How to Port Mobile Number : खराब मोबाइल नेटवर्क, धीमी इंटरनेट स्पीड और महंगे रिचार्ज से परेशान उपभोक्ताओं के लिए मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (एमएनपी) सबसे सुलभ विकल्प है। भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) के नियमों के तहत ग्राहक बिना अपना पुराना नंबर बदले किसी भी टेलीकॉम कंपनी में स्विच कर सकते हैं। इसके लिए महज 1900 पर एक एसएमएस भेजकर यूनिक पोर्टिंग कोड (यूपीसी) लेना होता है।
Sim port kaise kare : बार-बार कॉल ड्रॉप होना, कमजोर इंटरनेट कनेक्टिविटी या लगातार बढ़ते महंगे रिचार्ज प्लान से परेशान मोबाइल उपभोक्ताओं को अब नंबर बदलने की मजबूरी नहीं है। दूरसंचार नियामक ट्राई (टीआरएआई) की मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी यानी एमएनपी सुविधा के तहत उपभोक्ता अपना मौजूदा नंबर बरकरार रखते हुए अपनी पसंद की किसी भी दूसरी टेलीकॉम कंपनी में जा सकते हैं। इस पारदर्शी व्यवस्था से उपभोक्ताओं को बेहतर कॉलिंग नेटवर्क और किफायती डेटा प्लान चुनने की पूरी आजादी मिलती है।
पोर्टिंग प्रक्रिया के चरण
सिम पोर्ट कराने की शुरुआत आपके मौजूदा मोबाइल हैंडसेट से ही होती है। सबसे पहले अपने फोन के मैसेज बॉक्स में जाकर बड़े अक्षरों में ‘PORT’ लिखें, फिर स्पेस देकर अपना 10 अंकों का मोबाइल नंबर टाइप करें और इसे 1900 पर भेज दें।
मैसेज भेजते ही कुछ ही मिनटों में 1901 नंबर से आपके फोन पर एक यूनिक पोर्टिंग कोड यानी यूपीसी प्राप्त होगा। इस कोड को सुरक्षित रखें क्योंकि नई टेलीकॉम कंपनी में पोर्टिंग आवेदन देते समय यही कोड सबसे मुख्य पहचान बनता है।
इसके बाद अपनी पसंद की टेलीकॉम कंपनी के नजदीकी अधिकृत स्टोर या पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) पर जाएं। वहां ग्राहक अधिग्रहण फॉर्म और पोर्टिंग फॉर्म भरें, यूपीसी कोड दर्ज कराएं और अपना आधार या वैध सरकारी पहचान पत्र देकर जरूरी केवाईसी सत्यापन पूरा करें।
नया सिम कार्ड मिलने के बाद टेलीकॉम सर्किल के भीतर अमूमन 3 कार्यदिवसों में पोर्टिंग पूरी हो जाती है। पोर्टिंग पूरी होते ही पुराने ऑपरेटर का नेटवर्क बंद हो जाएगा, जिसके बाद फोन में नया सिम डालकर टेली-वेरिफिकेशन पूरा करते ही सेवाएं शुरू हो जाती हैं।
पोर्टिंग फीस के नियम
दूरसंचार नियामक ट्राई के आधिकारिक नियमों के मुताबिक नया ऑपरेटर प्रत्येक पोर्टिंग अनुरोध पर अधिकतम 6.46 रुपये तक का शुल्क ले सकता है।
यह नाममात्र का नियामक शुल्क नए सिम पर लागू होने वाले पहले रिचार्ज प्लान (एफआरसी) या अतिरिक्त मूल्यवर्धित सेवाओं के खर्च से बिल्कुल अलग होता है। उपभोक्ता स्टोर पर आवेदन जमा करते समय कुल लागू शुल्क और प्लान की पूरी जानकारी पहले ही स्पष्ट कर लें।
अनुरोध रद्द करने का नियम
यदि किसी कारणवश उपभोक्ता पोर्टिंग कराने का अपना मन बदल लेते हैं, तो उनके पास अनुरोध वापस लेने का पूरा अधिकार है। आवेदन जमा करने के 24 घंटे के भीतर ‘CANCEL’ लिखकर स्पेस दें, अपना 10 अंकों का मोबाइल नंबर दर्ज करें और 1900 पर एसएमएस भेज दें।
इस समयसीमा के भीतर भेजा गया कैंसिलेशन तुरंत स्वीकार हो जाता है। हालांकि नियमों के तहत पोर्टिंग के समय चुकाया गया प्रारंभिक शुल्क रद्द करने की स्थिति में वापस नहीं मिलता है।
पोर्टिंग में लगने वाला समय
समान टेलीकॉम सर्किल के भीतर सिम पोर्ट होने में सामान्यतः 3 कार्यदिवसों का समय लगता है। यदि उपभोक्ता एक राज्य या सर्किल से दूसरे सर्किल में नंबर पोर्ट करा रहे हैं, तो इसमें 5 कार्यदिवसों तक का समय लग सकता है।
जम्मू-कश्मीर, असम और पूर्वोत्तर के राज्यों में सुरक्षा जांच और स्थानीय नियमों के कारण इस प्रक्रिया में 15 कार्यदिवस तक लग सकते हैं। पूरी प्रक्रिया के दौरान उपभोक्ता को एसएमएस के जरिए पोर्टिंग के सटीक समय की सूचना मिलती है, जिस दौरान कुछ मिनटों के लिए नेटवर्क सेवाएं अस्थायी रूप से बाधित रह सकती हैं। #MobilePortability #SIMPort #TelecomNews #TRAI
ये भी पढ़ें: बिना एक्टिव सिम के बंद हो जाएगा आपका WhatsApp अकाउंट, जानें DoT का नया 2027 का नियम

भारत सरकार ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए 1 जनवरी 2027 से ‘सिम बाइंडिंग’ (SIM Binding) का कड़ा नियम लागू करने जा रही है। इसके तहत व्हाट्सएप, टेलीग्राम और सिग्नल जैसे मैसेजिंग ऐप्स केवल तभी काम करेंगे, जब उनसे जुड़ा हुआ मोबाइल नंबर (सक्रिय सिम) उसी फोन में मौजूद रहेगा। अब केवल एक बार ओटीपी डालकर सिम निकाल देने के बाद ये ऐप नहीं चलेंगे। (पूरी खबर पढ़ें)











