Chandigarh 24×7 Water Supply (चंडीगढ़) : स्मार्ट सिटी मिशन के तहत पूरे शहर को 24×7 पेयजलापूर्ति मुहैया कराने की परियोजना, जिसे वर्ष 2019 में शुरू किया गया था, अब खारिज करने की प्रक्रिया में है। मनीमाजरा में इस परियोजना का पायलट प्रोजेक्ट एक वर्ष बाद भी सफल नहीं हो सका है।
इसकी असफलता और वित्तीय बोझ जैसे कई महत्वपूर्ण कारणों के चलते नगर निगम ने इसे पूरे शहर में लागू करने का निर्णय नहीं लिया है। निगम अधिकारियों ने इस प्रोजेक्ट की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) में मौजूद खामियों को भी उजागर किया है।
फ्रांस की एजेंसी को भी इन खामियों से अवगत कराया गया है, लेकिन एजेंसी की तरफ से भेजे गए जवाब से निगम अधिकारी संतुष्ट नहीं हैं। इसके परिणामस्वरूप, इसे खारिज करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
इस संबंध में मंगलवार को निगम सदन की बैठक में प्रस्ताव लाने की योजना थी, जो भाजपा पार्षदों के हस्ताक्षर के बाद तैयार किया गया था। भाजपा अध्यक्ष जितेंद्र पाल मल्होत्रा से चर्चा के बाद यह प्रस्ताव लाया जाना था, लेकिन किसी कारणवश इसे नहीं लाया गया। अब इसे कभी भी खारिज करने पर निर्णय लिया कर चुके हैं। उनकी शिकायतों के बाद मनीमाजरा पायलट प्रोजेक्ट की विजिलेंस जांच भी चल रही है।
गृह मंत्री अमित शाह ने 2024 में किया था उद्घाटन
चार अगस्त 2024 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा मनीमाजरा में उद्घाटन के बाद भी इस प्रोजेक्ट की समस्याएं समाप्त नहीं हो पाई हैं । एक वर्ष बाद भी किसी भी जोन में 24 x 7 प्रेशर से जलापूर्ति नहीं हो सकी है।
अधिकारियों का मानना है कि घरों तक पहुंचने वाले सकता है। भाजपा नेता पहले ही इस प्रोजेक्ट पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर इसे खारिज करने की मांग कर चुके हैं।
पानी की मात्रा में कोई वृद्धि नहीं हुई है। स्थानीय निवासियों ने गंदा और बदबूदार पानी आने की शिकायत की है, जो पीने और दैनिक उपयोग के लिए अनुपयुक्त है। इस पर भाजपा नेताओं और प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद परियोजना की विजिलेंस जांच शुरू की गई है।
मौजूदा सिस्टम सुधारा जाए
शहर के पार्षदों, राजनीतिक नेताओं और निवासियों का कहना है कि वे वर्तमान जलापूर्ति व्यवस्था से संतुष्ट हैं। उनकी मांग है कि नई परियोजना शुरू करने के बजाय मौजूदा सिस्टम में सुधार पर ध्यान दिया जाए। परियोजना की लागत 510 करोड़ है, जिसमें से 412 करोड़ फ्रांस की एजेंसी एजेंस फ्रांसेज डी डेवलपमेंट (एएफडी) से लिया गया लोन है, जिसे 15 वर्षों में चुकाना होगा।
निगम को हर साल लगभग 40 करोड़ चुकाने होंगे, जो केवल पानी के बिल बढ़ाकर ही संभव हैं । लागू होने पर पानी के टैरीफ लगभग दोगुने हो जाएंगे, जिससे उपभोक्ताओं पर बोझ पड़ेगा। अधिकारियों का कहना है कि 412 करोड़ का लोन वर्ष 2022 की पूंजी और संचालन लागत के आधार पर तय किया था। जब तक परियोजना पूरी होगी, महंगाई के चलते वास्तविक लागत लगभग दोगुनी हो सकती है।
इसलिए पीआर का कोई आधार नहीं रहेगा। डीपीआर ने वित्तीय दायित्वों को भी नजरअंदाज किया है। उदाहरण के लिए, यदि पूरे शहर में अंडरग्राउंड पाइपलाइन बदली जाती है, तो उससे जुड़ी टूटी सड़कों के पुनर्निर्माण की लागत सैकड़ों करोड़ तक पहुंच सकती है। इस भारी खर्च को कौन वहन करेगा, इसका उल्लेख रिपोर्ट में नहीं किया गया है।












