चंडीगढ़, 22 मई (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। Highway Driving Tips: उत्तर भारत समेत पूरे देश में इन दिनों सूरज की तपिश ने गाड़ियों का इम्तिहान लेना शुरू कर दिया है। गर्मियों के इस मौसम में लोग अक्सर गाड़ी के इंजन और एसी (AC) की सर्विसिंग पर तो पूरा ध्यान देते हैं, लेकिन टायरों को नजरअंदाज कर देते हैं। दिल्ली-NCR और हरियाणा के एक्सप्रेसवे पर गर्मियों के दौरान टायर फटने से होने वाले हादसों के आंकड़े डराने वाले हैं। तेज धूप और गर्म डामर की सड़कों के संपर्क में आने से टायर के अंदर की हवा का दबाव तेजी से बदलने लगता है। ऐसे में अगर टायर का प्रेशर सही न हो, तो पंचर होने से लेकर सीधा टायर ब्लास्ट होने और गाड़ी के अनियंत्रित होने का खतरा पैदा हो जाता है।
जरूरत से ज्यादा हवा भरना है सबसे बड़ा टाइम बम
वाहन मालिकों द्वारा की जाने वाली सबसे बड़ी और आम गलती है टायर में क्षमता से अधिक हवा भरवा लेना। कई ड्राइवरों के बीच यह गलत धारणा है कि टायर कड़ा रखने से गाड़ी का माइलेज यानी फ्यूल एफिशिएंसी बेहतर मिलेगी। लेकिन गर्मियों के दिनों में यह आदत एक चलते-फिरते टाइम बम की तरह काम करती है। जब गाड़ी तेज रफ्तार में हाइवे पर दौड़ती है, तो घर्षण और बाहरी तापमान के कारण टायर के अंदर की हवा फैलने लगती है। यदि टायर में पहले से ही हवा ज्यादा होगी, तो बढ़े हुए दबाव के कारण टायर उसे झेल नहीं पाएगा और चलते-चलते फट जाएगा।
कम हवा भी है उतनी ही खतरनाक
दूसरी तरफ, टायर में हवा का दबाव कम रखना भी उतना ही नुकसानदायक है। जब टायर में हवा कम होती है, तो सड़क के साथ उसका कॉन्टैक्ट एरिया (सड़क को छूने वाला हिस्सा) काफी बढ़ जाता है। इसकी वजह से टायर और सड़क के बीच फ्रिक्शन (घर्षण) ज्यादा होने लगता है, जिससे टायर बहुत तेजी से ओवरहीट हो जाता है। लगातार कम प्रेशर में गाड़ी चलाने से टायर के किनारे (Sidewalls) कमजोर होकर क्रैक होने लगते हैं और इंजन पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे आपकी गाड़ी का तेल ज्यादा फुकने लगता है। हमेशा अंदाजे के बजाय कंपनी द्वारा तय किए गए पीएसआई (PSI) मानक के अनुसार ही हवा मेंटेन रखनी चाहिए।
स्पेयर टायर की अनदेखी से रिस्क
अक्सर लोग सफर पर निकलने से पहले केवल चालू चार टायरों की हवा चेक करवाते हैं और डिग्गी में रखे स्पेयर टायर (स्टेपनी) को भूल जाते हैं। आपातकालीन स्थिति में हवा रहित या खराब स्पेयर टायर आपको बीच रास्ते में बड़ी मुसीबत में डाल सकता है। इसके अलावा, गर्मियों में बिना रुके लगातार कई घंटों तक ड्राइविंग करने से टायरों को ठंडा होने का मौका नहीं मिलता। लंबे सफर के दौरान हर दो-तीन घंटे में छोटा ब्रेक लेना बेहद जरूरी है। इससे टायर्स और ब्रेकिंग सिस्टम दोनों को कूल डाउन होने का समय मिलता है और रबर की ग्रिप मजबूत बनी रहती है।
नाइट्रोजन गैस का इस्तेमाल
विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मियों के महीनों में सामान्य हवा की तुलना में टायरों में नाइट्रोजन गैस डलवाना एक बेहद स्मार्ट और सुरक्षित विकल्प है। नाइट्रोजन गैस का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह तापमान के उतार-चढ़ाव से जल्दी प्रभावित नहीं होती, जिससे टायर के अंदर का प्रेशर लंबे समय तक स्थिर रहता है और ओवरहीटिंग का खतरा न्यूनतम हो जाता है। इसके साथ ही, यदि आपकी गाड़ी के टायर पुराने हो चुके हैं, उनकी थ्रेड (गोटियां) घिस चुकी हैं या रबर में बारीक क्रैक्स दिखाई दे रहे हैं, तो उन्हें तुरंत बदलवा लें। सुरक्षित सफर के लिए हर हफ्ते ठंडे टायरों का प्रेशर चेक करना ही सबसे बड़ा बचाव है।
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