Faridabad Weather city submerged again One hour of rain exposed the reality of smart city: Faridabad Waterlogging ने फिर फरीदाबाद की स्मार्ट सिटी की हकीकत सामने ला दी। एक घंटे की बारिश से शहर जलमग्न हो गया, सड़कों से लेकर बस स्टैंड तक पानी-पानी हो गया। लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा और प्रशासन की निष्क्रियता फिर से सवालों के घेरे में है।
Faridabad Waterlogging फिर एक बार सुर्खियों में है। दिल्ली एनसीआर में मानसून ने दस्तक दी और फरीदाबाद की स्मार्ट सिटी वाली साख पानी में बहती नजर आई।
Faridabad Weather: स्मार्ट सिटी का सपना या पानी में बहती हकीकत?
शुक्रवार की सुबह राजधानी दिल्ली समेत एनसीआर के कई हिस्सों में झमाझम बारिश ने मौसम को तो खुशनुमा बना दिया, लेकिन फरीदाबाद में बारिश एक समस्या बनकर आई। महज एक घंटे की बारिश ने शहर को ठहरने पर मजबूर कर दिया। बस स्टैंड पर ढाई फीट तक पानी भर गया। सड़कों से लेकर दफ्तरों तक, हर तरफ जलजमाव और अफरातफरी का माहौल दिखा। जिन दफ्तरों में काम होना था, वहां अब लोग पानी निकालने में ही व्यस्त नजर आए।
बल्लभगढ़ बना तालाब
बल्लभगढ़ का बस स्टैंड तो मानो तालाब में बदल गया। शहर की प्रमुख सड़कें पानी में डूब गईं और नेशनल हाईवे पर गाड़ियाँ रेंगती दिखीं। कई जगहों पर वाहन बंद हो गए और यात्रियों को घंटों फंसे रहना पड़ा। ये हालात तब हैं जब शहर को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत अपग्रेड किया गया था। सवाल उठता है—क्या स्मार्ट सिटी का मतलब सिर्फ बोर्ड और घोषणाएं हैं?
स्थानीय लोगों का कहना है कि ये कोई पहली बार नहीं है। हर साल बारिश के दौरान यही तस्वीर सामने आती है, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं ढूंढा गया।
प्रशासन नदारद, यात्री बेहाल
बस स्टैंड पर जो दृश्य देखने को मिला, वो किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था—लोग छाते लिए पानी में बस की प्रतीक्षा करते हुए, बस्ते और बैग उठाकर पानी से बचते हुए। यात्रियों का कहना है कि न बेंच है, न छत की व्यवस्था और तो और पानी में खड़े होने की भी जगह नहीं बचती।
कर्मचारियों के दफ्तरों में पानी घुस गया, जिससे ना सिर्फ काम बाधित हुआ बल्कि नुकसान भी हुआ। सवाल ये है कि हर साल इसी तरह जलजमाव होता है फिर भी प्रशासन की नींद नहीं टूटती।
सिर्फ ‘स्मार्ट’ नाम से क्या होगा?
हर साल की तरह इस बार भी स्मार्ट सिटी टैग को चुनौती मिली। शहर के कुछ हिस्सों में सुधार तो हुए, लेकिन बुनियादी जल निकासी की व्यवस्था अब भी दम तोड़ती नजर आती है। लोग पूछते हैं—क्या स्मार्ट सिटी का मतलब दिखावे की सड़कों और रंगीन लाइट्स तक ही सीमित है? जब एक घंटे की बारिश पूरा सिस्टम ठप कर दे, तो सोचने की जरूरत है कि असल सुधार कहां होना चाहिए।













