Haryana’s Narendra created history, hoisted the tricolor on the peak of Mount Annapurna: हिसार, 30 अप्रैल 2025: हरियाणा के एक छोटे से गांव के नरेंद्र कुमार ने विश्व की सबसे खतरनाक चोटियों में से एक, माउंट अन्नपूर्णा को फतह कर इतिहास रच दिया।
8,091 मीटर ऊंची इस चोटी पर तिरंगा फहराकर नरेंद्र ने न केवल देश का गौरव बढ़ाया, बल्कि प्रदेश के पहले पर्वतारोही बनने का गौरव भी हासिल किया। उनकी इस साहसिक यात्रा की कहानी हर किसी को प्रेरित कर रही है। आइए, जानते हैं इस उपलब्धि की पूरी कहानी।
माउंट अन्नपूर्णा की चुनौती Mount Annapurna
नेपाल में हिमालय पर्वत श्रृंखला में स्थित माउंट अन्नपूर्णा की ऊंचाई 8,091 मीटर है। यह चोटी अपनी खतरनाक ढलानों और हर 1-2 घंटे में होने वाले हिमस्खलन के लिए कुख्यात है। कई अनुभवी पर्वतारोही भी इस चोटी को फतह करने से पहले सौ बार सोचते हैं।
लेकिन हिसार जिले के मिंगनी खेड़ा गांव के नरेंद्र कुमार ने इस चुनौती को स्वीकार किया और 12 दिनों की कठिन यात्रा के बाद 7 अप्रैल 2025 को सुबह 10:30 बजे तिरंगे को इस चोटी पर लहरा दिया। उनकी इस उपलब्धि ने साबित कर दिया कि हौसले के सामने कोई चोटी ऊंची नहीं होती।
साहस की शुरुआत
नरेंद्र ने इस अभियान की शुरुआत 25 मार्च 2025 को की थी। ठंड, हिमस्खलन का खतरा, और ऑक्सीजन की कमी जैसी तमाम मुश्किलों का सामना करते हुए उन्होंने अपने लक्ष्य को हासिल किया।
12 दिन की इस यात्रा में नरेंद्र ने न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक दृढ़ता का भी परिचय दिया। उनकी इस उपलब्धि ने हरियाणा के लोगों में गर्व की लहर दौड़ा दी है। नरेंद्र का अगला लक्ष्य विश्व की 14 सबसे ऊंची चोटियों पर तिरंगा फहराना है, और यह उपलब्धि उस दिशा में उनका पहला कदम है।
नेताओं और जनता की बधाई
नरेंद्र की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, खेल मंत्री गौरव गौतम सहित कई मंत्रियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बधाई दी। मुख्यमंत्री सैनी ने लिखा, “नरेंद्र ने हरियाणा का नाम विश्व पटल पर रोशन किया है। उनका साहस हम सभी के लिए प्रेरणा है।”
हिसार के स्थानीय निवासी रमेश कुमार ने कहा, “हमारे गांव का बेटा इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करेगा, यह सोचकर गर्व होता है। नरेंद्र ने युवाओं के लिए एक मिसाल कायम की है।”
एक प्रेरणादायक कहानी
नरेंद्र की कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को हकीकत में बदलना चाहते हैं। एक छोटे से गांव से निकलकर विश्व की सबसे खतरनाक चोटी को फतह करना आसान नहीं था।
नरेंद्र ने बताया, “यह यात्रा मेरे लिए सिर्फ एक चोटी फतह करने की नहीं, बल्कि अपने देश का गौरव बढ़ाने की थी।” उनकी इस उपलब्धि ने न केवल पर्वतारोहण के क्षेत्र में हरियाणा का नाम ऊंचा किया, बल्कि यह भी दिखाया कि सही दिशा और मेहनत से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।
भविष्य की योजनाएं
नरेंद्र का सपना विश्व की 14 सबसे ऊंची चोटियों पर तिरंगा फहराने का है। माउंट अन्नपूर्णा की जीत उनके इस मिशन का पहला पड़ाव है। वे कहते हैं, “हर चोटी एक नई चुनौती है, लेकिन मैं अपने देश के लिए और मेहनत करूंगा।” उनकी इस जिद और जुनून को देखकर लगता है कि वे जल्द ही और बड़े कीर्तिमान स्थापित करेंगे।
देशवासियों के लिए संदेश
नरेंद्र की इस उपलब्धि से हर भारतीय को गर्व महसूस करना चाहिए। अगर आप भी अपने क्षेत्र में कुछ बड़ा करना चाहते हैं, तो नरेंद्र की कहानी से प्रेरणा लें। हिम्मत, मेहनत, और सही दिशा आपको किसी भी मंजिल तक पहुंचा सकती है। हरियाणा का यह सपूत आज हर किसी के लिए एक मिसाल है।











