Digital Arrest: Cyber fraud of Rs 6.96 lakh from a company official in Gurgaon, done in the name of CBI: डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) के नाम पर साइबर ठगों ने गुड़गांव में एक कंपनी अधिकारी को निशाना बनाया। जालसाजों ने ईडी और सीबीआई जांच का हवाला देकर 6,96,094 रुपये की ठगी की। पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज की।
यह मामला साइबर अपराध (Cyber Crime) की बढ़ती घटनाओं को उजागर करता है। लोग सतर्क रहें और अनजान कॉल्स से बचें। आइए, इस साइबर ठगी (Cyber Fraud) की पूरी कहानी जानें।
जालसाजों का नया हथकंडा Digital Arrest
14 मई 2024 को सेक्टर-54, गुड़गांव के प्रशांत कुमार मोहंती को एक कॉल आया। कॉलर ने कहा कि उनका मोबाइल नंबर डिएक्टिव होगा। इसके बाद एक महिला ने बताया कि प्रशांत का आधार कार्ड (Aadhar Card) मिसयूज कर लखनऊ में जियो कनेक्शन लिया गया।
इस नंबर से मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) और ड्रग्स ट्रेडिंग जैसी गतिविधियाँ हो रही थीं। कॉल को व्हाट्सएप पर ट्रांसफर किया गया। वहाँ पुलिस की वर्दी में एक व्यक्ति ने डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) की धमकी दी। यह जालसाजी का नया तरीका था।
ठगी का जाल और पैसे का नुकसान
जालसाज ने प्रशांत को बताया कि उनका नाम यूपी के एक राजनेता से जुड़ा है। तीन बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर होने का दावा किया गया। डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) का वारंट भेजने की बात कही। जालसाजों ने गुड़गांव पुलिस को गिरफ्तारी का आदेश देने का नाटक किया।
डर के मारे प्रशांत ने 6,96,094 रुपये उनके बताए खाते में ट्रांसफर कर दिए। बाद में परिजनों से बात करने पर उन्हें साइबर ठगी (Cyber Fraud) का अहसास हुआ। यह घटना साइबर सुरक्षा (Cyber Safety) की जरूरत बताती है।
पुलिस की कार्रवाई और सावधानी
प्रशांत ने तुरंत 1930 पर शिकायत की। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की। नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल ने 2,52,402 रुपये पर रोक लगाई। जालसाजों ने 15 मई को फिर कॉल कर शिकायत वापस लेने की धमकी दी। पुलिस लोगों से अनजान कॉल्स पर भरोसा न करने की सलाह दे रही है।
यह जानकारी मोबाइल-अनुकूल है। लोग साइबर अपराध (Cyber Crime) से बचने के लिए जागरूक रहें। यह खबर साइबर ठगी से सतर्क रहने की सीख देती है।











