Capsicum Crop Damage: Capsicum and tomato crops destroyed in Durana village of Ambala: शिमला मिर्च फसल नुकसान (Capsicum Crop Damage) ने अंबाला के दुराना गांव के किसानों को गहरे संकट में डाल दिया है।
बीते कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। दुराना गांव में इस सीजन में शिमला मिर्च और टमाटर की खेती की गई थी, लेकिन बारिश ने इन फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। किसान अब प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे हैं। आइए, इस संकट की पूरी कहानी जानते हैं।
बारिश ने बर्बाद की शिमला मिर्च की फसल Capsicum Crop Damage
अंबाला के दुराना गांव में ज्यादातर किसान सब्जियों की खेती (Vegetable Farming) पर निर्भर हैं। इस बार शिमला मिर्च की खेती (Capsicum Farming) किसानों के लिए उम्मीद की किरण थी।
लेकिन लगातार बारिश (Heavy Rainfall) ने उनके सपनों को चकनाचूर कर दिया। शिमला मिर्च के पौधे सूखने लगे हैं, और फल सड़ने (Crop Spoilage) शुरू हो गए हैं। किसान बलजीत सिंह ने बताया कि यह वह समय था जब फसल से अच्छा मुनाफा मिल सकता था। लेकिन अब 90% फसल बर्बाद हो चुकी है। लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।
हजारों रुपये का नुकसान, किसान परेशान
शिमला मिर्च की फसल (Capsicum Crop) सामान्यतः प्रति एकड़ एक लाख रुपये तक की कमाई देती थी। लेकिन इस बार बारिश ने किसानों को हजारों रुपये का नुकसान (Farmer Financial Loss) पहुंचाया है। दुराना गांव की शिमला मिर्च चंडीगढ़ से कोलकाता तक बिकती थी। अब जो फसल बची है, वह मात्र 20,000 से 25,000 रुपये प्रति एकड़ में बिक रही है।
किसानों का कहना है कि इस सीजन में शिमला मिर्च से मुनाफा (Crop Profit) उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकता था। लेकिन अब वे कर्ज और नुकसान के बोझ तले दब गए हैं।
किसानों की प्रशासन से अपील
किसानों ने प्रशासन से तत्काल मदद की मांग की है। वे चाहते हैं कि सरकार फसल नुकसान (Crop Damage Compensation) के लिए मुआवजा दे। बलजीत सिंह ने कहा कि गांव के अधिकांश किसान छोटे स्तर पर खेती करते हैं। उनके पास नुकसान सहने की क्षमता नहीं है।
किसानों ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि प्रभावित फसलों का सर्वे (Crop Survey) कराकर उन्हें आर्थिक सहायता (Financial Aid for Farmers) प्रदान की जाए। साथ ही, भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए बेहतर जल निकासी व्यवस्था की भी मांग की है।
यह संकट न केवल किसानों की मेहनत को प्रभावित कर रहा है, बल्कि उनकी आजीविका को भी खतरे में डाल रहा है। प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद है ताकि किसानों को राहत मिल सके।












