Vaibhav Suryavanshi: टीम इंडिया की सीनियर टीम से बाहर होने के बावजूद पिछले कुछ महीनों में जिस खिलाड़ी ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी हैं, वह है वैभव सूर्यवंशी। उनकी तूफानी हिटिंग और सिर्फ 14 साल की उम्र ने उन्हें रातों-रात सेंटर ऑफ अट्रैक्शन बना दिया है।
जिन लोगों ने सचिन तेंदुलकर के शुरुआती दिनों का खेल देखा है, उन्हें वैभव का अंदाज उन्हीं की याद दिला रहा है। हालांकि दोनों के खेल का दौर और स्टाइल बिल्कुल अलग है, लेकिन कम उम्र में बड़ी उपलब्धियां दोनों को जोड़ रही हैं।
करीब 37 साल बाद भारतीय क्रिकेट में फिर वही सवाल पूछा जा रहा है “ये बच्चा कितनी दूर जाएगा?”
तेंदुलकर की याद दिला रहे Vaibhav Suryavanshi
टी20 क्रिकेट में वैभव सूर्यवंशी का रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन सभी को चौंका रहा है। 14 साल की उम्र में जहां बच्चे पढ़ाई और शौक में लगे रहते हैं, वहीं वैभव क्रिकेट के रिकॉर्ड फिर से लिख रहे हैं।
दोहा में राइजिंग स्टार्स एशिया कप में यूएई के खिलाफ इंडिया ए की ओर से उन्होंने 42 गेंदों पर 144 रन ठोक दिए। सिर्फ 32 गेंदों में 100, 11 चौके और 15 छक्के ये किसी भी उम्र के खिलाड़ी के लिए अविश्वसनीय है।
ये टी20 सीनियर स्तर पर उनका दूसरा शतक है और अपने 15वें जन्मदिन से पहले भारत के लिए किसी भी स्तर पर सबसे कम उम्र में 100 बनाने का रिकॉर्ड भी उनके नाम है। पूरे क्रिकेट जगत में सवाल उठ रहा है इतनी कम उम्र में इतने बड़े शॉट कैसे?
IPL और अंडर-19 में भी धमाल
IPL में शतक बनाना बड़े-बड़े स्टार्स के नसीब में नहीं होता, लेकिन 2025 के IPL में वैभव सूर्यवंशी ने यह काम कर दिखाया।
उन्होंने राजस्थान रॉयल्स के लिए 38 गेंदों में 101 रन बनाए, जिसमें 35 गेंदों में शतक पूरा किया। वे IPL और टी20 क्रिकेट इतिहास में सबसे कम उम्र में 100 बनाने वाले खिलाड़ी बने।
94 रन सिर्फ बाउंड्री से आए जिसमें 11 छक्के शामिल थे।
यूथ क्रिकेट में भी उनका प्रदर्शन शानदार है।
इंग्लैंड टूर पर वुर्स्टर में इंडिया U19 के लिए 78 गेंदों पर 143, जिसमें 52 गेंदों में सबसे तेज़ युवाओं का 100
ऑस्ट्रेलिया U19 के खिलाफ 58 गेंदों में 100
U19 एशिया कप में 76(46) और 67(36)
ये सभी स्कोर इस बात का सबूत हैं कि यह लड़का एक बड़ा टैलेंट है।
तेंदुलकर और सूर्यवंशी की तुलना क्यों हो रही है?
अब कहानी को थोड़ा पीछे ले चलते हैं।
1988 में मुंबई के 15 साल के एक लड़के ने गुजरात के खिलाफ अपने रणजी डेब्यू में शतक लगाया और भारत का सबसे कम उम्र का डेब्यू शतकवीर बना। यही थे सचिन तेंदुलकर।
पहले रणजी सीजन में उन्होंने 583 रन 67.77 की औसत से बनाए और टीम के सबसे सफल बल्लेबाज रहे।
ईरानी ट्रॉफी में दिल्ली के खिलाफ नॉटआउट 100 और बड़े-बड़े गेंदबाज भी उन्हें रोक नहीं सके।
इसके बाद सेलेक्टर्स ने देर नहीं लगाई और नवंबर 1989 में कराची टेस्ट में उनका डेब्यू कराया सिर्फ 9 फर्स्ट क्लास मैचों के बाद। उस दौर में पाकिस्तान के तेज़ गेंदबाजों को खेलना करियर खत्म करने जैसा माना जाता था।
अलग दौर, अलग स्टाइल लेकिन टैलेंट एक जैसा
सचिन तेंदुलकर रेड बॉल और फर्स्ट-क्लास क्रिकेट की देन थे, जबकि वैभव सूर्यवंशी टी20 और सभी फॉर्मेट में हाई-इम्पैक्ट स्ट्राइक-रेट वाली पारियों के लिए पहचाने जाते हैं।
ऐसे खिलाड़ी रोज नहीं मिलते। इसलिए फिर वही पुराना सवाल उठ रहा है क्या यह बच्चा भारतीय क्रिकेट का अगला सुपरस्टार बनेगा?












