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Toru crop farming: तोरी की खेती: फरीदाबाद के किसान प्रकाश ने बदली अपनी किस्मत, जानें कैसे!

On: May 29, 2025 2:28 PM
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Toru crop farming: तोरी की खेती: फरीदाबाद के किसान प्रकाश ने बदली अपनी किस्मत, जानें कैसे!
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Toru crop farming: Tori farming: Faridabad farmer Prakash changed his fortune, know how: तोरी की खेती (toru crop farming) ने फरीदाबाद जिले के ऊंचा गांव के किसान प्रकाश की जिंदगी को नई दिशा दी है। कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाले प्रकाश आज खेती से शानदार मुनाफा कमा रहे हैं।

पिछले 8 सालों से खेती में जुटे प्रकाश का मानना है कि सही समय पर बुवाई और मंडी में अच्छे दाम मिलने से किसान अपनी किस्मत बदल सकते हैं। उन्होंने सुनपेड़ गांव में पट्टे पर जमीन लेकर तोरी और अन्य सब्जियों की खेती शुरू की। आइए, जानते हैं उनकी इस प्रेरक यात्रा को!

पट्टे की जमीन पर शुरू की खेती Toru crop farming

प्रकाश ने अपनी मेहनत और लगन से खेती को नया आयाम दिया। उन्होंने 3 बीघा जमीन 27,000 रुपये सालाना किराए पर ली। इसमें से डेढ़ बीघा पर तोरी की खेती (toru crop farming) की जा रही है, जबकि बाकी जमीन पर दूसरी सब्जियां उगाई जा रही हैं।

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प्रकाश बताते हैं कि तोरी की फसल में मेहनत तो खूब लगती है, लेकिन मुनाफा भी उसी तरह शानदार मिलता है। उनकी मेहनत और सही रणनीति ने उन्हें फरीदाबाद के किसानों के लिए एक मिसाल बना दिया है।

खेत की तैयारी का खास तरीका

तोरी की खेती (toru crop farming) के लिए खेत की तैयारी बेहद जरूरी है। प्रकाश के अनुसार, खेत को पहले हल से जुताई की जाती है, फिर कल्टीवेटर से इसे और बेहतर किया जाता है।

इसके बाद मेड़ और डोल बनाए जाते हैं। बीज बोते समय 1 से 2 फीट की दूरी रखी जाती है, ताकि पौधे अच्छे से बढ़ सकें। यह तरीका न केवल फसल की गुणवत्ता बढ़ाता है, बल्कि पैदावार को भी बेहतर करता है। प्रकाश की यह तकनीक नए किसानों के लिए सीखने लायक है।

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खर्च और मुनाफे का हिसाब

अच्छी फसल के लिए खेत में 3 से 4 बार जुताई जरूरी है। प्रकाश ने डेढ़ बीघा में तोरी की खेती (toru crop farming) के लिए 6 पैकेट बीज खरीदे, जिनकी कीमत 230 रुपये प्रति पैकेट थी।

इस तरह बीजों पर करीब 6,000 रुपये खर्च हुए। इसके अलावा, खाद, सिंचाई, और मेहनत का खर्च भी जुड़ता है। अभी मंडी में तोरी 50 रुपये प्रति किलो बिक रही है, जिससे प्रकाश को शानदार मुनाफा हो रहा है। यह कमाई उनकी मेहनत का सुखद परिणाम है।

समय का महत्व और भविष्य की योजना

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प्रकाश का कहना है कि समय पर बुवाई करने वाले किसानों को मंडी में बेहतर दाम मिलते हैं। देर से बुवाई करने पर कीमत 5 से 6 रुपये प्रति किलो तक गिर जाती है, जिससे लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है। तोरी की फसल (toru crop farming) 3 महीने में तैयार हो जाती है और अक्टूबर तक चलती है।

इसके बाद प्रकाश मौसम के हिसाब से दूसरी सब्जियों की खेती शुरू करते हैं। उनकी यह मेहनत और समझदारी अन्य किसानों के लिए प्रेरणा है, जो खेती से अपनी जिंदगी बदलना चाहते हैं।

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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