Chandigarh Mayor Election the next mayor election will not be held by secret voting, but by raising hands, approval of LR: अगला मेयर चुनाव सीक्रेट वोटिंग के बजाय हाथ खड़े करके होना लगभग तय है। इसके लिए डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन की तरफ से पंजाब एमसी एक्ट में अमेंडमेंट का प्रस्ताव बनाकर कानूनी राय के लिए एलआर के पास भेजा गया था, जहां से इसे मंजूरी मिल गई है।
अब चीफ सेक्रेटरी और फिर प्रशासक की मंजूरी बाकी है, जिसके बाद प्रस्ताव को नोटिफाई कर दिया जाएगा। हालांकि, इससे पहले इस पर लोगों से भी सुझाव लिए जाएंगे। प्रस्ताव को मंजूरी मिलना तय है क्योंकि प्रशासक गुलाब चंद कटारिया के निर्देशों पर ही फरवरी 2025 में इस प्रस्ताव पर काम शुरू हुआ था।
अगले एक-दो महीनों में औपचारिकताओं को पूरा करके इसे नोटिफाई किया जा सकता है। पिछले काफी समय से नगर निगम में मेयर के चुनाव के लिए हाथ उठाकर वोटिंग की मांग की जा रही थी। पिछले साल मेयर चुनाव में हुए विवाद के बाद इसकी मांग तेज हो गई थी।
क्या होगा इसका असर
• हर साल मेयर चुनाव से एक-दो महीने पहले ही सभी राजनीतिक दल अपना अपना समर्थन मजबूत करने में जुट जाते हैं। इसमें कई पार्षद दूसरे दल में चले जाते हैं तो कभी किसी में पिछले कुछ वर्षों में चंडीगढ़ में दल-बदल राजनीति बढ़ी है। नौबत यहां तक आ जाती है कि सभी राजनीतिक दलों को अपने- अपने पार्षदों को मेयर चुनाव से कुछ दिन पहले शहर से दूर दूसरे राज्यों में ले जाना पड़ता है।
वोटिंग में गड़बड़ी की गुंजाइश खत्म
वर्ष 2024 के मेयर चुनाव में पार्षदों के वोट में छेड़छाड़ की गई थी। उस वक्त प्रिसाइडिंग अफसर नॉमिनेटेड काउंसलर अनिल मसीह पर आम आदमी पार्टी कांग्रेस गठबंधन के उम्मीदवार कुलदीप कुमार को डाले गए 8 वोटों को रद्द करने के आरोप लगे। बाद में सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंचा और कैमरे की रिकॉर्डिंग से साफ हो गया कि मसीह ने बैलट पेपर में टैम्परिंग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप को विजेता घोषित किया था।
1996 से बैलट पेपर पर ही वोटिंग
1996 से चंडीगढ़ में नगर निगम मेयर चुनाव बैलट पेपर के जरिए ही होते रहे हैं। 2024 के मेयर चुनाव के दौरान हुआ विवाद पूरे देश में कई दिनों तक सुर्खियों में रहा था।












