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चंडीगढ़ में GMCH की 424 पदों पर भर्ती रुकी, कोविड नर्सों को क्यों नहीं मिली प्राथमिकता?

On: September 11, 2025 11:18 AM
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चंडीगढ़ में GMCH की 424 पदों पर भर्ती रुकी, कोविड नर्सों को क्यों नहीं मिली प्राथमिकता?
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चंडीगढ़, Nursing recruitment: चंडीगढ़ के जीएमसीएच-32 में 27 नर्सिंग अफसरों की नौकरी पर लटकी तलवार को फिलहाल कैट (सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल) ने रोक दिया है। इन नर्सों की कॉन्ट्रैक्ट सेवाएं 31 अगस्त को खत्म करने का आदेश था, लेकिन कैट ने इस पर स्टे लगा दिया। साथ ही, जीएमसीएच में नर्सिंग ऑफिसर के 424 खाली पदों पर भर्ती भी अगले आदेश तक ठप कर दी गई है। खास बात यह है कि जीएमसीएच ने कोविड-19 में ड्यूटी करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को प्राथमिकता देने वाले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के 3 मई 2021 के पत्र को नजरअंदाज किया, जिसके चलते यह विवाद खड़ा हुआ। कैट ने साफ कहा कि जब तक अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक ये पद रिक्त रहेंगे। अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी।

कोविड नर्सों को क्यों नहीं मिली प्राथमिकता?

कैट में आवेदकों ने बताया कि जीएमसीएच ने बार-बार कोविड में ड्यूटी करने वालों को प्राथमिकता देने से इनकार किया। 9 नवंबर 2021 को 162 नर्सिंग अफसरों की भर्ती के लिए नोटिस जारी हुआ, लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देशों को अनदेखा किया गया। फिर 29 जून 2022 को 8 स्टाफ नर्स के पदों के लिए नोटिस में कोविड ड्यूटी वालों को 10 अंक देने की बात कही गई। लेकिन 4 अप्रैल 2025 को तीसरे नोटिस में फिर कोविड नर्सों को प्राथमिकता नहीं दी गई। 7 अगस्त को जीएमसीएच ने आउटसोर्सिंग से नियुक्त नर्सों की सेवाएं 31 अगस्त से खत्म करने का आदेश दिया। इसके बाद 14 अगस्त को 93 नर्सिंग अफसरों को सीनियर नर्सिंग ऑफिसर कैडर में प्रमोट किया गया, जिससे रिक्तियों की संख्या बढ़कर 424 हो गई।

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जीएमसीएच का तर्क और कैट का जवाब

जीएमसीएच के वकील ने कैट में दलील दी कि आवेदकों को अंतरिम राहत देना अंतिम राहत के बराबर होगा। उनका कहना था कि ये नर्सें आउटसोर्सिंग एजेंसी के जरिए नियुक्त थीं, इसलिए जीएमसीएच और उनके बीच ‘मालिक-नौकर’ का रिश्ता नहीं है। लेकिन आवेदकों के वकील ब्रजेश मित्तल ने बताया कि कोविड के दौरान इन नर्सों को पहले आउटसोर्सिंग एजेंसी और बाद में स्वास्थ्य विभाग ने सीधे नियुक्त किया था। 16 मई 2022 से इन्हें फिर निजी एजेंसी के तहत रखा गया।

‘प्राकृतिक न्याय’ का सवाल

कैट की बेंच ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अस्थायी कर्मचारियों को बिना नोटिस या कारण के बर्खास्त करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को कमजोर करता है। यह प्रथा कर्मचारियों को हमेशा असुरक्षा में रखती है, चाहे उनकी सेवा की गुणवत्ता या अवधि कुछ भी हो। बेंच ने इसे शोषण का एक रूप बताया और कहा कि यह नियमित रोजगार देने की जिम्मेदारी से बचने की कोशिश है। इसलिए, अगले आदेश तक आउटसोर्स नर्सों की सेवाएं खत्म नहीं होंगी और जीएमसीएच में भर्ती पर भी रोक रहेगी।

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मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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