फरीदाबाद . हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने औद्योगिक नगरी फरीदाबाद को बड़ी सौगात दी है। औद्योगिक अपशिष्ट (Industrial Waste) के प्रबंधन को लेकर लंबे समय से चल रही समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने तीन नए साझा अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र (CETP) स्थापित करने का ऐलान किया है। इन परियोजनाओं का सीधा मकसद फरीदाबाद के तेजी से बढ़ते उद्योगों से निकलने वाले गंदे पानी का वैज्ञानिक तरीके से उपचार करना और पर्यावरण को नुकसान से बचाना है।
इन इलाकों में लगेंगे हाई-टेक शोधन संयंत्र
हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम (HSIIDC) ने इन तीनों प्लांट्स की विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार कर ली है। बादशाहपुर में 15 MLD क्षमता का प्लांट लगेगा, जो सेक्टर-27A से लेकर सेक्टर-45 तक के उद्योगों की गंदगी साफ करेगा। सबसे बड़ा प्लांट प्रतापगढ़ में 50 MLD क्षमता का होगा, जिससे सेक्टर-24, 25, 52A और सेक्टर-155 तक की औद्योगिक इकाइयों को कवर किया जाएगा। वहीं मिर्जापुर में 25 MLD का प्लांट सेक्टर-4, 5, 6, 71 और 74 के उद्योगों के लिए संजीवनी बनेगा।
चीफ सेक्रेटरी ने दी वित्तीय मॉडल को हरी झंडी
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में इन 927 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के वित्तीय ढांचे को अंतिम रूप दिया गया। तय योजना के मुताबिक, इस भारी-भरकम खर्च का 50 फीसदी हिस्सा नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग वहन करेगा। शेष 50 फीसदी राशि में से HSIIDC और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) 25-25 फीसदी का योगदान देंगे। इस साझा खर्च मॉडल से परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में तेजी आएगी।
आम जनता और पर्यावरण पर क्या होगा असर?
फरीदाबाद में बेतरतीब ढंग से बहने वाला औद्योगिक कचरा स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य और भूजल (Groundwater) के लिए बड़ा खतरा बना हुआ था। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने स्पष्ट किया कि ये CETP प्लांट न केवल जल प्रदूषण को रोकेंगे, बल्कि उद्योगों के सतत विकास का रास्ता भी साफ करेंगे। जब औद्योगिक पानी का वैज्ञानिक उपचार होगा, तो यमुना नदी में गिरने वाली गंदगी कम होगी और शहर के रिहायशी इलाकों में सीवरेज जाम की समस्या से भी राहत मिलेगी।
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