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एआई रोबोट को काम सिखाने के मिल रहे प्रति घंटा 250 रुपये, भारत में शुरू हुआ अनोखा ट्रेंड

On: जून 15, 2026 6:30 अपराह्न
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एआई रोबोट को काम सिखाने के मिल रहे प्रति घंटा 250 रुपये, भारत में शुरू हुआ अनोखा ट्रेंड
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आने वाले भविष्य में एआई रोबोट्स आपके घरों में आम काटते, झाड़ू-पोछा करते या रसोई में चाय-कॉफी बनाते हुए दिखाई दे सकते हैं। इस काम को हकीकत में बदलने के लिए टेक कंपनियां भारतीय लोगों की मदद से रोबोट्स को कड़ा अभ्यास करवा रही हैं। अलजजीरा की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के आम लोग अपने सिर पर स्मार्टफोन और खास मोशन सेंसर बांधकर अपने दैनिक कामों की रिकॉर्डिंग कर रहे हैं। इस अनोखे तरीके से भारतीय अपने काम करने के हुनर और तरीके सीधे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पावर्ड रोबोट्स के दिमाग में फीड कर रहे हैं।

1 घंटे के वीडियो के लिए मिल रहे 250 रुपये, महिलाएं बनीं एआई ट्रेनर

चेन्नई की रहने वाली एक साधारण गृहिणी अपने किचन में सिर पर स्मार्टफोन बांधकर आम काटती हैं और खाना बनाती हैं। वे एआई रोबोट को रसोई की बारीकियां सिखाने वाली एक प्रोफेशनल ट्रेनर बन चुकी हैं। इस काम के लिए उन्हें डेटा कंपनी की तरफ से प्रति घंटा 250 रुपये (लगभग 2.6 डॉलर) का भुगतान किया जा रहा है। चेन्नई की इस महिला का कहना है कि घर का काम करने के लिए एक घंटे के 250 रुपये भला और कौन देगा। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि आने वाले समय में वह खुद भी अपने घर के कामों के लिए ऐसा ही एक रोबोट खरीद लेंगी।

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खास मोबाइल ऐप से कंपनियों को भेजा जा रहा है डेटा

यह पूरी प्रक्रिया एक तकनीकी चैन के जरिए काम करती है। वीडियो रिकॉर्डिंग के दौरान अगर ट्रेनर का हाथ कैमरे के फ्रेम से बाहर हो जाता है, तो मोबाइल स्क्रीन पर तुरंत ‘हाथ डिटेक्ट नहीं हुआ’ का अलर्ट आ जाता है। इस सटीक वीडियो डेटा को एक विशेष मोबाइल ऐप के जरिए एआई डेटा कंपनी को भेजा जाता है। इस टेक कंपनी का मुख्य दफ्तर भारत और अमेरिका में स्थित है, जो दुनिया की बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों के लिए काम करती है। डेवलपर्स का मानना है कि इस ‘ईगोसेंट्रिक डेटा’ (फर्स्ट-पर्सन फुटेज) की मदद से रोबोट असल दुनिया में इंसानी हरकतों की हुबहू नकल करना सीख जाते हैं। हरियाणा न्यूज़ पोस्ट पर ये भी पढ़ें: Apple Siri AI: क्या अब सिरी से बात करने के लिए देने होंगे पैसे? बड़ा खुलासा

बेंगलुरु में फूलों की माला बनाने वाले भी दे रहे हैं ट्रेनिंग

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सिर्फ रसोई का काम ही नहीं, बल्कि पारंपरिक कौशल भी एआई के जरिए मशीनों में ट्रांसफर किया जा रहा है। बेंगलुरु में पिछले दस साल से सड़क किनारे बैठकर फूलों की माला बनाने वाली 55 वर्षीय पोन्नी को भी माथे पर फोन बांधकर काम करने के लिए पैसे दिए गए हैं। हालांकि, पोन्नी इस नई तकनीक को लेकर थोड़ी चिंतित भी हैं। उनका कहना है कि अगर रोबोट्स ने यह काम सीख लिया, तो अगली पीढ़ी के उन लोगों के सामने आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा जो इस तरह के मैन्युअल काम पर निर्भर हैं।

2050 तक दुनिया में होंगे एक अरब से ज्यादा ह्यूमनॉइड रोबोट

चैटजीपीटी जैसे सॉफ्टवेयर के लिए डिजिटल डेटा को प्रोसेस करना आसान है, लेकिन भौतिक दुनिया में किसी मशीन से काम करवाना बेहद जटिल काम है। इसी मुश्किल को आसान करने के लिए कुछ एआई ट्रेनर घर से, तो कुछ फैक्ट्रियों और विशेष स्टूडियो में मोशन सेंसर पहनकर रोबोट्स को तैयार कर रहे हैं। टेक एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि ह्यूमनॉइड रोबोट (इंसानों जैसे दिखने वाले रोबोट) का बाजार बहुत तेजी से बढ़ रहा है। साल 2050 तक दुनिया में एक अरब से अधिक रोबोट एक्टिव होंगे, जिनका सबसे ज्यादा इस्तेमाल इंडस्ट्रियल और कमर्शियल कामों में किया जाएगा।

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मौलिक गुप्ता

मौलिक गुप्ता एक प्रतिभाशाली और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 8 वर्षों से एंटरटेनमेंट और ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर आकर्षक और ताज़ा खबरें लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ बॉलीवुड, टीवी, सेलिब्रिटी अपडेट्स, वायरल ट्रेंड्स और सोशल मीडिया की हलचल को कवर करती हैं, जो पाठकों को मनोरंजन की दुनिया से जोड़े रखती हैं। मौलिक का लेखन शैली जीवंत, रोचक और समयानुकूल है, जो युवा और विविध पाठकों को आकर्षित करता है। वे Haryananewspost.com न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं, जहाँ उनके लेख ट्रेंडिंग विषयों पर गहरी अंतर्दृष्टि और मनोरंजक जानकारी प्रदान करते हैं।

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