दिल्ली, 13 मई (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। दिल्ली यूनिवर्सिटी के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित संस्थानों में शुमार सेंट स्टीफंस कॉलेज ने अपने 145 साल पुराने इतिहास की परंपरा को बदलते हुए एक नया अध्याय लिखा है। कॉलेज की सुप्रीम काउंसिल ने प्रोफेसर सुसान एलियास को संस्थान की 14वीं प्रिंसिपल नियुक्त किया है। यह पहली बार है जब 1881 में स्थापित इस कॉलेज की कमान किसी महिला शिक्षाविद् के हाथों में होगी। मंगलवार को जारी आधिकारिक नोटिस के अनुसार, प्रोफेसर सुसान 1 जून 2026 से अपना पदभार संभालेंगी। दिल्ली के बिशप और कॉलेज चेयरमैन Rt Revd डॉ. पॉल स्वरूप ने इस ऐतिहासिक नियुक्ति पर अपनी मुहर लगा दी है।
लंबी प्रशासनिक और कानूनी बाधाओं के बाद हुई नियुक्ति
सेंट स्टीफंस कॉलेज में प्रिंसिपल का पद काफी समय से प्रशासनिक जटिलताओं और कानूनी प्रक्रियाओं के कारण खाली चल रहा था। संस्थान के संचालन और भविष्य की शैक्षणिक रणनीतियों को देखते हुए सुप्रीम काउंसिल ने एक अनुभवी चेहरे पर भरोसा जताया है। प्रोफेसर सुसान एलियास की नियुक्ति न केवल लैंगिक समानता के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह कॉलेज के प्रशासनिक गतिरोध को खत्म करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है। कॉलेज प्रशासन को उम्मीद है कि उनके आने से कैंपस के शैक्षणिक माहौल में नई ऊर्जा का संचार होगा।
तीन दशकों का समृद्ध शैक्षणिक अनुभव
प्रोफेसर सुसान एलियास का करियर ग्राफ उनकी काबिलियत की गवाही देता है। उनके पास इंजीनियरिंग, रिसर्च और एडमिनिस्ट्रेशन में 30 साल से ज्यादा का अनुभव है। हाल ही में उन्होंने जनवरी से मई 2026 तक चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी (उत्तर प्रदेश) में प्रो-वाइस चांसलर (रिसर्च) के तौर पर अपनी सेवाएं दी हैं। इससे पहले वह हिंदुस्तान यूनिवर्सिटी में डायरेक्टर (रिसर्च) के पद पर तैनात थीं। उन्होंने दक्षिण भारत के विख्यात वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (VIT) में डीन और प्रोफेसर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहकर डेटा साइंस और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग के क्षेत्र में विशेष योगदान दिया है।
दिल्ली यूनिवर्सिटी के सबसे पुराने कॉलेज का नया सफर
1881 में मिशनरी प्रयासों से स्थापित सेंट स्टीफंस कॉलेज ने देश को कई दिग्गज राजनेता, नौकरशाह और लेखक दिए हैं। 145 सालों से पुरुष प्रधान नेतृत्व वाले इस संस्थान में सुसान एलियास की एंट्री को छात्र और शिक्षा जगत एक प्रगतिशील बदलाव के रूप में देख रहे हैं। दक्षिण भारत के इंजीनियरिंग संस्थानों से लेकर उत्तर भारत की यूनिवर्सिटीज तक उनके व्यापक अनुभव का लाभ अब दिल्ली के छात्रों को मिलेगा। 1 जून से शुरू होने वाला उनका कार्यकाल स्टीफंस के गौरवशाली इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।
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