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पितृ पक्ष में दीप दान का ज्योतिषीय रहस्य, 10 अक्टूबर तक रोज करें दीप दान

On: सितम्बर 28, 2026 12:42 अपराह्न
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Pitru Dosh Deepak Remedy : वैदिक ज्योतिष में पितृ पक्ष को कुंडली के अदृश्य ग्रह दोषों को शांत करने का दुर्लभ कालखंड माना गया है। पंचांग के अनुसार साल 2026 का पितृ पक्ष 26 सितंबर से आरंभ होकर 10 अक्टूबर सर्वपितृ अमावस्या तक प्रभावी रहेगा। कुंडली में जब सूर्य, चंद्रमा या गुरु ग्रह पर राहु-केतु या शनि की कुदृष्टि पड़ती है, तब जातक पितृ ऋण और पितृ दोष का शिकार बनता है। ऐसे में नियमित दीप दान केवल एक पारंपरिक विधि नहीं, बल्कि ग्रहों की ऊर्जा को संतुलित करने का सटीक ज्योतिषीय उपचार है।

ज्योतिष शास्त्र में दीप प्रज्वलन को अग्नि तत्व के माध्यम से आकाश और वायु तत्व की शुद्धि माना जाता है। जन्मकुंडली का नौवां भाव पूर्वजों और भाग्य का होता है, जबकि दसवां भाव कर्म और दिशा का कारक है। जब कोई व्यक्ति पितृ पक्ष की सोलह तिथियों पर संध्या समय दीप दान (Jyotish deep daan niyam) करता है, तो नौवें और दसवें भाव से जुड़ी रुकावटें खत्म होने लगती हैं। यह उपाय संतान बाधा, नौकरी-व्यापार में घाटा और मानसिक अशांति को दूर करने में चमत्कारिक रूप से काम करता है।

दक्षिण दिशा और यम तत्व

ज्योतिष और वास्तु चक्र में दक्षिण दिशा (Dakshin disha deepak vastu) के स्वामी मंगल और यमराज माने जाते हैं। यह दिशा अग्नि और पृथ्वी तत्व के संधि स्थल पर स्थित होकर पितरों के लोक का प्रतिनिधित्व करती है। इस दिशा में दीपक की लौ रखने से कुंडली का मंगल और राहु संतुलित होता है। दक्षिण मुखी दीपक जलाने से दक्षिण दिशा की नकारात्मक तरंगे भस्म होती हैं और पितरों का मार्ग प्रशस्त होता है।

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ग्रहों के अनुकूल तेल का चयन

दीपक में उपयोग किए जाने वाले द्रव्य का सीधा संबंध नवग्रहों से है। सरसों के तेल का दीपक जलाने से शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और कुदृष्टि का शमन होता है। काले तिल का तेल राहु-केतु (Shani Rahu shanti deepak) के विषैले प्रभावों और अज्ञात भय को नष्ट करता है। वहीं देसी गाय का घी कुंडली में सूर्य और बृहस्पति को बल देकर मान-सम्मान और वंश वृद्धि कराता है।

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काले तिल के आसन का महत्व

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ज्योतिष में दीपक को सीधे भूमि पर रखना भू-दोष और ऊर्जा के क्षरण का कारण बनता है। दीपक के नीचे काले तिल का आसन बिछाने से राहु का कुप्रभाव कटता है और शनि देव प्रसन्न होते हैं। चावल या अक्षत का आसन रखने से चंद्रमा को बल मिलता है, जिससे मन शांत रहता है। यह आसन दीपक की दिव्य ऊर्जा को सीधे पाताल लोक और पितृ लोक तक संचालित करता है।

वास्तु और ज्योतिषीय स्थान

घर के दक्षिणी कोने में दीपक स्थापित करने से यम का दुष्प्रभाव कटता है और अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है। मुख्य द्वार पर दीपक रखने से बाहर से आने वाली नकारात्मक ऊर्जा दहलीज पर ही रुक जाती है। पीने के पानी के स्थान यानी परिंडे पर चंद्र और वरुण देव का वास होता है, जहां दीप जलाने से कालसर्प दोष शांत होता है। पीपल वृक्ष में साक्षात गुरु, शनि और ब्रह्मा-विष्णु-महेश का वास होने से वहां दीप दान महापुण्य देता है।

प्रदोष काल का ग्रह संयोग

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ज्योतिषीय नियमों (Pitru Paksha 2026 Astrology) के अनुसार सूर्यास्त के तुरंत बाद का समय दिन और रात की संधि यानी प्रदोष काल होता है। इस समय तमोगुण का प्रभाव बढ़ता है और राहु की ऊर्जा सक्रिय होती है। ठीक इसी कालखंड में प्रज्वलित दीपक राहु के अंधकार को समाप्त कर सूर्य की तेजस्विता लाता है। इस समय दीप दान करने से सीधे पितरों की सूक्ष्म देह को सात्विक ऊष्मा प्राप्त होती है।

संकल्प और क्षमा प्रार्थना

दीपक प्रज्वलित करने के बाद हाथ जोड़कर पितृ गायत्री या पितृ स्मरण मंत्र (Pitru gayatri mantra) का जाप करना चाहिए। दक्षिण दिशा में मुख करके अपनी कुल परंपरा और गोत्र का ध्यान करें। इससे नवग्रहों की पीड़ा से राहत मिलती है और कुंडली का नौवां भाव सक्रिय होकर भाग्य वृद्धि करता है। अंत में अनजाने में हुए पापों के प्रायश्चित से पितरों का आशीर्वाद जीवन के सभी अवरोध हटा देता है। #JyotishTips #PitruDoshNivaran #PitruPaksha2026

मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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