भारत में रेहड़ी-पटरी वाले से लेकर बड़े शोरूम तक हर जगह यूपीआई का इस्तेमाल धड़ल्ले से हो रहा है। डिजिटल पेमेंट की इसी रफ्तार का फायदा उठाकर अब साइबर अपराधियों ने सीधे आपके बैंक खाते पर डाका डालने का नया तरीका खोज निकाला है। बाजार में, पेट्रोल पंप पर या किसी दुकान के पास अचानक कोई अनजान शख्स आपके पास आता है और कहता है कि “भाई साहब, मुझे तुरंत नकद पैसों की जरूरत है, आप मुझसे कैश ले लीजिए और मेरे खाते में यूपीआई कर दीजिए।” अगर आप भी इसे महज एक छोटी सी मानवीय मदद समझकर करने की सोच रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। यह मददगार दिखने वाला चेहरा असल में एक शातिर साइबर ठग हो सकता है जो आपके पूरे बैंक अकाउंट को फ्रीज करवा सकता है।
यूपीआई कैश एक्सचेंज का यह नया खेल कैसे काम करता है?
इस नए किस्म के फ्रॉड में ठग सीधे तौर पर किसी भी आम नागरिक को अपना निशाना बनाते हैं। वे आपके सामने ऐसी स्थिति पैदा करेंगे जैसे उन्हें वाकई कोई इमरजेंसी हो और उनका बैंक सर्वर काम न कर रहा हो। वे आपको तुरंत कैश थमा देते हैं और अपने पास मौजूद किसी अवैध या चोरी के पैसे को आपके फोनपे, गूगलपे या पेटीएम अकाउंट में ट्रांसफर कर देते हैं। आम आदमी सोचता है कि हाथ में नकद पैसा आ ही गया है तो डिजिटल ट्रांसफर करने में क्या हर्ज है, लेकिन यहीं पर वह अपराधी के बुने जाल में फंस जाता है।
आपके बैंक खाते में आया पैसा कैसे आपको मुजरिम बना सकता है?
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ठग जो पैसा आपके अकाउंट में ट्रांसफर करते हैं, वह असल में किसी दूसरे मासूम से की गई धोखाधड़ी, रंगदारी या अवैध गतिविधि का हिस्सा होता है। साइबर अपराधी पुलिस ट्रैकिंग से बचने के लिए इस गंदे पैसे (डर्टी मनी) को अलग-अलग आम लोगों के खातों में रोटेट करते हैं। जब पीड़ित व्यक्ति साइबर सेल में अपनी शिकायत दर्ज कराता है, तो जांच एजेंसियां पैसे के रूट को ट्रैक करती हैं। इस ट्रेल में जैसे ही आपका बैंक अकाउंट सामने आता है, जांच के दायरे में आपका नाम भी शामिल हो जाता है। हरियाणा न्यूज़ पोस्ट पर ये भी पढ़ें: बिना इंटरनेट के मोबाइल पर चलेगा लाइव टीवी, भारत में लॉन्च हुआ दुनिया का पहला D2M कीपैड फोन
संदिग्ध लेन-देन की वजह से बैंक अकाउंट फ्रीज होने पर क्या होता है?
यदि किसी भी फ्रॉड मनी का कनेक्शन आपके खाते से जुड़ जाता है, तो देश के नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल के निर्देश पर बैंक आपके अकाउंट पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा देता है। खाता फ्रीज होते ही आपकी अपनी मेहनत की कमाई भी ब्लॉक हो जाती है। आप न तो एटीएम से पैसे निकाल पाते हैं और न ही कोई दूसरा डिजिटल पेमेंट कर पाते हैं। इसके बाद खुद को बेकसूर साबित करने के लिए आपको महीनों तक पुलिस स्टेशनों, साइबर सेल और बैंकों के चक्कर काटने पड़ते हैं, जिससे मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है।
इस तरह की ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए क्या उपाय करें?
साइबर ठगी के इस जाल से बचने का एकमात्र तरीका पूरी तरह सतर्क रहना है। किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ कभी भी यूपीआई और कैश का एक्सचेंज न करें, भले ही वह कितनी भी गंभीर मजबूरी क्यों न दिखाए। अपने बैंक खातों और यूपीआई ऐप्स के नोटिफिकेशन को हमेशा चालू रखें और नियमित रूप से स्टेटमेंट चेक करें। यदि आपके खाते में कोई अनजान ट्रांजैक्शन दिखाई देता है, तो बिना देरी किए अपने बैंक को सूचित करें। डिजिटल फ्रॉड का शिकार होने या शक होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज कराएं।









