हिसार, Railway Station Upgrade: हिसार रेलवे स्टेशन पर जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। रेलवे ने यहां डबल वॉशिंग लाइन और सिक लाइन बनाने के लिए 63.66 करोड़ रुपये की परियोजना शुरू की है। इसके लिए 44.41 करोड़ रुपये का टेंडर भी जारी हो चुका है। अगले दो महीनों में निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जल्द ही एक टीम हिसार का दौरा करेगी, जिसके बाद ठेकेदार काम शुरू करेगा।
नई सुविधाओं से बढ़ेगी हिसार की रेल कनेक्टिविटी
इस प्रोजेक्ट के तहत हिसार रेलवे स्टेशन पर दो पिट लाइन, चार स्टेब्लिंग लाइन, शंटिंग नेक, सिक लाइन और मार्शलिंग लाइन बनाई जाएंगी। नई वॉशिंग लाइन बनने से हिसार को और ज्यादा ट्रेनें मिलने की संभावना है। वहीं, सिक लाइन की सुविधा से डिब्बों की छोटी-मोटी मरम्मत आसानी से हो सकेगी। खराब डिब्बों को खड़ा करने की जगह भी मिलेगी। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि वॉशिंग लाइन ट्रेनों को रेस्ट देने के लिए जरूरी होती है। इसमें ट्रेन की सफाई और मरम्मत का काम होता है, जिसमें चार से छह घंटे लगते हैं। इसके बाद ट्रेन फिर से लंबे रूट पर दौड़ने के लिए तैयार हो जाती है।
इस नई सुविधा से हिसार से बीकानेर, हनुमानगढ़, दिल्ली, चंडीगढ़, यूपी, बिहार समेत एक दर्जन से ज्यादा पैसेंजर ट्रेनों का रास्ता खुलेगा। अभी तक स्टेशन पर जगह की कमी के कारण कई नई ट्रेनों के प्रस्ताव अटक जाते थे। हिसार रेलवे स्टेशन के पास सिर्फ एक वॉशिंग लाइन है, जिसके चलते ट्रेनों को खड़ा करने में दिक्कत होती थी।
ट्रेनों की सुरक्षा और संचालन होगा बेहतर
सिक लाइन के बनने से न सिर्फ यात्री डिब्बों बल्कि मालगाड़ी के डिब्बों की भी मरम्मत हो सकेगी। रेलवे स्टाफ हर डिब्बे की गहन जांच करेगा और उसे पूरी तरह दुरुस्त करने के बाद ही अगले स्टेशन के लिए रवाना करेगा। इस व्यवस्था का मकसद ट्रेनों की सुरक्षा और संचालन को और बेहतर करना है। इससे तकनीकी खराबियों को पहले ही पकड़ा जा सकेगा, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका कम होगी और रेल सेवाएं ज्यादा भरोसेमंद बनेंगी।
यात्रियों और व्यापारियों को मिलेगा सीधा फायदा
सिक लाइन बनने से हिसार के यात्रियों और व्यापारियों को बड़ा फायदा होगा। अब खराब डिब्बों को मरम्मत के लिए दूसरे स्टेशन की वर्कशॉप में नहीं भेजना पड़ेगा। इससे समय और संसाधनों की बचत होगी। सिक लाइन पर स्थानीय स्तर पर ही डिब्बों की मरम्मत हो सकेगी, जिससे कोच को ट्रेन से अलग करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह व्यवस्था ट्रेनों की समयबद्धता बनाए रखने में मदद करेगी और यात्रियों को देरी या असुविधा से राहत मिलेगी। साथ ही, मालवाहन भी ज्यादा प्रभावी होगा, जिससे व्यापारियों को फायदा होगा।













