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Muharram 2025: मुहर्रम 27 जून से शुरू, जानें आशूरा की तारीख और करबला की कहानी

On: जून 19, 2025 6:30 अपराह्न
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Muharram 2025: मुहर्रम 27 जून से शुरू, जानें आशूरा की तारीख और करबला की कहानी
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Ashura Roza 2025 Kab Hai Muharram 2025: मुहर्रम 2025 (Muharram 2025) का नाम सुनते ही दिल में एक अजीब सी उदासी और सम्मान का भाव जागता है। ये वो महीना है जो सिर्फ इस्लामिक कैलेंडर की शुरुआत ही नहीं करता, बल्कि सत्य और बलिदान की वो कहानी सुनाता है जो हर दिल को झकझोर देती है। 27 जून 2025 की शाम से भारत में मुहर्रम शुरू होगा, और 6 जुलाई को आशूरा का दिन होगा, जो करबला की शहादत को याद करता है। आइए, इस पवित्र महीने की कहानी, तारीख और महत्व को करीब से जानें।

Muharram 2025: मुहर्रम की शुरुआत

मुहर्रम इस्लामिक हिजरी कैलेंडर का पहला महीना है, जो 27 जून 2025 (शुक्रवार) की शाम से शुरू होगा। ये तारीख चांद के दीदार पर निर्भर करती है, जैसा कि इस्लामिक परंपरा में होता है। मुहर्रम (Islamic New Year) को इस्लाम के चार पवित्र महीनों में गिना जाता है, जहां युद्ध और संघर्ष वर्जित हैं। लेकिन ये कोई उत्सव का महीना नहीं। बल्कि, ये शोक, चिंतन और सिद्धांतों के लिए बलिदान की याद दिलाता है। इस महीने में लोग ताजिए निकालते हैं और इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हैं।

आशूरा करबला की दिल दहलाने वाली कहानी

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10 मुहर्रम, यानी आशूरा (Ashura 2025), जो 6 जुलाई 2025 को पड़ेगा, इस महीने का सबसे भावनात्मक दिन है। इस दिन पैगंबर मोहम्मद साहब के नाती हजरत इमाम हुसैन को करबला (आज के इराक में) में शहीद किया गया था। इमाम हुसैन ने जालिम शासक यजीद के सामने सिर झुकाने से इनकार कर दिया। उनकी सेना ने इमाम हुसैन, उनके परिवार और 72 साथियों को घेर लिया। पानी तक रोक दिया गया, यहाँ तक कि उनके 6 महीने के बेटे अली असगर को भी नहीं बख्शा। आशूरा के दिन इमाम हुसैन की शहादत (Imam Hussain Martyrdom) ने सत्य और न्याय की मिसाल कायम की।

क्यों है ये शोक का महीना?

मुहर्रम सिर्फ एक महीना नहीं, बल्कि सत्य के लिए लड़ने और अत्याचार के खिलाफ खड़े होने का प्रतीक है। इमाम हुसैन की शहादत (Karbala History) हमें सिखाती है कि सच्चाई के लिए जान भी देनी पड़े तो पीछे नहीं हटना चाहिए। इस दौरान शिया समुदाय खासतौर पर ताजिए, मातम और जुलूस निकालता है। ये जुलूस करबला की उस दर्दनाक घटना को याद करते हैं, जब इमाम हुसैन और उनके साथियों ने हक के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। ये महीना हमें सिखाता है कि सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए।

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कैसे मनाया जाता है मुहर्रम?

मुहर्रम में कोई जश्न नहीं होता। लोग सादगी से इस महीने को याद करते हैं। आशूरा के दिन रोजा (Ashura Roza) रखा जाता है, जो पैगंबर की सुन्नत है। शिया समुदाय में मातम और ताजिए के जुलूस निकाले जाते हैं। सुन्नी समुदाय में भी आशूरा का रोजा और दुआएं की जाती हैं। ये महीना हमें एकजुटता, धैर्य और बलिदान की सीख देता है। मुहर्रम (Muharram Significance) हमें याद दिलाता है कि जिंदगी में सच्चाई और इंसानियत सबसे ऊपर है।

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भारत मेहंदीरत्ता

भारत मेहंदीरत्ता एक अनुभवी पत्रकार और लेखक हैं, जो पिछले 11 वर्षों से ऑटो और क्रिकेट से जुड़ी खबरों पर रोचक और तथ्यपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ ऑटोमोटिव इंडस्ट्री की नवीनतम जानकारियों, जैसे कार-बाइक लॉन्च, प्राइस अपडेट्स, और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, के साथ-साथ क्रिकेट की दुनिया की रोमांचक खबरों, जैसे मैच अपडेट्स, खिलाड़ियों के प्रदर्शन और टूर्नामेंट विश्लेषण को कवर करती हैं। भारत का लेखन शैली जीवंत, गहन और पाठक-केंद्रित है, जो ऑटो और क्रिकेट प्रेमियों को समान रूप से आकर्षित करता है।

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