ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के राजा माने जाने वाले सूर्य देव का राशि परिवर्तन देश के करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। सूर्य देव जब एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, तो उस तिथि को संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, आगामी 15 जून 2026 को सूर्य देव वृषभ राशि की अपनी यात्रा को समाप्त कर बुध के स्वामित्व वाली मिथुन राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। सूर्य के इस गोचर से मिथुन संक्रांति का महापर्व शुरू होगा, जिसका आम जनमानस के जीवन, स्वास्थ्य और करियर पर सीधा और व्यापक प्रभाव पड़ता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संक्रांति के पावन अवसर पर किए गए स्नान, ध्यान और दान से सूर्य देव प्रसन्न होकर उपासक को आरोग्यता और तेज का आशीर्वाद देते हैं। इस साल की मिथुन संक्रांति बेहद खास और ऐतिहासिक संयोग लेकर आ रही है, क्योंकि इसी दिन सोमवती अमावस्या का महापर्व भी पड़ रहा है। दो बड़े धार्मिक पर्वों के एक ही दिन आने से इस तिथि का आध्यात्मिक महत्व कई गुना बढ़ गया है, जिससे पितृ दोष और सूर्य जनित दोषों से मुक्ति पाना बेहद आसान हो जाएगा।
मिथुन संक्रांति 2026 की सही तिथि और स्नान का समय क्या है?
पंचांग गणना के अनुसार 15 जून 2026 को सूर्य का मिथुन राशि में गोचर सूर्योदय के साथ ही प्रभावी माना जाएगा। इस दिन सुबह से ही देश की पवित्र नदियों जैसे गंगा, यमुना और गोदावरी के घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ेगी। जो लोग किन्हीं कारणों से पावन नदियों के तट पर नहीं पहुंच सकते, वे घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान की परंपरा पूरी कर सकते हैं। शास्त्रों के अनुसार, इस विधि से किया गया स्नान भी नदी स्नान के समान ही पुण्य फल प्रदान करता है और जातक के शारीरिक विकारों को दूर करता है। हरियाणा न्यूज़ पोस्ट पर ये भी पढ़ें: 17 जून को कर्क राशि में त्रिग्रही महासंयोग, एक साथ बनेंगे 3 राजयोग, चमकेगी इन राशियों की किस्मत
कुंडली में सूर्य को मजबूत करने के लिए कौन से उपाय करें?
जिन जातकों की कुंडली में सूर्य देव कमजोर स्थिति में हैं या जिन्हें करियर में लगातार बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, उनके लिए ज्योतिषविदों ने इस दिन विशेष अनुष्ठान बताए हैं। मिथुन संक्रांति की सुबह तांबे के एक शुद्ध लोटे में जल भरकर उसमें लाल फूल, अक्षत, रोली और थोड़ा सा गुड़ मिलाएं और उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दें। अर्घ्य देने के साथ ही वहीं खड़े होकर आदित्य हृदय स्तोत्र का पूरी श्रद्धा से पाठ करें, क्योंकि ऐसा करने से प्रशासनिक सेवाओं और नौकरी में उन्नति के रास्ते तुरंत खुलते हैं।
सोमवती अमावस्या के महासंयोग पर शिवलिंग पूजा का महत्व
चूंकि इस बार मिथुन संक्रांति और सोमवती अमावस्या एक ही दिन पड़ रही है, इसलिए भगवान शिव की आराधना का महत्व भी दोगुना हो गया है। इस शुभ संयोग में सुबह स्नान के बाद शिवालय जाकर शिवलिंग पर काले तिल मिलाकर शुद्ध जल अर्पित करना चाहिए। यह उपाय न केवल राहू-केतु और शनि के अशुभ प्रभावों को शांत करता है, बल्कि जातक को लंबे समय से चल रहे पितृ दोषों से भी मुक्ति दिलाता है।
मालपुए और अन्य वस्तुओं के दान से बदलेगी किस्मत
धर्म शास्त्रों के अनुसार, मिथुन संक्रांति और सोमवती अमावस्या के इस अत्यंत दुर्लभ संयोग में दान करने का फल अक्षय हो जाता है। इस दिन विशेष रूप से 33 मालपुए बनाकर किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान करने का विधान है, जिससे भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है। इसके अलावा अपनी सामर्थ्य के अनुसार तांबे के बर्तन, गुड़, मौसमी वस्त्र, गेहूं और छाता दान करने से घर में अन्न और धन के भंडार हमेशा भरे रहते हैं।












