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क्या आपको पता है? भारत में साइकिल चलाने के लिए भी लगता था लाइसेंस, देनी पड़ती थी इतनी फीस

On: अप्रैल 29, 2026 12:49 अपराह्न
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क्या आपको पता है? भारत में साइकिल चलाने के लिए भी लगता था लाइसेंस, देनी पड़ती थी इतनी फीस
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अंबाला, 29 अप्रैल (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। आज के दौर में भले ही साइकिल चलाने के लिए किसी सरकारी कागज की जरूरत न पड़ती हो, लेकिन 1940 के दशक में स्थिति बिल्कुल अलग थी। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही जानकारी के मुताबिक, उस दौर में साइकिल रखना एक बड़ा ‘स्टेटस सिंबल’ माना जाता था। ब्रिटिश काल के दौरान और आजादी मिलने के कुछ सालों बाद तक भारत के अधिकांश शहरों, कस्बों और गांवों में साइकिल चलाने के लिए लाइसेंस लेना कानूनी रूप से अनिवार्य था। यह अनुमति स्थानीय नगर पालिका, पंचायत समिति या कैंटोनमेंट बोर्ड द्वारा दी जाती थी।

2 रुपये की फीस और पीतल का खास ‘टैग’

इस ऐतिहासिक व्यवस्था के तहत साइकिल मालिकों को हर साल अपना लाइसेंस रिन्यू कराना पड़ता था। उस समय एक साल के लाइसेंस की कीमत 2 रुपये तय की गई थी, जिसकी वैल्यू आज के मुकाबले काफी अधिक थी।

लाइसेंस मिलने के बाद प्रशासन की ओर से पीतल या एल्युमिनियम का एक छोटा सा टोकन या टैग दिया जाता था। इस टैग को साइकिल की हेड ट्यूब या फ्रेम पर प्रमुखता से लगाना होता था ताकि चेकिंग के दौरान अधिकारी इसे आसानी से देख सकें।

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रात में लाइट और बिना लाइसेंस पर एक्शन

उस दौर में यातायात के नियम आज की तरह ही सख्त थे। अगर कोई व्यक्ति बिना लाइसेंस के साइकिल चलाते हुए पकड़ा जाता था, तो स्थानीय निकाय के कर्मचारी तुरंत जुर्माना वसूलते थे। नियमों के मुताबिक, रात के समय साइकिल पर हेडलाइट या लैंप लगाना अनिवार्य था। सुरक्षा के इस मानक को पूरा न करने पर व्यक्ति को लाइसेंस जारी नहीं किया जाता था। 1940 के दशक में साइकिल को एक ‘लग्जरी वस्तु’ की श्रेणी में रखा जाता था, लेकिन जैसे-जैसे मोटर वाहनों का चलन बढ़ा, प्रशासन का ध्यान बड़े वाहनों की ओर शिफ्ट हो गया और साइकिल को इन पाबंदियों से मुक्त कर दिया गया।

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मौलिक गुप्ता

मौलिक गुप्ता एक प्रतिभाशाली और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 8 वर्षों से एंटरटेनमेंट और ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर आकर्षक और ताज़ा खबरें लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ बॉलीवुड, टीवी, सेलिब्रिटी अपडेट्स, वायरल ट्रेंड्स और सोशल मीडिया की हलचल को कवर करती हैं, जो पाठकों को मनोरंजन की दुनिया से जोड़े रखती हैं। मौलिक का लेखन शैली जीवंत, रोचक और समयानुकूल है, जो युवा और विविध पाठकों को आकर्षित करता है। वे Haryananewspost.com न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं, जहाँ उनके लेख ट्रेंडिंग विषयों पर गहरी अंतर्दृष्टि और मनोरंजक जानकारी प्रदान करते हैं।

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