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Chandigarh Orphans Education: चंडीगढ़ में अनाथ बच्चों को कॉलेज में सीटें तो मिलीं, फीस में क्या मिलेगी छूट?

On: June 23, 2025 4:22 PM
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Chandigarh Orphans Education: चंडीगढ़ में अनाथ बच्चों को कॉलेज में सीटें तो मिलीं, फीस में क्या मिलेगी छूट?
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Chandigarh Orphans Education College seats were secured, but will there be any fee concession: चंडीगढ़ अनाथ बच्चे शिक्षा (Chandigarh Orphan Education) के लिए एक नई उम्मीद जगी है, लेकिन यह आधी-अधूरी सी लगती है! चंडीगढ़ शिक्षा विभाग ने इस साल कॉलेजों में अनाथ बच्चों के लिए 2 सीटें आरक्षित (Reserved Seats) करने का ऐलान किया है। सुनने में यह बड़ा कदम लगता है, लेकिन असल सवाल यह है कि बिना फीस माफी या आर्थिक मदद के ये बच्चे पढ़ाई का बोझ कैसे उठाएंगे?

चंडीगढ़ के चाइल्ड केयर संस्थानों में रहने वाले करीब 150 बच्चों के भविष्य का सवाल दांव पर है। समाजसेवी और एनजीओ इस मुद्दे पर प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं। क्या चंडीगढ़ गोवा की तरह अनाथ बच्चों के लिए फीस माफी योजना (Fee Waiver Scheme) लाएगा? आइए, इस खबर की हर बारीकी को समझते हैं, जो हर संवेदनशील नागरिक को सोचने पर मजबूर कर देगी!

Chandigarh Orphans Education: अनाथ बच्चों के लिए सीटें

चंडीगढ़ के कॉलेजों में अनाथ बच्चों के लिए 2 सीटें आरक्षित (Reserved Seats) करना एक स्वागतयोग्य कदम है। लेकिन ज्वाइंट प्रोस्पेक्टस में फीस माफी या आर्थिक सहायता (Financial Aid) का जिक्र तक नहीं है। चंडीगढ़ के आशियाना और स्नेहालय जैसे चाइल्ड केयर संस्थानों में लगभग 150 बच्चे रहते हैं।

इनमें से कई 18 साल की उम्र के बाद आशा किरण, नारी निकेतन या सवेरा केंद्र में जाते हैं, जहां वे 21 साल तक रह सकते हैं। इसके बाद उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होना पड़ता है। ऐसे में, अगर शिक्षा विभाग फीस का इंतजाम नहीं करता, तो सीटें आरक्षित करने का क्या फायदा? एनजीओ के प्रेजिडेंट तनेजा ने कहा, “बिना आय के ये बच्चे कॉलेज फीस और किताबों का खर्च कैसे उठाएंगे?”

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गोवा मॉडल, चंडीगढ़ के लिए एक सबक

गोवा ने अनाथ बच्चों की शिक्षा (Orphan Education) के लिए एक मिसाल कायम की है। वहां की सरकार ने फीस माफी योजना (Fee Waiver Scheme) शुरू की, जिसमें ट्यूशन, हॉस्टल, खाना, ट्रांसपोर्ट और लाइब्रेरी जैसे सभी खर्च माफ हैं। यह योजना सामान्य और तकनीकी दोनों तरह की पढ़ाई के लिए लागू है।

चंडीगढ़ में ऐसी कोई स्पष्ट योजना नहीं है। यहां सामान्य छात्रों के लिए तो कई स्कॉलरशिप योजनाएं (Scholarship Schemes) हैं, लेकिन अनाथ बच्चों के लिए अलग से कोई नीति नहीं। कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि वे मौजूदा स्कॉलरशिप्स के तहत मदद की कोशिश करेंगे, लेकिन बिना स्पष्ट दिशा-निर्देश के यह कितना कारगर होगा, यह बड़ा सवाल है।

क्या बदलेगी नीति?

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चंडीगढ़ के अनाथ बच्चे शिक्षा (Chandigarh Orphan Education) के लिए सिर्फ सीटें नहीं, बल्कि आर्थिक मदद भी चाहते हैं। समाजसेवी और एनजीओ की मांग है कि गोवा मॉडल की तर्ज पर चंडीगढ़ में भी फीस माफी योजना (Fee Waiver Scheme) शुरू हो। शिक्षा विभाग से उम्मीद है कि वह जल्द इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण देगा या कोई राहत नीति बनाएगा।

अगर ऐसा हुआ, तो आशियाना और स्नेहालय जैसे संस्थानों के बच्चे न सिर्फ कॉलेज में दाखिला ले सकेंगे, बल्कि अपने सपनों को भी पूरा कर सकेंगे। यह कदम न केवल इन बच्चों का भविष्य संवारेगा, बल्कि चंडीगढ़ को एक संवेदनशील शहर के रूप में मिसाल बनाएगा।

5 हजार से 40 हजार तक का खर्च

चंडीगढ़ के सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों में फीस (College Fees) कोर्स के हिसाब से 5,000 से 40,000 रुपये प्रति सेमेस्टर तक है। इसके अलावा किताबें, स्टेशनरी, हॉस्टल और अन्य खर्च भी जोड़ लें, तो यह रकम अनाथ बच्चों के लिए आसमान छूती है। इन बच्चों के पास न तो परिवार है और न ही कोई आर्थिक सहारा।

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शिक्षा विभाग ने अभी तक फीस माफी या स्कॉलरशिप (Scholarship Schemes) को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। तनेजा ने सवाल उठाया, “जब इन बच्चों को 21 साल बाद खुद अपनी जिम्मेदारी उठानी पड़ती है, तो बिना मदद के वे कॉलेज कैसे जाएंगे?” यह सवाल चंडीगढ़ प्रशासन के लिए एक चुनौती है, जिसका जवाब जल्द चाहिए।

मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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