चंडीगढ़, 13 मई (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 विवादों के घेरे में है। पेपर लीक की पुष्टि होने के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने परीक्षा रद्द कर इसे दोबारा आयोजित करने का साहसिक लेकिन चुनौतीपूर्ण निर्णय लिया है। इस फैसले से लगभग 22 लाख छात्र प्रभावित हुए हैं, जो पिछले दो साल से अपनी मेहनत को सफल होते देख रहे थे। अब पूरा मामला सीबीआई (CBI) के पास है, जो इस लीक के पीछे के ‘मास्टरमाइंड’ की तलाश कर रही है।
NTA महानिदेशक का सख्त रुख
NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि संस्थान की साख और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि चाहे संस्थान के भीतर का कोई कर्मचारी हो या बाहर का कोई सिंडिकेट, सीबीआई जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे कड़ी सजा दिलाई जाएगी। इस कड़े रुख का उद्देश्य भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकना और परीक्षाओं की शुचिता बहाल करना है।
30 दिन की रीस्टार्ट स्ट्रैटेजी, एक्सपर्ट्स का सुझाव
परीक्षा रद्द होने से पैदा हुए तनाव को कम करने के लिए कोचिंग विशेषज्ञों ने ’30-डे रीस्टार्ट स्ट्रैटेजी’ का सुझाव दिया है। छात्रों को सलाह दी गई है कि वे नए टॉपिक्स शुरू करने के बजाय अपने पुराने नोट्स और NCERT पर पकड़ मजबूत करें। रोजाना फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के कम से कम 150 मल्टीपल चॉइस क्वेश्चंस (MCQs) हल करना उनकी गति और सटीकता को बनाए रखेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि मॉक टेस्ट को दोबारा हल करना आत्मविश्वास बढ़ाने का सबसे कारगर तरीका है।
छात्रों के लिए राहत
छात्रों के मानसिक और वित्तीय बोझ को कम करने के लिए NTA ने बड़ी राहत दी है। री-एग्जाम के लिए छात्रों को किसी भी प्रकार की अतिरिक्त फीस नहीं देनी होगी और न ही दोबारा रजिस्ट्रेशन की लंबी प्रक्रिया से गुजरना होगा। 3 मई 2026 को हुई परीक्षा का डेटा ही अगले एग्जाम के लिए वैध माना जाएगा। इससे उन छात्रों को राहत मिलेगी जो पहले ही परीक्षा के दबाव और कानूनी पेचीदगियों से परेशान हैं।
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