पानीपत. उत्तर भारत में बढ़ते कोहरे का असर अब रेलवे संचालन पर साफ दिखने लगा है। सुरक्षा कारणों से उत्तर रेलवे ने पानीपत और अंबाला के बीच चलने वाली दो महत्वपूर्ण पैसेंजर ट्रेनों को लगभग तीन महीनों के लिए अस्थायी रूप से रद्द कर दिया है। यह कदम हर साल सर्दियों में उठाया जाता है, लेकिन इस बार दिसंबर की शुरुआत में ही कोहरे ने स्थितियां चुनौतीपूर्ण बना दी हैं।
कौन सी ट्रेनें हुई बंद
1 दिसंबर से 28 फरवरी तक
पानीपत से अंबाला चलने वाली ट्रेन संख्या 64541
अंबाला से पानीपत आने वाली ट्रेन संख्या 64532
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, कम विजिबिलिटी के दौरान पायलटों और गार्डों के लिए सिग्नल पहचानना मुश्किल हो जाता है, जिससे दुर्घटना का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए पैसेंजर ट्रेनें, जो अक्सर कई छोटे स्टेशनों पर रुकती हैं, कोहरे के समय सबसे पहले प्रभावित होती हैं।
रोजाना यात्रा करने वालों के लिए बड़ी परेशानी
पानीपत, करनाल और अंबाला के बीच हजारों लोग रोजाना नौकरी, पढ़ाई और व्यापार के लिए सफर करते हैं। लोकल ट्रेनों के कैंसिल होने से इन यात्रियों को अब बसों या निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ेगा।
करनाल के एक ऑफिस कर्मचारी रजत बताते हैं कि लोकल ट्रेन कामकाज वालों के लिए सबसे किफायती और समय पर पहुंचाने वाला साधन है। कैंसिल होने से जेब पर भी असर पड़ेगा और समय भी ज्यादा लगेगा।
एक अन्य यात्री अंजली कहती हैं कि पहले ही कई ट्रेनें लेट आ रही हैं और अब लोकल ट्रेन बंद होने से रोजाना की दिनचर्या प्रभावित होगी।
कई एक्सप्रेस ट्रेनें भी घंटों लेट
कोहरे का असर सिर्फ पैसेंजर ट्रेनों तक सीमित नहीं है। सोमवार को करनाल और पानीपत रूट पर 30 से अधिक ट्रेनें अपने निर्धारित समय से काफी देरी से पहुंचीं।
आम्रपाली एक्सप्रेस लगभग साढ़े चार घंटे लेट
फाजिल्का इंटरसिटी करीब दो घंटे देर से
दिल्ली पानीपत एमईएमयू लगभग एक घंटा चालीस मिनट देरी से
शान ए पंजाब लगभग एक घंटे लेट
मालवा एक्सप्रेस डेढ़ घंटे की देरी के साथ
झेलम एक्सप्रेस सवा दो घंटे देर से
कुरुक्षेत्र दिल्ली लोकल डेढ़ घंटे की देरी के साथ
रेलवे सूत्रों के अनुसार, कई जगहों पर सिग्नल विजिबिलिटी दस से पंद्रह मीटर तक गिर गई है। ऐसे में ट्रेनों को सुरक्षित गति पर चलाना पड़ रहा है, जिससे कुल यात्रा समय बढ़ जाता है।
क्यों बढ़ती है सर्दियों में देरी
रेलवे सुरक्षा विशेषज्ञ बताते हैं कि कोहरे में इंजन चालक सिग्नल तभी देखते हैं जब वे बहुत नजदीक पहुंचते हैं। इस वजह से ट्रेनों को नियंत्रित गति पर चलाना आवश्यक होता है।
कोहरे के मौसम में
सिग्नल और ट्रैक की विजिबिलिटी कम होती है
ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने के लिए गति घटाई जाती है
तकनीकी सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है
राष्ट्रीय रेल परिवहन में विंटर डिले आम है, और उत्तर भारत का यह रूट इसकी सबसे अधिक मार झेलता है।
यात्रियों के लिए उपयोगी सलाह
यात्रा से पहले रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट पर ट्रेन स्टेटस अवश्य जांचें
139 हेल्पलाइन पर कॉल कर अपडेट लें
यदि संभव हो तो दिन में यात्रा की योजना बनाएं
बसों या कार पूलिंग का विकल्प रखें
स्टेशन अधीक्षक रमेश चंद्र के अनुसार, मौसम सामान्य होते ही ट्रेनों को फिर से समयानुसार चलाया जाएगा।











