Ambala Shaheed Smarak: A grand tribute of Rs 550 crore to the real beginning of the 1857 revolution: (अंबाला शहीद स्मारक) हरियाणा के अंबाला में 22 एकड़ भूमि पर बन रहा है, जिसकी लागत ₹550 करोड़ है। यह स्मारक उस ऐतिहासिक सच्चाई को उजागर करेगा, जिसे दशकों तक दबाया गया—कि (1857 की क्रांति अंबाला) से शुरू हुई थी, न कि मेरठ से।
इतिहासकारों की टीम ने प्रमाण जुटाए हैं कि 10 मई 1857 को मेरठ से 9 घंटे पहले अंबाला में बगावत शुरू हो चुकी थी। अंग्रेजों के घरों और दफ्तरों को जलाने की घटनाएं 26 मार्च से ही शुरू हो गई थीं। यह स्मारक उन शहीदों को समर्पित होगा जिन्होंने कांग्रेस के जन्म से 28 साल पहले ही आजादी की लड़ाई छेड़ दी थी।
स्मारक में क्या-क्या होगा खास? Ambala Shaheed Smarak
इस भव्य स्मारक में (डिजिटल म्यूजियम अंबाला) बनाया जा रहा है, जिसमें 1857 के संघर्ष को जीवंत रूप में दर्शाया जाएगा। एक ओपन एयर लाइट एंड साउंड थिएटर होगा जिसमें 2500 लोग बैठ सकेंगे। इसके अलावा, एक 15 मीटर ऊंचा कमल के आकार का टावर भी बनाया जा रहा है, जो रात में स्क्रीन में बदल जाएगा।
यह स्मारक न केवल ऐतिहासिक तथ्यों को सामने लाएगा, बल्कि युवाओं को प्रेरणा देने का काम करेगा। मंगल पांडे, रानी लक्ष्मीबाई और अन्य क्रांतिकारियों की कहानियां यहां डिजिटल माध्यम से प्रस्तुत की जाएंगी।
अनिल विज की पहल और इतिहास का पुनर्लेखन
हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने इस परियोजना को दिशा देने के लिए 5 इतिहासकारों की टीम गठित की। उन्होंने हर तथ्य की पुष्टि कर इस स्मारक को ऐतिहासिक रूप देने में अहम भूमिका निभाई। उनका कहना है कि देश की आजादी की लड़ाई कांग्रेस के जन्म से पहले ही शुरू हो चुकी थी, लेकिन इसे लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया।
(अंबाला शहीद स्मारक) अब लगभग 85% तैयार हो चुका है और जल्द ही जनता को समर्पित किया जाएगा। यह स्मारक न केवल अंबाला की पहचान बनेगा, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम की सच्ची शुरुआत को भी उजागर करेगा।







