Navratri Kalash Sthapana Astrology : शारदीय नवरात्रि 2026 का आरंभ 11 अक्टूबर को हस्त नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग के शुभ संयोग में हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र में घट को संपूर्ण ब्रह्मांड और त्रिदेवों का प्रतीक माना गया है। ग्रह दोषों के निवारण और घर में सकारात्मक ऊर्जा के वास के लिए सही चौघड़िया, ईशान कोण और शास्त्रसम्मत पूजन सामग्री के साथ कलश स्थापना करना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है।
Navratri kalash sthapana astrological significance : वैदिक ज्योतिष के अनुसार शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ आश्विन शुक्ल प्रतिपदा यानी 11 अक्टूबर 2026, रविवार को सूर्य के विशेष प्रभाव में हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र में कलश को संपूर्ण ब्रह्मांड का प्रतीक और सुख-शांति व श्रीवृद्धि का मुख्य कारक माना गया है। देवी भागवत और धर्मग्रंथों के अनुसार घटस्थापना से घर का वास्तु दोष समाप्त होता है और नवग्रहों का संतुलन बनता है।
कलश का ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कलश के मुख पर भगवान विष्णु, कंठ में रुद्र और मूल भाग में सृष्टि रचयिता ब्रह्मा का वास होता है। कलश के मध्य भाग में मातृकाओं और अंतरिक्ष का वास माना गया है, इसलिए इसे ब्रह्मांडीय ऊर्जा का केंद्र कहते हैं।
नवरात्रि में तांबे या मिट्टी के कलश का उपयोग सर्वश्रेष्ठ फल देता है। तांबा सूर्य ग्रह की धातु है, जो आत्मविश्वास और यश बढ़ाती है, जबकि मिट्टी पृथ्वी तत्व को संतुलित कर जीवन में स्थिरता लाती है।
ग्रहों के आधार पर सामग्री चयन
घटस्थापना में प्रयुक्त होने वाली हर सामग्री (navratri puja samagri astrology) एक विशेष ग्रह का प्रतिनिधित्व करती है। सात धान्य या जौ बोना बुध और शुक्र ग्रह की शुभता का प्रतीक है, जो जीवन में धन-धान्य और वंश वृद्धि का कारक बनता है।
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कलश में गंगाजल, सुपारी और अक्षत का प्रयोग चंद्रमा और बृहस्पति ग्रह को मजबूत करता है। नारियल को मां लक्ष्मी और शुक्र ग्रह का स्वरूप माना गया है, जिसका मुख साधक की ओर रहने से आर्थिक तंगी दूर होती है।
जोत और नवग्रह शांति के नियम
अखंड जोत (akhand jyot rules astrology) प्रज्वलित करने के लिए गाय का शुद्ध देसी घी सूर्य और देवगुरु बृहस्पति की कृपा प्राप्त करने के लिए सबसे फलदायी है। यह घर के आभामंडल को शुद्ध करके नकारात्मक शक्तियों का नाश करता है।
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कुंडली में यदि शनि, राहु या केतु का दुष्प्रभाव हो, तो सफेद तिल के तेल का दीपक जलाना ज्योतिष सम्मत माना गया है। तिल का तेल तामसिक ऊर्जा को शांत करके पूजा स्थल को स्थिरता और सुरक्षा कवच प्रदान करता है।
दिशा, वास्तु और मुहूर्त का प्रभाव
वास्तु शास्त्र और ज्योतिष के अनुसार कलश स्थापना (navratri ghatasthapana vastu tips) हमेशा ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) या पूर्व दिशा में माता की चौकी के दाईं ओर करनी चाहिए। यह दिशा देव शक्तियों के प्रवाह की मानी जाती है, जिससे मानसिक स्पष्टता और आध्यात्मिक शांति मिलती है।
घटस्थापना के दौरान राहुकाल का त्याग करना अनिवार्य है, क्योंकि राहुकाल में किया गया संकल्प फलित नहीं होता। जौ के पात्र में संतुलित नमी रखकर और शांत मन से की गई पूजा से घर के सभी वास्तु व ग्रह दोष स्वतः शांत हो जाते हैं। #Navratri2026 #Astrology #KalashSthapana #NavratriAstrology
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी वैदिक ज्योतिष, धर्मशास्त्र और मान्यताओं पर आधारित है। हरियाणा न्यूज पोस्ट इसकी पुष्टि नहीं करता है।












