Amazing feat of Haryana Tushar Dahiya: Became Deputy Mayor in Britain at the age of 22: हरियाणा के छोटे से गांव रोहणा से निकलकर 22 वर्षीय तुषार दहिया ने वह कर दिखाया, जो लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा (inspiring story) बन गया है।
ब्रिटेन के एल्स्ट्री और बोरेहामवुड टाउन काउंसिल ने 21 मई 2025 को उन्हें डिप्टी मेयर (deputy mayor) नियुक्त किया, जिसके साथ ही वे ब्रिटेन में भारतीय मूल के सबसे कम उम्र के डिप्टी मेयर बन गए। तुषार की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार और गांव के लिए, बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का क्षण है। उनकी कहानी मेहनत, लगन और सामाजिक सेवा की ऐसी मिसाल है, जो युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें हासिल करने के लिए प्रेरित करती है।
तुषार दहिया का शानदार सफर Haryana Tushar Dahiya
तुषार दहिया ने किंग्स कॉलेज लंदन से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की है। पढ़ाई के साथ-साथ वे सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहे।
तुषार ने ब्रिटेन के डिपार्टमेंट फॉर वर्क एंड पेंशन्स में पॉलिसी एडवाइजर के रूप में काम किया, जहां उन्होंने सामाजिक सुरक्षा, रोजगार और पेंशन नीतियों (policy advisor) पर महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी यह मेहनत और समर्पण ही उन्हें इतनी कम उम्र में डिप्टी मेयर (deputy mayor) के पद तक ले गई। तुषार का मानना है कि राजनीति सत्ता का खेल नहीं, बल्कि समाज में बदलाव लाने और सेवा करने का माध्यम है।
भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने की कोशिश
तुषार का योगदान केवल प्रशासनिक और राजनीतिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। वे हिंदी शिक्षा परिषद यूके में स्वयंसेवक के रूप में सक्रिय हैं, जहां वे ब्रिटिश-भारतीय बच्चों को मुफ्त में हिंदी सिखाते हैं।
इसके अलावा, वे स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और दिवाली जैसे भारतीय पर्वों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम (cultural events) आयोजित कर भारतीय विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम करते हैं। तुषार की यह पहल न केवल भारतीय संस्कृति को जीवित रखती है, बल्कि प्रवासी भारतीय समुदाय (Indian diaspora) को एकजुट करने में भी मदद करती है।
परिवार की प्रेरणा और मां की विरासत
तुषार की सफलता में उनके परिवार की भूमिका अहम रही है। उनकी मां परवीना दहिया भी पहले एल्स्ट्री और बोरेहामवुड में डिप्टी मेयर रह चुकी हैं।
उस दौरान तुषार सबसे कम उम्र के अनुरक्षक (escort) चुने गए थे। मां की विरासत को आगे बढ़ाते हुए तुषार ने न केवल डिप्टी मेयर का पद हासिल किया, बल्कि एक नया इतिहास भी रचा। यह मां-बेटे की जोड़ी भारतीय समुदाय के लिए एक मिसाल बन गई है, जो दिखाती है कि मेहनत और लगन से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।
तुषार की सामाजिक सेवा और नेतृत्व
तुषार ने पहले टाउन काउंसिल में अनुरक्षक (escort) के रूप में काम किया, जहां उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों, स्कूली बच्चों और प्रवासी समुदायों के साथ मजबूत संवाद स्थापित किया।
उनकी मिलनसार और जिम्मेदार छवि ने उन्हें स्थानीय लोगों का चहेता बना दिया। स्थानीय मीडिया ने उनकी नियुक्ति को ब्रिटेन की विविधता और समावेशिता (diversity and inclusion) का प्रतीक बताया। तुषार का कहना है कि उनकी भूमिका युवाओं को राजनीति में आने के लिए प्रेरित करेगी। वे चाहते हैं कि भारतीय मूल के युवा नेतृत्व की बागडोर संभालें और समाज में बदलाव लाएं।
भविष्य की योजनाएं और प्रेरणादायक संदेश
तुषार का सपना केवल डिप्टी मेयर तक सीमित नहीं है। वे निकट भविष्य में ब्रिटेन की मुख्यधारा की राजनीति में और सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं।
उनका लक्ष्य है कि भारतीय मूल के युवाओं को नेतृत्व के अधिक अवसर मिलें। तुषार का मानना है कि शिक्षा, नीति और संस्कृति (culture) समाज के तीन मजबूत स्तंभ हैं, जिनके आधार पर एक टिकाऊ और न्यायपूर्ण समाज बनाया जा सकता है। उनकी यह सोच और कार्यशैली उन्हें एक दूरदर्शी नेता बनाती है।
समाज के लिए प्रेरणा
तुषार दहिया की कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा (inspiring story) है, जो छोटे शहरों या गांवों से आकर बड़े मंच पर अपनी पहचान बनाना चाहता है।
रोहणा जैसे छोटे से गांव से निकलकर ब्रिटेन जैसे देश में डिप्टी मेयर (deputy mayor) बनना कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। तुषार ने अपनी मेहनत और समर्पण से यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी सपना असंभव नहीं है।
तुषार का संदेश: सेवा है सबसे बड़ा सौभाग्य
डिप्टी मेयर बनने के बाद तुषार ने कहा, “22 साल की उम्र में इस पद पर पहुंचना मेरे लिए गर्व की बात है। यह समुदाय की सेवा करने का एक अनमोल अवसर है।
मेरे परिवार, दोस्तों और समर्थकों का आभार, जिन्होंने मुझे इस मुकाम तक पहुंचाया।” तुषार का यह संदेश युवाओं को प्रेरित करता है कि वे समाज की सेवा को अपने जीवन का लक्ष्य बनाएं।
तुषार दहिया की यह उपलब्धि न केवल हरियाणा के लिए, बल्कि पूरे भारतीय समुदाय के लिए गर्व का विषय है। उनकी कहानी हमें सिखाती है कि मेहनत, शिक्षा और सकारात्मक सोच के साथ कोई भी अपने सपनों को हकीकत में बदल सकता है।











