Haryana Weather Monsoon Withdrawal : भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार पश्चिमी राजस्थान के रास्ते दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हो चुकी हैं। इसका सीधा असर हरियाणा के मैदानी इलाकों में दिखने लगा है और 20 सितंबर से पूरे सूबे में मौसम शुष्क (Haryana Mausam Update) होने का पूर्वानुमान जारी किया गया है।
मानसूनी ट्रफ रेखा कमजोर पड़ते ही हिसार, भिवानी, सिरसा और राजस्थान सीमा से सटे इलाकों में सुबह के समय हल्की धुंध छाने लगी है। बारिश थमते ही धूप खिली है, जिससे राज्य के औसत अधिकतम तापमान में करीब 0.8 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई। शुक्रवार को एनसीआर के फरीदाबाद और मेवात के नूंह में दिन का पारा सबसे अधिक 35.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।
क्यों सूखा साबित हुआ साल 2026 का मानसून?
हरियाणा में मानसून (Haryana Rainfall Deficit 2026) के आंकड़े इस बार निराशाजनक रहे हैं। जून से मध्य सितंबर तक राज्य में सामान्य 408 मिमी के मुकाबले केवल 317 मिमी पानी बरसा, जो सामान्य से 22 फीसदी की भारी गिरावट दर्शाता है। चालू सितंबर महीने में भी महज 34.1 मिमी बारिश दर्ज हुई, जो सामान्य कोटे 58.3 मिमी से 42 फीसदी कम रही।
आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पिछले 25 वर्षों में यह 9वां ऐसा अवसर है जब हरियाणा में मानसूनी बारिश 300 मिमी के आंकड़े के इर्द-गिर्द सिमटी है। इससे पहले साल 2014 में राज्य ने सबसे भयंकर सूखा झेला था, जब केवल 200.1 मिमी बारिश हुई थी। इस सीजन 22 जिलों में से 12 में ही सामान्य स्तर छुआ जा सका, जबकि 9 जिलों में सूखा जैसी स्थिति रही और केवल एक जिले में सामान्य से अधिक पानी गिरा।
हरियाणा न्यूज़ पोस्ट पर ये भी पढ़ें: हरियाणा मौसम: 18 जिलों में झमाझम बारिश के आसार, हिसार में 7.5 डिग्री गिरा पारा
मौसम विभाग ने क्या चेतावनी जारी की है?
मानसून की विदाई की बेला में हवा में 50 से 90 प्रतिशत तक नमी बनी हुई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार दिन में तेज धूप और हवा में अत्यधिक नमी कीटों के पनपने के लिए सबसे मुफीद माहौल तैयार करती है। ऐसे में कपास की फसल में सफेद मक्खी व घातक गुलाबी सुंडी (Pink Bollworm In Cotton Haryana) का प्रकोप तेजी से फैल सकता है।
वहीं जीटी रोड बेल्ट के कुरुक्षेत्र, करनाल, कैथल और अंबाला जैसे प्रमुख धान उत्पादक जिलों में फसलों पर तना छेदक (Paddy Stem Borer Advisory) कीट का खतरा बढ़ गया है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सख्त हिदायत दी है कि अगले दो से तीन दिन तक खेतों में गैर-जरूरी रासायनिक छिड़काव और सिंचाई टालें। जब आसमान पूरी तरह साफ हो जाए, तभी कृषि वैज्ञानिकों द्वारा अनुशंसित कीटनाशकों का इस्तेमाल करें।
बदलते मौसम में किसान क्या सावधानियां बरतें?
तापमान और उमस के उतार-चढ़ाव को देखते हुए सब्जी उत्पादक किसानों को तुड़ाई केवल सुबह या साफ मौसम में ही करने के निर्देश दिए गए हैं। सब्जियों को गीले खेत में तोड़ने से फंगल इन्फेक्शन (Fungal infection) की आशंका बढ़ जाती है।
दूसरी ओर पशुपालकों को सलाह दी गई है कि दुधारू पशुओं को खुले और पूरी तरह हवादार शेड में बांधें। उमस भरे मौसम में पशुओं की दूध उत्पादन क्षमता प्रभावित न हो, इसके लिए रोजाना चारे के साथ 50 से 100 ग्राम मिनरल मिक्सचर जरूर दें। #HaryanaWeather #Monsoon2026 #FarmersAlert #HaryanaNews













