चंडीगढ़ . भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ताजा रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। मार्च के पहले हफ्ते में ही उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के बड़े हिस्से में सूरज के तेवर तल्ख हो गए हैं। दिल्ली-एनसीआर से लेकर हरियाणा और पंजाब तक अधिकतम तापमान सामान्य के मुकाबले 6 डिग्री सेल्सियस तक ऊपर जा चुका है। राजधानी दिल्ली में आज 6 मार्च को पारा 35 डिग्री तक पहुंचने के आसार हैं, जिसने समय से पहले ही लोगों को पंखे और एसी चलाने पर मजबूर कर दिया है।
दिल्ली-एनसीआर में गर्मी का टॉर्चर और हवाओं का रुख
दिल्ली और आसपास के इलाकों में अगले तीन दिनों तक आसमान बिल्कुल साफ रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार 6 से 8 मार्च के बीच न्यूनतम तापमान 15 से 18 डिग्री के बीच रहेगा, जबकि दिन में चिलचिलाती धूप परेशान करेगी। दिन के समय उत्तर-पश्चिमी दिशा से आने वाली गर्म हवाएं ठिठुरन को पूरी तरह खत्म कर चुकी हैं। शाम होते ही हवा की रफ्तार कम होने से उमस भरा अहसास भी हो सकता है। नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद में भी गर्मी का यही ट्रेंड देखने को मिल रहा है।
पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानों में बारिश का नया स्पेल
गर्मी के बीच एक राहत भरी खबर भी है। एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) हिमालयी क्षेत्रों की तरफ बढ़ रहा है। इसके प्रभाव से जम्मू-कश्मीर में आज से ही हल्की बूंदाबांदी शुरू हो सकती है। हिमाचल प्रदेश में 7 मार्च और उत्तराखंड में 8 मार्च से मौसम करवट लेगा। 11 मार्च तक इन राज्यों के ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी और निचले इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश की चेतावनी दी गई है। इसका असर मैदानी राज्यों के तापमान पर भी पड़ सकता है, जिससे बढ़ते पारे पर मामूली ब्रेक लग सकता है।
पूर्वी भारत और दक्षिण के राज्यों में मौसम का हाल
ओडिशा और पश्चिम बंगाल में मौसम तेजी से बदल रहा है। ओडिशा के झारसुगुड़ा में तापमान 39.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है, जो इस सीजन का उच्चतम स्तर है। मौसम विभाग ने भविष्यवाणी की है कि 8 से 11 मार्च के बीच पश्चिम बंगाल, सिक्किम, झारखंड और बिहार में तेज हवाओं के साथ मध्यम बारिश हो सकती है। गुजरात और कोंकण के तटीय इलाकों में गर्मी के साथ भारी उमस (Humidity) का अलर्ट जारी किया गया है, जिससे जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है।
किसानों के लिए एग्रोमेट की ‘स्पेशल एडवाइजरी’
बढ़ते तापमान ने रबी की फसलों, खासकर गेहूं और सरसों के लिए खतरा पैदा कर दिया है। कृषि विशेषज्ञों (Agromet) ने हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के किसानों को सलाह दी है कि वे गेहूं की फसल में दाना भरने की अवस्था में सुबह या शाम के समय हल्की सिंचाई जरूर करें। राजस्थान में जीरा और इसबगोल की फसल को बचाने के लिए ‘सुरक्षात्मक सिंचाई’ का सुझाव दिया गया है। महाराष्ट्र के कोंकण में आम के बागवानों को सलाह दी गई है कि वे फलों को धूप से झुलसने से बचाने के लिए बैगिंग और नियमित पानी का छिड़काव करें। पशुपालकों को भी अपने मवेशियों के लिए पर्याप्त ठंडे पानी और शेड के इंतजाम पुख्ता करने को कहा गया है।
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