Haryana-Punjab water dispute High Court’s big decision, orders Punjab Police to stay away from dam operations: हरियाणा और पंजाब के बीच भाखड़ा नांगल डैम के पानी को लेकर चल रहा विवाद अब पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया और पंजाब सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए।
कोर्ट ने कहा कि पंजाब पुलिस को डैम के ऑपरेशन सिस्टम और वाटर रेगुलेशन कार्यालयों से दूर रहना होगा। साथ ही, 2 मई 2025 को केंद्रीय गृह सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक के आदेशों का पालन करना अनिवार्य होगा। यह फैसला दोनों राज्यों के बीच तनाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। आइए, इस मामले की पूरी कहानी समझते हैं।
Haryana-Punjab water dispute: हाईकोर्ट का सख्त फैसला
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने भाखड़ा नांगल डैम के संचालन में पंजाब पुलिस के हस्तक्षेप को गलत ठहराया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पंजाब सरकार डैम की सुरक्षा बढ़ाने के लिए पुलिस तैनात कर सकती है, लेकिन डैम के दैनिक संचालन या वाटर रेगुलेशन में दखल नहीं दे सकती।
चीफ जस्टिस शीलू नागू की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि अगर पंजाब सरकार को BBMB के आदेशों पर आपत्ति है, तो वह BBMB के चेयरमैन के माध्यम से केंद्र सरकार से बात कर सकती है। कोर्ट ने 2 मई की बैठक में तय किए गए फैसलों को लागू करने का आदेश दिया, जिसमें हरियाणा को 8500 क्यूसेक पानी की आपूर्ति शामिल है। यह फैसला पानी के बंटवारे में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया कदम है।
सुनवाई में कोर्ट की तीखी टिप्पणी
जल विवाद को लेकर हाईकोर्ट में लगातार दो दिन तक सुनवाई हुई। दूसरे दिन 45 मिनट की गहन बहस के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। चीफ जस्टिस शीलू नागू ने इसे आपात स्थिति करार देते हुए उसी दिन फैसला सुनाने की बात कही थी।
BBMB के वकील ने कोर्ट में तर्क दिया कि पंजाब पुलिस का डैम के संचालन पर कब्जा करना न केवल अवैध है, बल्कि यह हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली जैसे राज्यों के लिए पानी की आपूर्ति को बाधित कर रहा है। वकील ने यह भी बताया कि आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं की डैम पर मौजूदगी ने स्थिति को और जटिल बना दिया। कोर्ट ने इस स्थिति को “दुर्भाग्यपूर्ण” करार दिया और तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत पर जोर दिया।
जल विवाद और हाईकोर्ट में याचिकाएं
हरियाणा-पंजाब जल विवाद को लेकर हाईकोर्ट में अब तक तीन याचिकाएं दायर हो चुकी हैं। पहली याचिका एडवोकेट रविंदर ढुल ने दायर की, जिसमें पंजाब पुलिस को डैम से हटाने और हरियाणा को पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की गई।
दूसरी याचिका फतेहाबाद ग्राम पंचायत ने दायर की, जिसमें स्थानीय लोगों के लिए पीने और सिंचाई के पानी की मांग उठाई गई।
तीसरी याचिका BBMB ने दायर की, जिसमें पंजाब पुलिस द्वारा डैम के कंट्रोल यूनिट पर कब्जे का मुद्दा उठाया गया। याचिकाओं में जोर दिया गया कि भाखड़ा डैम से निकलने वाला पानी चार राज्यों पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के लिए जीवन रेखा है। BBMB ने हरियाणा को 8500 क्यूसेक पानी देने का फैसला किया था, जिसे पंजाब ने लागू करने से इनकार कर दिया।
पंजाब और हरियाणा की तीखी बयानबाजी
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विधानसभा के विशेष सत्र में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि हरियाणा को अब एक बूंद पानी भी नहीं दिया जाएगा। उन्होंने BBMB के फैसले को “असंवैधानिक” करार दिया और केंद्र सरकार पर पंजाब के हितों की अनदेखी का आरोप लगाया।
मान ने दावा किया कि हरियाणा पहले ही अपने कोटे से ज्यादा पानी ले चुका है। दूसरी ओर, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने पंजाब के इस कदम को “असंवैधानिक” और “संघीय ढांचे के खिलाफ” बताया। सैनी ने BBMB को केंद्र सरकार के अधीन एक स्वायत्त निकाय बताते हुए कहा कि पंजाब का रुख न केवल हरियाणा, बल्कि पूरे देश के लिए हानिकारक है। उन्होंने पंजाब से बिना शर्त पानी छोड़ने की मांग की।
जल संकट का प्रभाव
यह विवाद हरियाणा के लिए गंभीर जल संकट का कारण बन रहा है। सिरसा, फतेहाबाद, हिसार और महेंद्रगढ़ जैसे जिलों में पेयजल की राशनिंग शुरू हो गई है। किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा, जिससे उनकी फसलें खतरे में हैं।
दूसरी ओर, पंजाब का कहना है कि उसके कई जिले डार्क जोन में हैं, जहां भूजल स्तर 600 फीट से नीचे चला गया है। दोनों राज्यों की बयानबाजी और सख्त रुख ने इस मुद्दे को और जटिल बना दिया है। हाईकोर्ट का यह फैसला उम्मीद की किरण है, जो जल बंटवारे में संतुलन ला सकता है।












