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Monsoon 2025: 16 साल बाद इतनी जल्दी आएगा मानसून, सामान्य से ज्यादा बारिश की उम्मीद

On: मई 10, 2025 8:44 अपराह्न
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Monsoon 2025: 16 साल बाद इतनी जल्दी आएगा मानसून, सामान्य से ज्यादा बारिश की उम्मीद
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Monsoon 2025 will come so early after 16 years, more than normal rain expected:  भारत में इस बार मानसून की दस्तक जल्दी होने वाली है। मौसम विभाग (IMD) ने अनुमान जताया है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून 27 मई 2025 को केरल के तट पर पहुंचेगा, जो सामान्य तारीख 1 जून से चार दिन पहले है। यह 16 साल में पहली बार होगा जब मानसून इतनी जल्दी केरल पहुंचेगा। इसके साथ ही, जून से सितंबर के बीच सामान्य से ज्यादा बारिश की संभावना है, जो देश की अर्थव्यवस्था और किसानों के लिए अच्छी खबर लेकर आया है। आइए, इस बार के मानसून की खासियतों पर नजर डालते हैं।

मानसून की जल्दी दस्तक: 16 साल में पहली बार

मौसम विभाग के अनुसार, अगर मानसून 27 मई को केरल पहुंचता है, तो यह 2009 के बाद पहला मौका होगा जब यह इतनी जल्दी आएगा। 2009 में मानसून 23 मई को और 2018 में 29 मई को केरल पहुंचा था। इतिहास में सबसे जल्दी 1918 में 11 मई को मानसून ने केरल में दस्तक दी थी, जबकि सबसे देर से 1972 में 18 जून को यह पहुंचा था। इस बार मानसून की जल्दी शुरुआत के पीछे अनुकूल मौसमी परिस्थितियां हैं, जिसमें अल नीनो का प्रभाव न होना भी शामिल है। IMD ने बताया कि मानसून 13 मई तक अंडमान-निकोबार और बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में पहुंच सकता है, लेकिन आधिकारिक घोषणा केरल में इसकी एंट्री के बाद ही होगी।

Monsoon 2025: सामान्य से ज्यादा बारिश का अनुमान

इस साल मानसून सीजन में बारिश को लेकर उत्साहजनक खबर है। अर्थ एंड साइंस मिनिस्ट्री के सेक्रेटरी एम रविचंद्रन ने बताया कि जून से सितंबर के बीच 87 सेमी के औसत के मुकाबले 105 फीसदी बारिश होने की संभावना है। सामान्य बारिश 96 से 104 फीसदी के बीच मानी जाती है, जबकि 104 से 110 फीसदी को सामान्य से ज्यादा माना जाता है। यह अनुमान किसानों और अर्थव्यवस्था के लिए राहत की खबर है। हालांकि, IMD के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि केरल में मानसून की जल्दी या देरी से देश के अन्य हिस्सों में बारिश का पैटर्न तय नहीं होता। मानसून आमतौर पर 1 जून को केरल पहुंचने के बाद 8 जुलाई तक पूरे देश को कवर करता है और 17 सितंबर से वापसी शुरू होकर 15 अक्टूबर तक पूरी होती है।

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पिछले अनुमानों की सटीकता

पिछले पांच सालों में IMD और प्राइवेट मौसम एजेंसी स्काईमेट के बारिश के अनुमान काफी हद तक सटीक रहे हैं। 2024 में 108 फीसदी बारिश हुई थी, जबकि IMD ने 106 फीसदी और स्काईमेट ने 102 फीसदी का अनुमान लगाया था। 2023 में 94 फीसदी बारिश हुई, जो IMD (96 फीसदी) और स्काईमेट (94 फीसदी) के अनुमान के करीब थी। 2022 में 106 फीसदी बारिश हुई, जो दोनों एजेंसियों के अनुमान से ज्यादा थी। यह सटीकता मौसम विभाग की विश्वसनीयता को दर्शाती है, जो किसानों और नीति निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण है।

अर्थव्यवस्था के लिए मानसून का महत्व

भारत में मानसून सिर्फ बारिश नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। देश की 42.3 फीसदी आबादी कृषि पर निर्भर है, और यह GDP में 18.2 फीसदी योगदान देता है। साल भर की कुल बारिश का 70 फीसदी हिस्सा मानसून के दौरान बरसता है। देश के 70-80 फीसदी किसान फसलों की सिंचाई के लिए बारिश पर निर्भर हैं। अच्छा मानसून फसल उत्पादन बढ़ाता है, जिससे महंगाई नियंत्रित रहती है और किसानों की आय बढ़ती है। इससे त्योहारी सीजन से पहले खर्च करने की क्षमता बढ़ती है, जो अर्थव्यवस्था को गति देती है। इसके अलावा, मानसून पीने के पानी और बिजली उत्पादन के लिए भी जरूरी है।

अल नीनो का प्रभाव नहीं

इस साल मानसून के लिए एक और अच्छी खबर है। मौसम विभाग ने अप्रैल में कहा था कि 2025 में अल नीनो का प्रभाव नहीं होगा। अल नीनो आमतौर पर कम बारिश का कारण बनता है, जैसा कि 2023 में देखा गया जब 6 फीसदी कम बारिश हुई थी। इस बार अनुकूल परिस्थितियों के कारण सामान्य से ज्यादा बारिश की उम्मीद है, जो खेती और जल संसाधनों के लिए वरदान साबित हो सकती है।

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Monsoon 2025 क्या उम्मीद करें?

इस बार का मानसून न सिर्फ जल्दी आ रहा है, बल्कि यह सामान्य से ज्यादा बारिश भी ला सकता है। यह किसानों, उद्योगों, और आम लोगों के लिए खुशखबरी है। हालांकि, जल्दी मानसून का मतलब यह नहीं कि पूरे देश में बारिश का पैटर्न एकसमान होगा। क्षेत्रीय विविधताएं बनी रहेंगी। फिर भी, मौसम विभाग के अनुमान और अनुकूल परिस्थितियां उम्मीद जगाती हैं कि यह मानसून भारत की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देगा।

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राहुल शर्मा

राहुल शर्मा एक कुशल पत्रकार और लेखक हैं, जो पिछले 8 वर्षों से ब्रेकिंग न्यूज़, हरियाणा न्यूज़ और क्राइम से जुड़ी खबरों पर प्रभावशाली लेख लिख रहे हैं। उनकी खबरें तथ्यपूर्ण, गहन और तेज़ी से पाठकों तक पहुँचती हैं, जो हरियाणा और अन्य क्षेत्रों की महत्वपूर्ण घटनाओं को उजागर करती हैं। राहुल का लेखन शैली आकर्षक और विश्वसनीय है, जो पाठकों को जागरूक और सूचित रखता है। वे Haryananewspost.com और डिजिटल मंचों पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी स्टोरीज़ सामाजिक और आपराधिक मुद्दों पर गहरी छाप छोड़ती हैं।

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