Dussehra Astrology Things To Avoid (दशहरे पर क्या नहीं करना चाहिए ज्योतिष) : विजयादशमी का पर्व ज्योतिष शास्त्र में ‘अबूझ मुहूर्त’ माना जाता है, जहां शुभ योग जीवन से नकारात्मक ग्रहों के प्रभाव को समाप्त करने की शक्ति देते हैं। वर्ष 2026 में 20 अक्टूबर को बनने वाले विशेष ग्रहीय संयोगों के बीच कुछ वर्जित कार्यों को करने से बचना आवश्यक है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन तामसिक वृत्तियों, अनुचित दान और संध्या काल के गलत आचरण से राहु, केतु और शनि जनित दोष सक्रिय हो सकते हैं, जिससे घर की बरकत और सुख-समृद्धि प्रभावित होती है।
Dussehra astrology rules in Hindi : वैदिक ज्योतिष में अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को अत्यंत दुर्लभ और स्वयं-सिद्ध योग माना गया है। वर्ष 2026 में 20 अक्टूबर को विजयादशमी का पावन पर्व श्रवण नक्षत्र और विजय मुहूर्त के संयोग में मनाया जाएगा। ज्योतिष गणनाओं के अनुसार, रावण पर श्रीराम की विजय सूर्य के आत्मबल और धर्म के प्रतीक देवगुरु बृहस्पति के प्रभाव को दर्शाती है, वहीं मां दुर्गा द्वारा महिषासुर मर्दन शक्ति स्वरूपा मंगल और चंद्र के संतुलन का प्रतीक है।
दशहरे के दिन किए गए पुण्य कर्म और ज्योतिषीय उपाय (things to avoid on vijayadashami astrology) जहां नवग्रहों की शांति करते हैं, वहीं अनजाने में किए गए कुछ वर्जित कार्य कुंडली के शुभ ग्रहों को कमजोर कर देते हैं। धर्म और ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार, दशहरे के दिन कुछ विशेष कार्यों से पूरी तरह परहेज करना चाहिए ताकि ग्रहों के अशुभ प्रभावों से बचा जा सके।
तामसिक आहार से राहु और केतु का दोष
विजयादशमी पर मांस, मछली, अंडा, शराब के साथ-साथ प्याज और लहसुन का सेवन ज्योतिषीय रूप से अशुभ माना गया है। ये सभी वस्तुएं राहु और केतु (shani rahu dosha remedies on dussehra) की तामसिक ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करती हैं।
इस पावन तिथि पर तामसिक आहार ग्रहण करने से मन का कारक चंद्रमा और ज्ञान का कारक गुरु ग्रह दूषित होता है। इससे जातक के निर्णय लेने की क्षमता क्षीण होती है और मानसिक अशांति के साथ पारिवारिक जीवन में कलह बढ़ सकती है।
मूक जीवों को कष्ट देने से शनि का प्रकोप
सनातन ज्योतिष में पशु-पक्षियों और प्रकृति को विशिष्ट ग्रहों के साथ जोड़ा गया है। दशहरे के दिन किसी भी जीव को प्रताड़ित करने या पेड़ों को नुकसान पहुंचाने से न्याय के देवता शनिदेव और छाया ग्रह केतु का सीधा प्रकोप झेलना पड़ सकता है।
जीवों पर दया करने और उन्हें दाना-पानी देने से शनि, राहु और केतु की पीड़ा शांत होती है। इस दिन जीव हिंसा करने से संचित पुण्य फलों का क्षय होता है और भाग्य स्थान कमजोर होता है।
विवाद और अपमान से कमजोर होता है सूर्य व शुक्र
दशहरे के दिन घर या कार्यक्षेत्र में कलह, क्रोध और अपशब्दों का प्रयोग करने से कुंडली में सूर्य और मंगल की नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है। विशेष रूप से महिलाओं का अनादर करने से दैत्यगुरु शुक्र और बुजुर्गों का अपमान करने से देवगुरु बृहस्पति रुष्ट होते हैं।
शुक्र और गुरु के कमजोर होने से व्यक्ति के मान-सम्मान, दांपत्य सुख और आर्थिक उन्नति पर सीधा प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इस दिन वाणी पर नियंत्रण रखना और बड़ों का आशीर्वाद लेना शुभ फलदायक माना गया है।
संध्या काल का लेन-देन और वर्जित दान
ज्योतिष शास्त्र में गोधूलि वेला यानी संध्या का समय मां लक्ष्मी के आगमन का समय माना जाता है। विजयादशमी की शाम किसी को नमक (why salt is not given on dussehra evening), चीनी (शुक्र का प्रतीक) या सुई (शनि और राहु का प्रतीक) देने से घर की समृद्धि बाहर चली जाती है और आर्थिक संकट गहरा सकता है।
इसके साथ ही, इस दिन फटे-पुराने कपड़े, चमड़े की वस्तुएं या हल्दी का अनुचित दान नहीं करना चाहिए। चमड़े का अशुद्ध दान शनि और राहु को कुपित करता है, जबकि हल्दी का गलत तरीके से दान करने से गुरु दोष लग सकता है।
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यंत्र और शस्त्र की उपेक्षा से मंगल दोष
विजयादशमी के दिन अस्त्र-शस्त्र, वाहन और आजीविका से जुड़े तकनीकी औजारों की पूजा का विधान है। ज्योतिष में लोहा और मशीनरी शनि के अधीन आते हैं, जबकि धारदार हथियार और अग्नि तत्व मंगल के अधिकार क्षेत्र में हैं।
इनकी उपेक्षा करने या साफ-सफाई न करने से कुंडली में मंगल और शनि की युति का नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है। इनकी विधिवत पूजा और सम्मान करने से कार्यक्षेत्र में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और जातक को विजय की प्राप्ति होती है। #Dussehra2026 #AstrologyRules #VijayadashamiTips
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी वैदिक ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। haryana news post इसकी पुष्टि नहीं करता है।











