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Parshuram Jayanti 2025 kab hai: परशुराम जयंती कब है? 29 या 30 अप्रैल? जानें सही तिथि और रहस्य

On: April 26, 2025 8:09 PM
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Parshuram Jayanti 2025 kab hai: परशुराम जयंती कब है? 29 या 30 अप्रैल? जानें सही तिथि और रहस्य
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Parshuram Jayanti 2025 kab hai date puja vidhi and significance: हिंदू धर्म में भगवान परशुराम को न केवल भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है, बल्कि वे शक्ति, न्याय और धर्म का जीवंत प्रतीक भी हैं। वैशाख माह की शुक्ल तृतीया को मनाई जाने वाली परशुराम जयंती एक ऐसा पावन पर्व है, जो भक्तों को उनके शौर्य और ज्ञान से प्रेरित करता है।

इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा होती है, उपवास रखे जाते हैं और दान-पुण्य के कार्य किए जाते हैं। लेकिन 2025 में यह पर्व कब मनाया जाएगा? पूजा का सही तरीका क्या है? और इसका महत्व क्या है? आइए, परशुराम जयंती की सभी जानकारी को रोचक और सरल तरीके से जानते हैं।

Parshuram Jayanti 2025 kab hai: परशुराम फरसा धारी योद्धा की कथा

भगवान परशुराम का जन्म महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र के रूप में हुआ था। उनका नाम ‘परशुराम’ इसलिए पड़ा, क्योंकि भगवान शिव ने उन्हें एक विशेष कुल्हाड़ी, जिसे ‘फरसा’ कहा जाता है, प्रदान की थी। ‘परशु’ का अर्थ है कुल्हाड़ी, और ‘राम’ उनके नाम का हिस्सा है। शास्त्रों के अनुसार, परशुराम ने 21 बार अत्याचारी क्षत्रियों का संहार कर पृथ्वी को अधर्म से मुक्त किया।

ब्राह्मण होते हुए भी उनके पास क्षत्रिय जैसा शौर्य और युद्ध कौशल था, जो उन्हें शक्ति और ज्ञान का अद्वितीय संगम बनाता है। परशुराम को चिरंजीवी माना जाता है, और यह विश्वास है कि वे आज भी तपस्या में लीन हैं। मान्यता है कि कलियुग के अंत में वे भगवान कल्कि को युद्ध कला सिखाएंगे। परशुराम जयंती उनके इस धर्म, साहस और न्याय के प्रति समर्पण का उत्सव है।

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परशुराम जयंती 2025: सही तिथि और समय

पंचांग के अनुसार, वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि 29 अप्रैल 2025 को शाम 5:31 बजे शुरू होगी और 30 अप्रैल 2025 को दोपहर 2:12 बजे समाप्त होगी। चूंकि भगवान परशुराम का जन्म प्रदोष काल में हुआ था, इसलिए उनकी जयंती 29 अप्रैल 2025 को मनाई जाएगी।

यह दिन अक्षय तृतीया के साथ पड़ता है, जो अपने आप में एक अत्यंत शुभ तिथि है। इस दिन किए गए कार्य, दान और पूजा का फल अक्षय, यानी कभी नष्ट न होने वाला, माना जाता है।

पूजा विधि: भगवान परशुराम की अराधना का तरीका

परशुराम जयंती का दिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से खास होता है। इस दिन भक्त सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। घर के मंदिर या किसी पवित्र स्थान पर भगवान परशुराम की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। पूजा के लिए जल से भरा कलश, फूल, अक्षत, रोली, गंगाजल, चंदन, तुलसी पत्र, नारियल, मिठाई और पंचामृत तैयार करें।

दीप प्रज्वलित कर भगवान परशुराम और भगवान विष्णु का ध्यान करें। पूजा शुरू करने से पहले व्रत और पूजा का संकल्प लें। भगवान परशुराम के मंत्र, जैसे “ॐ परशुरामाय नमः” या विष्णु मंत्रों का जाप करें। इसके बाद आचमन, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। पूजा के अंत में परशुराम जी और भगवान विष्णु की आरती करें। अपनी सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, तांबा या चंदन का दान करें। यह दान विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

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परशुराम जयंती का महत्व: प्रेरणा और आशीर्वाद

परशुराम जयंती का धार्मिक और सामाजिक महत्व असीम है। भगवान परशुराम ने अपने जीवन से यह सिखाया कि धर्म और न्याय के लिए शक्ति का उपयोग अनिवार्य है। उनकी पूजा से भक्तों को आत्मविश्वास, निर्भयता और शांति प्राप्त होती है। यह पर्व हमें सिखाता है कि ज्ञान और शक्ति का संतुलन ही सच्ची सफलता का आधार है।

इस दिन पितृ दोष से मुक्ति के लिए भी तर्पण और दान का विशेष महत्व है। यह माना जाता है कि इस दिन किए गए दान से पितरों को शांति मिलती है। साथ ही, परशुराम जयंती शत्रुओं पर विजय और सुरक्षा के लिए भी शुभ मानी जाती है। कई स्थानों पर इस दिन शोभा यात्राएं और सामूहिक पूजा का आयोजन होता है, जो भक्तों को एकजुट करता है। अक्षय तृतीया के साथ पड़ने के कारण यह दिन नए कार्यों की शुरुआत और दान-पुण्य के लिए भी विशेष है।

आधुनिक समय में परशुराम जयंती की प्रासंगिकता

आज के युग में परशुराम जयंती हमें न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक और नैतिक मूल्यों से भी जोड़ती है। परशुराम का जीवन हमें सिखाता है कि अन्याय के खिलाफ खड़ा होना और धर्म की रक्षा करना हर व्यक्ति का कर्तव्य है। इस दिन भक्त न केवल पूजा और व्रत करते हैं, बल्कि सामाजिक कार्यों, जैसे जरूरतमंदों की मदद और पर्यावरण संरक्षण, में भी हिस्सा लेते हैं। यह पर्व हमें यह भी याद दिलाता है कि सच्चा धर्म वही है, जो समाज के कल्याण के लिए हो।

परशुराम जयंती 2025, जो 29 अप्रैल को मनाई जाएगी, भगवान परशुराम के शौर्य, ज्ञान और धर्म के प्रति समर्पण का उत्सव है। इस दिन व्रत, पूजा और दान के माध्यम से भक्त उनके आशीर्वाद को प्राप्त करते हैं। यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन में शक्ति और विवेक का संतुलन कितना महत्वपूर्ण है। आइए, इस परशुराम जयंती पर हम उनके आदर्शों को अपनाएं और अपने जीवन को सत्य और न्याय के मार्ग पर ले जाएं।

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नोट: इस लेख में दी गई जानकारी (Parshuram Jayanti 2025 kab hai) धार्मिक मान्यताओं और पंचांग पर आधारित है। हम इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करते।

मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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