Mercedes cars will become expensive from June 1 Prices will increase from 90,000 to 12 lakhs, know why this decision was taken: लक्जरी कार निर्माता मर्सिडीज-बेंज ने भारतीय ग्राहकों के लिए एक बड़ी घोषणा की है। कंपनी अपनी सभी कारों की कीमतों में 1.5% तक की बढ़ोतरी करने जा रही है, जो दो चरणों में लागू होगी – पहला 1 जून 2025 से और दूसरा 1 सितंबर 2025 से। इस बढ़ोतरी से मर्सिडीज की कारें 90,000 रुपये से लेकर 12.2 लाख रुपये तक महंगी हो जाएंगी। सी-क्लास से लेकर मेबैक एस-क्लास तक, हर मॉडल की कीमतें प्रभावित होंगी। आइए, इस फैसले के कारणों, प्रभावित मॉडल्स, और ग्राहकों पर इसके असर को विस्तार से समझते हैं।
Mercedes: दो चरणों में कीमत वृद्धि ग्राहकों को राहत
मर्सिडीज-बेंज ने कीमतों में बढ़ोतरी को दो चरणों में लागू करने का फैसला किया है, ताकि ग्राहकों पर एक साथ बड़ा वित्तीय बोझ न पड़े। पहली बढ़ोतरी 1 जून 2025 से शुरू होगी, जबकि दूसरी 1 सितंबर 2025 से लागू होगी। कंपनी के अनुसार, इस रणनीति का मकसद ग्राहकों को अपनी खरीदारी की योजना बनाने और बेहतर फाइनेंशियल प्लानिंग करने का समय देना है। कीमतों में वृद्धि 90,000 रुपये से लेकर 12.2 लाख रुपये तक होगी, जो मॉडल के आधार पर अलग-अलग होगी। सभी कीमतें एक्स-शोरूम हैं, यानी ऑन-रोड कीमतें और ज्यादा हो सकती हैं।
कौन सी कार, कितनी महंगी?
मर्सिडीज की एंट्री-लेवल सी-क्लास सबसे कम प्रभावित होगी, जिसमें 90,000 रुपये की बढ़ोतरी होगी। अब इसकी शुरुआती कीमत 60.3 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) होगी। दूसरी ओर, कंपनी की फ्लैगशिप मर्सिडीज-मेबैक एस-क्लास की कीमत में सबसे ज्यादा 12.2 लाख रुपये की वृद्धि होगी, जिसके बाद इसकी कीमत 3.60 करोड़ रुपये (एक्स-शोरूम) हो जाएगी। अन्य मॉडल्स, जैसे GLC, GLS, और EQS, की कीमतों में भी अलग-अलग वृद्धि होगी। मर्सिडीज का कहना है कि वह बढ़ती लागत का केवल एक छोटा हिस्सा ही ग्राहकों पर डाल रही है, ताकि ब्रांड की प्रीमियम छवि और गुणवत्ता बरकरार रहे।
कीमत वृद्धि के पीछे क्या कारण?
मर्सिडीज-बेंज ने कीमत बढ़ाने के पीछे कई कारण गिनाए हैं। कंपनी का कहना है कि पिछले कुछ समय से ऑपरेटिंग खर्चों, खासकर विदेशी मुद्रा दरों में वृद्धि के कारण लागत बढ़ी है। जनवरी 2025 से विदेशी मुद्रा की दरों में आए उछाल ने आयातित घटकों और पूरी तरह आयातित मॉडल्स, जैसे मेबैक और EQS, की लागत को बुरी तरह प्रभावित किया है। इसके अलावा, लॉजिस्टिक्स और उत्पादन लागत में भी बढ़ोतरी हुई है। मर्सिडीज ने अब तक इन लागतों को अपने स्तर पर झेला था, लेकिन व्यवसाय को स्थिर रखने और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कीमत वृद्धि जरूरी हो गई।
दो चरणों का फायदा: EMI पर कम असर
मर्सिडीज ने दो चरणों में कीमत बढ़ाने की रणनीति को ग्राहक-केंद्रित बताया है। कंपनी का कहना है कि इससे खरीदारों को अपनी खरीदारी की योजना बनाने का समय मिलेगा। उदाहरण के लिए, GLC और GLC SUV जैसे लोकप्रिय मॉडल्स की EMI में होने वाला अंतर 2,000 रुपये से कम रहेगा। इसका मतलब है कि मासिक खर्च पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ेगा। मर्सिडीज ने यह भी सलाह दी है कि ग्राहक 1 जून से पहले अपनी कार बुक कर लें, ताकि पहली वृद्धि से पहले बेहतर डील मिल सके।
ग्राहकों के लिए सलाह
अगर आप मर्सिडीज कार खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो जल्दी फैसला लेना फायदेमंद हो सकता है। 1 जून से पहले बुकिंग करने पर आप पहली कीमत वृद्धि से बच सकते हैं। डीलरशिप्स से संपर्क करें और फाइनेंसिंग विकल्पों, जैसे कम EMI और लोन ऑफर्स, की जानकारी लें। मर्सिडीज की वेबसाइट पर भी लेटेस्ट डील्स और मॉडल्स की जानकारी उपलब्ध है। साथ ही, आयातित मॉडल्स की डिलीवरी में समय लग सकता है, इसलिए पहले से प्लानिंग करें।
Mercedes लक्जरी और स्थिरता
मर्सिडीज-बेंज का यह फैसला भारतीय लक्जरी कार बाजार में उसकी मजबूत स्थिति को दर्शाता है। कंपनी का कहना है कि वह ग्राहकों को प्रीमियम अनुभव और बेहतरीन तकनीक देना जारी रखेगी। कीमत वृद्धि के बावजूद मर्सिडीज के मॉडल्स अपनी गुणवत्ता, डिजाइन, और टेक्नोलॉजी के लिए पसंद किए जाते हैं। अगर आप लक्जरी कार के शौकीन हैं, तो मर्सिडीज के इस कदम को समझें और अपनी खरीदारी की योजना बनाएं।













