पंजाब में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम मनरेगा को लेकर सियासत तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने आम आदमी पार्टी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पिछले तीन वर्षों में ग्रामीण मजदूरों को न तो पूरा रोजगार मिला और न ही कानून के अनुसार बेरोजगारी भत्ता दिया गया।
बठिंडा में आयोजित एक प्रेस वार्ता में भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के उपाध्यक्ष परमजीत सिंह कैंथ ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार से मनरेगा के क्रियान्वयन पर सार्वजनिक जवाब देने की मांग की।
सरकार की जिम्मेदारी और कानून का प्रावधान
मनरेगा कानून के तहत हर पंजीकृत ग्रामीण परिवार को साल में 100 दिनों का रोजगार देने की कानूनी गारंटी है। यदि मजदूर को काम मांगने के 15 दिनों के भीतर रोजगार नहीं मिलता, तो राज्य सरकार को बेरोजगारी भत्ता देना अनिवार्य होता है।
भाजपा नेताओं का आरोप है कि पंजाब में यह प्रावधान कागजों तक सीमित रह गया है। उनके अनुसार हजारों मजदूरों ने काम मांगा, लेकिन न तो उन्हें समय पर रोजगार मिला और न ही भत्ता।
भ्रष्टाचार और सोशल ऑडिट पर उठे सवाल
भाजपा ने मनरेगा में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। पार्टी का दावा है कि
कई पंचायतों में अनिवार्य सोशल ऑडिट नहीं कराया गया
फर्जी जॉब कार्ड और अधूरे कार्यों के भुगतान जैसे मामले सामने आए
अपात्र और मृत व्यक्तियों के नाम पर भुगतान की शिकायतें दर्ज हुईं
कैंथ ने कहा कि हजारों ग्राम पंचायतों में सोशल ऑडिट न होना ग्रामीण विकास योजनाओं की पारदर्शिता पर सीधा सवाल खड़ा करता है।
कार्रवाई रिपोर्ट और रिकवरी पर स्थिति स्पष्ट नहीं
भाजपा का कहना है कि विशेष ऑडिट इकाइयों द्वारा पकड़े गए हजारों भ्रष्टाचार मामलों पर सरकार ने अब तक कोई विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है। इसके साथ ही लोकपाल और ओम्बड्समैन द्वारा जारी किए गए करोड़ों रुपये की रिकवरी आदेश भी अब तक लागू नहीं किए गए।
प्रशासनिक विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी स्थिति में भरोसे की कमी बढ़ती है और योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पाता।
केंद्र बनाम राज्य के दावों पर विवाद
मनरेगा फंड को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच चल रहे आरोप प्रत्यारोप भी चर्चा में हैं। भाजपा ने राज्य सरकार के उस दावे पर आपत्ति जताई है जिसमें केंद्र पर बकाया राशि रोकने का आरोप लगाया गया था।
पार्टी नेताओं का कहना है कि संसदीय समिति की रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि नवीन वित्तीय वर्ष के लिए मजदूरी भुगतान लंबित नहीं है, लेकिन आंकड़ों को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
क्यों अहम है मनरेगा का मुद्दा
मनरेगा को दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजनाओं में गिना जाता है। यह न केवल ग्रामीण परिवारों को आय सुरक्षा देता है बल्कि
आर्थिक मंदी के समय मांग बनाए रखने में मदद करता है
महिलाओं और वंचित वर्गों की भागीदारी बढ़ाता है
पलायन को रोकने में सहायक होता है
आंकड़ों के अनुसार, योजना से जुड़े करोड़ों श्रमिकों में बड़ी संख्या महिलाओं और अनुसूचित जाति जनजाति समुदाय से आती है।
आगे क्या हो सकता है
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में मनरेगा को लेकर
विधानसभा में बहस
श्वेत पत्र की मांग
और निगरानी तंत्र को मजबूत करने के दबाव
जैसे कदम देखने को मिल सकते हैं। ग्रामीण मतदाताओं के लिहाज से यह मुद्दा आगामी चुनावी समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।












