Shardiya Navratri 2026 Date : शारदीय नवरात्रि का महापर्व रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से आरंभ (shardiya navratri kab se shuru hai) हो रहा है, जिसका समापन 19 अक्टूबर को महानवमी पर होगा। इस बार कलश स्थापना पर 58 साल बाद हस्त नक्षत्र, शुक्ल योग और गजकेसरी योग का दुर्लभ मेल बन रहा है। साथ ही शनि के शश राजयोग और 5 दिन सर्वार्थ सिद्धि योग से इस नवरात्रि का धार्मिक व ज्योतिषीय महत्व कई गुना बढ़ गया है।
पंचकूला स्थित माता मनसा देवी मंदिर, गुरुग्राम के शीतला माता मंदिर और कुरुक्षेत्र के भद्रकाली शक्तिपीठ में इस पावन पर्व को लेकर विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं। प्रतिपदा यानी पहले दिन सूर्योदय काल में हस्त नक्षत्र और शुक्ल योग का शुभ संयोग रहेगा। इसी मंगलकारी बेला में घरों और मंदिरों में घटस्थापना की जाएगी।
58 साल बाद गजकेसरी योग
प्रतिपदा तिथि के दिन देवगुरु बृहस्पति और चंद्रमा के केंद्र संबंध से दुर्लभ गजकेसरी योग (gajkesari yog shardiya navratri) आकार ले रहा है। ज्योतिषीय गणना बताती है कि वार, नक्षत्र और इन दो शुभ ग्रहों का ऐसा विशेष तालमेल करीब 58 साल बाद बना है।
शास्त्रों में गजकेसरी योग को मान-सम्मान, उच्च ज्ञान, आर्थिक उन्नति और सही निर्णय शक्ति का कारक माना जाता है। इस योग में देवी दुर्गा की साधना करने से साधकों को मानसिक शांति मिलती है और अटके हुए कार्य गति पकड़ते हैं।
30 साल बाद शश राजयोग
इस बार नवरात्रि पर कर्म के कारक शनि देव अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में स्थित रहेंगे। इससे पंच महापुरुष योगों में गिना जाने वाला शक्तिशाली शश राजयोग (shash rajyog 2026) बन रहा है। पंचांग गणना के अनुसार करीब 30 साल बाद नवरात्रि के दौरान शनि की यह विशिष्ट स्थिति देखने को मिल रही है।
शश राजयोग अनुशासन, धैर्य, न्याय और कठिन परिश्रम से मिलने वाले फल को बल देता है। ज्योतिषविदों के मुताबिक इस अवधि में की गई साधना व्यक्ति के जीवन में स्थिरता लाती है और पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाने का आत्मबल प्रदान करती है।
गुरु और सूर्य का शुभ संबंध
नवरात्रि के दौरान देवगुरु बृहस्पति और ग्रहों के अधिपति सूर्य के मध्य शुभ भावों में परस्पर दृष्टि संबंध रहेगा। गुरु ज्ञान, धर्म और वृद्धि के प्रतिनिधि हैं, जबकि सूर्य देव आत्मविश्वास, प्रतिष्ठा और ओज का प्रतीक माने जाते हैं।
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इन दोनों बड़े ग्रहों का यह तालमेल धार्मिक अनुष्ठानों और जप-तप के लिए बेहद अनुकूल स्थिति बना रहा है। समाज में धर्म कार्यों के प्रति आस्था बढ़ेगी और विद्यार्थियों तथा साधकों को अपनी एकाग्रता का सीधा लाभ मिलेगा।
सर्वार्थ व अमृत सिद्धि योग
पूरे 9 दिनों के दौरान कई ऐसे मुहूर्त पड़ रहे हैं जो हर प्रकार के नए और मांगलिक कार्यों के लिए उत्तम हैं। ज्योतिष गणना के मुताबिक नवरात्रि में लगभग 4 से 5 दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सक्रिय रहेगा, जबकि 2 दिन अमृत सिद्धि योग (amrit siddhi yog dates) का प्रभाव देखने को मिलेगा।
सर्वार्थ सिद्धि योग में नया वाहन खरीदना, भूमि-भवन की रजिस्ट्री कराना या नए व्यापार की शुरुआत करना अत्यंत फलदायी माना गया है। वहीं अमृत सिद्धि योग सभी नकारात्मक प्रभावों को समाप्त कर की गई पूजा और प्रयासों को दीर्घकालिक सफलता दिलाता है। #ShardiyaNavratri2026 #NavratriDate













