Meaning of i in iPhone : ऐपल के आईफोन को लेकर दुनियाभर के टेक बाजार में हमेशा भारी क्रेज रहता है। नया मॉडल आते ही स्टोर्स के बाहर ग्राहकों की लंबी कतारें लग जाती हैं। ज्यादातर उपभोक्ता मानते हैं कि आईफोन के नाम में लगा छोटा ‘i’ सिर्फ इंटरनेट का संक्षिप्त रूप है। यह धारणा पूरी तरह सच नहीं है, क्योंकि इसके पीछे कंपनी के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स का एक बड़ा विजन और सोची-समझी ब्रांडिंग रणनीति जुड़ी है।
आईमैक से हुई शुरुआत
आईफोन से करीब नौ साल पहले 1998 में ऐपल (Steve Jobs iMac 1998 launch) ने पहली बार किसी उत्पाद के नाम में ‘i’ जोड़ा (iPhone i meaning in Hindi) था। कंपनी उस समय गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रही थी और स्टीव जॉब्स की वापसी हुई थी। संकट के उस दौर में जॉब्स ने आईमैक कंप्यूटर पेश किया, जिसने टेक जगत की दिशा बदल दी।
उसी लॉन्च इवेंट के दौरान जॉब्स ने एक खास स्लाइड दिखाकर साफ किया था कि इस छोटे ‘i’ का असल मकसद क्या है। यहीं से आगे चलकर कंपनी के तमाम प्रमुख गैजेट्स के नाम में यह अक्षर जोड़ने की परंपरा शुरू हुई।
पांच शब्दों का विजन
स्टीव जॉब्स ने बताया था कि उस दौर में कंप्यूटर से इंटरनेट (What does i stand for in Apple) जोड़ना बेहद पेचीदा काम माना जाता था। आईमैक को इस तरह तैयार किया गया था कि आम यूजर आसानी से इंटरनेट की दुनिया से जुड़ सके। इसी वजह से पहला और सबसे प्रमुख अर्थ इंटरनेट तय किया गया।
इंटरनेट के अलावा इस छोटे अक्षर के पीछे चार अन्य स्तंभ भी तय किए गए थे। इनमें पहला था इंडिविजुअल, जो हर व्यक्ति की निजी पहचान और जरूरत को रेखांकित करता था। दूसरा इंस्ट्रक्ट यानी सीखने-सिखाने की प्रक्रिया, तीसरा इन्फॉर्म यानी सूचनाओं तक सीधी पहुंच और चौथा इंस्पायर यानी यूजर्स को अपनी रचनात्मकता दिखाने के लिए प्रेरित करना था।
आईपॉड से आईफोन तक
आईमैक की अपार सफलता के बाद यह अक्षर ऐपल की सबसे बड़ी पहचान बन गया। कंपनी ने साल 2001 में अपना पोर्टेबल म्यूजिक प्लेयर पेश किया और उसे आईपॉड नाम दिया। इसके बाद 9 जनवरी 2007 को स्टीव जॉब्स ने दुनिया के सामने पहला आईफोन पेश कर मोबाइल क्रांति की नींव रखी।
हरियाणा न्यूज़ पोस्ट पर ये भी पढ़ें: सैमसंग लाया क्लिप-ऑन डिजाइन वाला Galaxy Buds On, बिना कान में डाले बजेगा म्यूजिक
जॉब्स ने उस समय आईफोन को एक फोन, टचस्क्रीन आईपॉड और इंटरनेट कम्युनिकेटर का अनूठा मेल करार दिया था। फोन के नाम में लगा यह अक्षर उसी पुरानी तकनीकी विरासत को आगे बढ़ा रहा था।
नए डिवाइसेज से दूरी
बीते दो दशकों में तकनीक और डिजिटल जरूरतें पूरी तरह बदल चुकी हैं। इंटरनेट अब किसी डिवाइस की विशेष यूएसपी न रहकर बुनियादी जरूरत बन चुका है। यही वजह है कि कंपनी ने अपनी नई पीढ़ी के गैजेट्स में इस अक्षर का इस्तेमाल धीरे-धीरे बंद कर दिया।
ऐपल वॉच, ऐपल टीवी और ऐपल विजन प्रो जैसे हालिया प्रोडक्ट्स (Apple Vision Pro naming) इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। हालांकि आईफोन, आईपैड और आईमैक जैसे स्थापित उत्पादों के नाम में यह अक्षर आज भी बरकरार है, जो स्टीव जॉब्स की मूल सोच और आधुनिक कंप्यूटिंग के शुरुआती दिनों की याद दिलाता है। #iPhoneFacts #AppleHistory #SteveJobs #TechNewsHindi











