डिजिटल डेस्क, अंबाला: अंबाला में 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की मांग को लेकर बैंक कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। यूएफबीयू के नेताओं ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि 12वां द्विपक्षीय समझौता जल्द लागू नहीं हुआ तो आंदोलन तेज होगा।
मंगलवार को बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहीं। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स यानी यूएफबीयू के आह्वान पर देशभर के साथ अंबाला में भी बैंक कर्मचारियों ने अपनी आवाज बुलंद की।
मुख्य तौर पर 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की मांग को लेकर कर्मचारियों ने एक दिन की सांकेतिक हड़ताल की। अंबाला शहर के मॉडल टाउन स्थित पंजाब नेशनल बैंक की शाखा के बाहर भारी संख्या में बैंक कर्मियों ने प्रदर्शन किया और सरकार की टालमटोल वाली नीति के खिलाफ रोष जताया।
दो साल से फाइल में अटकी है मांग
बैंक कर्मचारियों का गुस्सा बेवजह नहीं है। दरअसल इंडियन बैंक्स एसोसिएशन यानी आईबीए और यूनियनों के बीच हुए 12वें द्विपक्षीय समझौते में 5 डे बैंकिंग पर सहमति बन चुकी है। इसके बावजूद यह प्रस्ताव पिछले दो वर्षों से केंद्र सरकार की मंजूरी के इंतजार में लटका हुआ है।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अंबाला यूएफबीयू के नेताओं ने बताया कि जब समझौता हो चुका है तो सरकार इसे लागू करने में देरी क्यों कर रही है। उनका कहना है कि हर शनिवार को छुट्टी होने से कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और उनका मानसिक तनाव कम होगा।
अंबाला में दिखा एकजुटता का असर
मॉडल टाउन में हुए इस प्रदर्शन में सार्वजनिक क्षेत्र के लगभग सभी बैंकों के अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए विकास मल्होत्रा, अमी चंद, ललित बगन, विशाल कुमार और उदित जैन ने सरकार के रवैया पर सवाल उठाए।
वक्ताओं ने साफ कहा कि बैंकिंग सेक्टर में काम का दबाव दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। ऐसे में कार्य और निजी जीवन में संतुलन बनाने के लिए सप्ताह में दो दिन का अवकाश बेहद जरूरी है।
सिर्फ छुट्टी नहीं ये मुद्दे भी अहम
इस हड़ताल का मकसद केवल शनिवार की छुट्टी मांगना नहीं था बल्कि कर्मचारियों ने बैंकिंग ढांचे को सुधारने के लिए अन्य महत्वपूर्ण मांगें भी रखी हैं।
नई भर्तियां: बैंकों में स्टाफ की भारी कमी है जिससे ग्राहकों को लंबी लाइनों में लगना पड़ता है। यूनियन ने मांग की है कि खाली पड़े पदों पर तुरंत नई भर्तियां की जाएं।
आउटसोर्सिंग का विरोध: स्थायी नौकरियों की जगह आउटसोर्सिंग के जरिए काम कराने की नीति का कर्मचारियों ने कड़ा विरोध किया है।
सरकार को दी खुली चेतावनी
प्रदर्शनकारी नेताओं ने सरकार को स्पष्ट शब्दों में संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने जल्द ही 12वें द्विपक्षीय समझौते की शर्तों को मानते हुए 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह को लागू नहीं किया तो यह आंदोलन और उग्र होगा। आने वाले समय में अनिश्चितकालीन हड़ताल जैसा बड़ा कदम भी उठाया जा सकता है जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। फिलहाल यह प्रदर्शन पूरी तरह से शांतिपूर्ण और अनुशासित रहा।
वक्ताओं ने बताया कि यह मांग बारहवें द्विपक्षीय समझौते में पहले ही शामिल की जा चुकी है. भारतीय बैंक संघ के साथ यह सहमति बनी थी, लेकिन पिछले करीब दो वर्षों से यह प्रस्ताव सरकार की मंजूरी के स्तर पर अटका हुआ है। यूनियन नेताओं का कहना है कि इस देरी से कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है और भरोसा कमजोर हो रहा है।












