नई दिल्ली। अगस्त 2026 की शुरुआत में राहु और केतु की स्थिति में होने वाला बदलाव कई राशियों के लिए नई परिस्थितियां लेकर आ सकता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार 2 अगस्त को दोनों छाया ग्रह नक्षत्र परिवर्तन करेंगे और इसका प्रभाव सभी 12 राशियों पर अलग-अलग रूप में देखने को मिल सकता है। तीन राशियां रहेंगी फोकस में।
राहु और केतु को नवग्रहों में विशेष स्थान प्राप्त है। दोनों ग्रह प्रत्यक्ष दिखाई नहीं देते, इसलिए इन्हें छाया ग्रह कहा जाता है। राहु को अचानक होने वाली घटनाओं, तकनीक, आधुनिक क्षेत्रों, शोध और रहस्यमयी विषयों का कारक माना जाता है। केतु का संबंध आध्यात्म, वैराग्य, यात्राओं, आत्मचिंतन और आंतरिक विकास से जोड़ा जाता है। जब इन दोनों ग्रहों की स्थिति बदलती है तो कई क्षेत्रों में बदलाव के संकेत माने जाते हैं।
2 अगस्त को होगा नक्षत्र परिवर्तन
द्रिक पंचांग के अनुसार 2 अगस्त 2026, रविवार को सुबह करीब 12 बजकर 8 मिनट पर राहु धनिष्ठा नक्षत्र में गोचर करेंगे। इसी समय केतु अपने स्वयं के नक्षत्र मघा के दूसरे चरण में प्रवेश करेंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं में इसे महत्वपूर्ण परिवर्तन माना जाता है, क्योंकि दोनों छाया ग्रह एक साथ नक्षत्र परिवर्तन कर रहे हैं।
इस गोचर का प्रभाव सभी राशियों पर रहेगा, लेकिन मेष, कन्या और कुंभ राशि के जातकों के लिए इसे अपेक्षाकृत अधिक अनुकूल माना जा रहा है।
मेष राशि को मिल सकती है राहत
मेष राशि के लोगों के लिए अगस्त की शुरुआत सकारात्मक संकेत लेकर आ सकती है। लंबे समय से चली आ रही कुछ परेशानियों का समाधान मिलने की संभावना है। रुके हुए कार्य धीरे-धीरे आगे बढ़ सकते हैं। स्वास्थ्य के मामले में भी पहले की तुलना में राहत मिलने के योग माने जा रहे हैं। मानसिक दबाव कम हो सकता है।
कन्या राशि वालों को मिलेगा सहयोग
कन्या राशि के जातकों के लिए यह गोचर संबंधों और आर्थिक मामलों में राहत देने वाला माना जा रहा है। विरोधियों का दबाव कम हो सकता है। परिवार और करीबी लोगों के साथ संबंध बेहतर बनने के संकेत हैं। आय के नए अवसर मिलने या आर्थिक स्थिति में सुधार की संभावना भी व्यक्त की गई है।
कुंभ राशि के लिए बन सकते हैं नए अवसर
कुंभ राशि के लोगों के लिए राहु-केतु का यह परिवर्तन कई अधूरे कार्यों को गति देने वाला माना जा रहा है। जिन योजनाओं में लगातार रुकावट आ रही थी, उनमें प्रगति दिखाई दे सकती है। आर्थिक तनाव कम होने के संकेत हैं। कार्यक्षेत्र में नई संभावनाएं भी सामने आ सकती हैं।
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इन उपायों को माना जाता है शुभ
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार गोचर काल में तिल, दाल, वस्त्र, तेल और बर्तनों का दान करना शुभ माना जाता है। पक्षियों को नियमित दाना डालना और चींटियों को मीठा खिलाना भी लाभकारी माना गया है। राहु और केतु के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए संबंधित मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जप करने की भी सलाह दी जाती है।
ध्यान रहे कि ज्योतिषीय फलादेश सामान्य ग्रह स्थितियों पर आधारित होते हैं। किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली, दशा और अन्य ग्रहों की स्थिति के अनुसार वास्तविक प्रभाव अलग हो सकता है।








