Repo Rate: Repo rate cut for the third time: Home loans will become cheaper, small borrowers will also get relief: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है। इस साल लगातार तीसरी बार रेपो रेट में 0.50% की कटौती की गई है, जिससे होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन जैसे कर्ज सस्ते होने की उम्मीद है।
इस फैसले से आम लोगों की मासिक किश्त (ईएमआई) में कमी आएगी, जिससे कर्ज का बोझ हल्का होगा। हालांकि, फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) पर ब्याज दरें कम होने से बचत करने वालों को कम रिटर्न मिल सकता है। यह कदम न केवल कर्जदारों को राहत देगा, बल्कि छोटे व्यवसायियों और उपभोक्ताओं को भी आर्थिक सहायता प्रदान करेगा।Repo Rate
रेपो रेट में कमी का मतलब है कि बैंक अब आरबीआई से कम ब्याज पर कर्ज ले सकेंगे, जिसका लाभ वे अपने ग्राहकों को सस्ते लोन के रूप में देंगे। उदाहरण के लिए, 20 साल के 20 लाख रुपये के होम लोन पर पहले जहां 16,728 रुपये की मासिक ईएमआई थी, अब वह घटकर 16,112 रुपये हो सकती है, जिससे प्रति माह 616 रुपये की बचत होगी। इसी तरह, 50 लाख के लोन पर 1,542 रुपये की मासिक बचत हो सकती है।
इसके अलावा, आरबीआई ने कैश रिजर्व रेशियो (सीआरआर) में 1% की कटौती की है, जिससे बैंकों के पास 2.5 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी उपलब्ध होगी। इससे बैंक अधिक लोन दे सकेंगे, जिससे बाजार में तरलता बढ़ेगी और आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी।
छोटे कर्जदारों के लिए भी राहत भरी खबर है। आरबीआई ने गोल्ड लोन के लिए लोन-टू-वैल्यू (एलटीवी) अनुपात को 75% से बढ़ाकर 85% कर दिया है। इसका मतलब है कि अब 1 लाख रुपये के सोने पर 85,000 रुपये तक का कर्ज मिल सकता है, जो पहले 75,000 रुपये था। यह बदलाव छोटे व्यवसायियों और जरूरतमंदों के लिए कर्ज लेना आसान बनाएगा।
हालांकि, रेपो रेट में कटौती से एफडी पर ब्याज दरें कम हो सकती हैं, जिससे बचत करने वालों को थोड़ा नुकसान हो सकता है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि यह कदम अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और उपभोक्ता खर्च को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है।













