चंडीगढ़ . हरियाणा सरकार ने प्रदेश के श्रमिकों और मजदूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी नई योजना शुरू की है। इस योजना के तहत असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले पात्र मजदूरों को 60 साल की उम्र पूरी होने के बाद हर महीने 1000 रुपये पेंशन दी जाएगी। सरकार का कहना है कि इस पहल का मकसद ऐसे श्रमिकों को बुजुर्ग अवस्था में आर्थिक सहारा देना है, जिनकी आमदनी नियमित नहीं होती।
हरियाणा के औद्योगिक शहरों जैसे फरीदाबाद, गुरुग्राम, पानीपत और सोनीपत में बड़ी संख्या में मजदूर असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं। इन श्रमिकों को अक्सर नौकरी की स्थिरता नहीं मिलती और उम्र बढ़ने के बाद आय का कोई निश्चित साधन नहीं रहता। ऐसे में यह योजना उनके लिए एक सहारा बन सकती है।
असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सुरक्षा कवच
सरकार के मुताबिक यह योजना खासतौर पर उन मजदूरों को ध्यान में रखकर बनाई गई है जो असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं। इनमें निर्माण मजदूर, छोटे कारखानों में काम करने वाले श्रमिक, दिहाड़ी मजदूर और अन्य अस्थायी कामगार शामिल हैं।
जब इन श्रमिकों की उम्र 60 साल से अधिक हो जाती है तो काम करने की क्षमता कम होने लगती है। ऐसे समय में नियमित आय नहीं होने से परिवार पर आर्थिक दबाव बढ़ जाता है। इसी स्थिति को देखते हुए सरकार ने मासिक पेंशन की व्यवस्था की है।
योजना का लाभ लेने के लिए जरूरी शर्तें
योजना का लाभ लेने के लिए व्यक्ति का श्रमिक या मजदूर वर्ग से होना जरूरी है। आवेदन करने वाले की उम्र 18 से 60 साल के बीच होनी चाहिए और उसके पास श्रम कार्ड या संबंधित विभाग में पंजीकरण होना अनिवार्य है।
पेंशन का लाभ 60 साल की उम्र पूरी होने के बाद शुरू होगा। इसके बाद हर महीने निर्धारित राशि सीधे बैंक खाते में भेजी जाएगी।
रजिस्ट्रेशन के बाद सीधे खाते में पहुंचेगी राशि
इस योजना का लाभ लेने के लिए पहले श्रमिक को योजना में रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके बाद आधार कार्ड, श्रम कार्ड और बैंक खाते से जुड़े दस्तावेज जमा करने होंगे।
दस्तावेजों की जांच के बाद पात्र श्रमिकों को योजना में शामिल किया जाएगा। इसके बाद सरकार की ओर से 1000 रुपये की मासिक पेंशन सीधे बैंक खाते में भेजी जाएगी, जिससे मजदूरों को बुजुर्ग अवस्था में आर्थिक राहत मिल सकेगी।
मजदूर परिवारों के लिए क्यों अहम है योजना
प्रदेश में लाखों मजदूर ऐसे हैं जो रोजाना की मजदूरी पर निर्भर रहते हैं। उम्र बढ़ने के बाद काम मिलना मुश्किल हो जाता है और परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर पड़ने लगती है।
ऐसे में मासिक पेंशन की यह व्यवस्था बुजुर्ग मजदूरों के लिए न्यूनतम आय का सहारा बन सकती है। इससे दिहाड़ी मजदूरों और असंगठित क्षेत्र के कामगारों को सामाजिक सुरक्षा का आधार मिलेगा।
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