चंडीगढ़, 15 मई (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली ने अपने टेस्ट करियर और कप्तानी के दिनों को याद करते हुए कई चौंकाने वाले और दिलचस्प खुलासे किए हैं। विराट ने बताया कि उनकी कप्तानी का वह दौर सिर्फ मैदान पर जीत दर्ज करने तक सीमित नहीं था। उस समय टीम के हर एक खिलाड़ी के भीतर खुद जिम्मेदारी लेने और भारतीय क्रिकेट को एक नए मुकाम पर ले जाने की गहरी भूख थी। यही वजह रही कि भारतीय टीम ने घरेलू मैदानों के साथ-साथ विदेशी धरती पर भी झंडे गाड़े और ऐतिहासिक सफलताएं अपने नाम कीं।
युवा खिलाड़ियों की जुगलबंदी ने बदली टीम इंडिया की किस्मत
आरसीबी पॉडकास्ट के एक नए टीजर में विराट कोहली ने टीम के अंदरूनी माहौल की परतें खोली हैं। विराट ने बताया कि उस दौर में टीम इंडिया के कोर ग्रुप में मौजूद ज्यादातर खिलाड़ी लगभग एक ही उम्र के थे। चेतेश्वर पुजारा, अजिंक्य रहाणे, रविचंद्रन अश्विन, इशांत शर्मा, मोहम्मद शमी और रवींद्र जडेजा जैसे मैच विनर खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट के दिनों से एक-दूसरे को बहुत अच्छी तरह जानते थे। लंबे समय तक साथ रहने के कारण इन सभी खिलाड़ियों के बीच सीनियर-जूनियर जैसा कोई फासला नहीं था, बल्कि सब एक दोस्त की तरह रहते थे।
टीम में खत्म हो गया था सीनियर और जूनियर का फर्क
विराट कोहली ने ड्रेसिंग रूम के माहौल पर बात करते हुए कहा कि टीम में ऊंच-नीच या अनुभव का फर्क बहुत कम महसूस होता था। हर खिलाड़ी खुद को टीम का सबसे अहम हिस्सा मानता था और मैदान पर अपना शत-प्रतिशत देता था। सभी के मन में सिर्फ एक ही जिद सवार थी कि आने वाले कई सालों तक भारतीय टेस्ट टीम को दुनिया की सबसे खतरनाक और मजबूत टीम बनाकर रखना है। यही कारण था कि खिलाड़ी कप्तानी के भरोसे बैठने के बजाय खुद से सवाल पूछते थे कि वे टीम को आगे बढ़ाने के लिए निजी तौर पर क्या योगदान दे सकते हैं।
आंकड़ों में देखिए किंग कोहली की कप्तानी का खौफ
विराट कोहली की कप्तानी को भारतीय टेस्ट क्रिकेट इतिहास का सबसे आक्रामक और सफल दौर माना जाता है। उन्होंने कुल 68 टेस्ट मैचों में भारतीय टीम की कमान संभाली, जिसमें से रिकॉर्ड 40 मुकाबलों में भारत को शानदार जीत दिलाई। उनकी इसी आक्रामक कप्तानी की बदौलत भारत ने साल 2018-19 में ऑस्ट्रेलिया को उसी के घर में पहली बार टेस्ट सीरीज हराकर इतिहास रचा था। इसके अलावा साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड जैसी तेज पिचों पर भी विरोधी टीमें भारतीय आक्रमण के सामने पानी मांगती नजर आती थीं।
फिटनेस और तेज गेंदबाजी से दुनिया पर राज
विराट कोहली ने अपनी कप्तानी के दौरान भारतीय क्रिकेट में फिटनेस कल्चर को अनिवार्य बनाया और एक बेहद खतरनाक तेज गेंदबाजी आक्रमण तैयार किया। जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी और इशांत शर्मा की पेस तिकड़ी ने विदेशी पिचों पर कहर ढहाया, तो वहीं रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा की स्पिन जोड़ी ने घरेलू मैदानों पर भारत को अजेय किला बना दिया। हालांकि साल 2022 में दक्षिण अफ्रीका दौरे के बाद विराट ने अचानक टेस्ट कप्तानी छोड़ दी थी, लेकिन उनका वह दौर आज भी भारतीय टेस्ट क्रिकेट के स्वर्णिम अध्याय के रूप में याद किया जाता है।
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