Dev Deepawali 2025 का पर्व इस साल 5 नवंबर, बुधवार को मनाया जाएगा। दिवाली के 15 दिन बाद आने वाला यह त्योहार धार्मिक दृष्टि से बेहद खास होता है।

कई लोग दिवाली और देव दीपावली को एक जैसा मानते हैं, लेकिन दोनों में बड़ा अंतर है। आइए जानते हैं आखिर कैसे ये दो त्योहार अलग हैं।

दिवाली कार्तिक अमावस्या को मनाई जाती है। इस दिन भगवान राम के 14 साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की खुशी में दीप जलाए जाते हैं।

वहीं, देव दीपावली कार्तिक पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह दिन भगवान शिव द्वारा त्रिपुरासुर राक्षस का वध करने की याद में मनाया जाता है।

दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा होती है, जबकि देव दीपावली पर भगवान शिव और गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है।

दिवाली में घर-घर दीपक जलाए जाते हैं और लक्ष्मी पूजन होता है, जबकि देव दीपावली में गंगा घाटों पर हजारों दीप जलाकर आरती की जाती है।

Titदेव दीपावली को ‘देवताओं की दिवाली’ कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन देवता खुद धरती पर आकर काशी में दीप जलाते हैं।le 2

धार्मिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने इस दिन त्रिपुरासुर का वध कर ब्रह्मांड की रक्षा की थी। उसी खुशी में देवताओं ने काशी में उत्सव मनाया।

काशी (वाराणसी) में इस दिन गंगा स्नान, दीपदान और शिव-विष्णु आराधना का विशेष महत्व होता है। घाटों की रोशनी अद्भुत दृश्य बनाती है।

देव दीपावली केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अनुभव है जहां रोशनी, श्रद्धा और भक्ति का संगम देखने को मिलता है।