में मॉरिशस व यूके, 2022 में कनाडा, 2023 में आस्ट्रेलिया, 2024 में श्रीलंका व इस वर्ष 2025 में इंडोनेशिया में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव मनाया जा चुका है।

मौलिक गुप्ता

मौलिक गुप्ता एक प्रतिभाशाली और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 8 वर्षों से एंटरटेनमेंट और ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर आकर्षक और ताज़ा खबरें लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ बॉलीवुड, टीवी, सेलिब्रिटी अपडेट्स, वायरल ट्रेंड्स और सोशल मीडिया की हलचल को कवर करती हैं, जो पाठकों को मनोरंजन की दुनिया से जोड़े रखती हैं। मौलिक का लेखन शैली जीवंत, रोचक और समयानुकूल है, जो युवा और विविध पाठकों को आकर्षित करता है। वे Haryananewspost.com न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं, जहाँ उनके लेख ट्रेंडिंग विषयों पर गहरी अंतर्दृष्टि और मनोरंजक जानकारी प्रदान करते हैं।

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