Haryana corruption FIR: Case filed against 9 people including HCS officer in Ambala, major scam in tender: हरियाणा भ्रष्टाचार FIR (Haryana corruption FIR) की खबर ने अंबाला में सनसनी मचा दी है। अंबाला-जगाधरी नेशनल हाइवे पर 100 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बन रहे बैंक स्क्वेयर प्रोजेक्ट में टेंडर घोटाले (tender scam) का मामला सामने आया है।
एंटी करप्शन ब्यूरो (Anti-Corruption Bureau) ने एक HCS अधिकारी समेत नौ अफसरों के खिलाफ भ्रष्टाचार और अन्य धाराओं में FIR दर्ज की है। यह कार्रवाई एक प्राइवेट कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोपों के बाद शुरू हुई। आइए जानते हैं इस मामले की पूरी कहानी।
टेंडर घोटाले का खुलासा Haryana corruption FIR
अंबाला-जगाधरी नेशनल हाइवे पर बन रहा बैंक स्क्वेयर एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है, जिसमें सरकारी और प्राइवेट बैंक एक ही छत के नीचे होंगे। इसके अलावा बड़े शोरूम भी बन रहे हैं। लेकिन इस प्रोजेक्ट के टेंडर में भारी अनियमितता (tender scam) का मामला सामने आया।
जांच में पता चला कि एक प्राइवेट कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए योग्य कंपनी को टेंडर की दौड़ से गलत तरीके से बाहर कर दिया गया। एंटी करप्शन ब्यूरो (Anti-Corruption Bureau) ने इसकी गहन जांच की और सरकार को सूचित किया। इसके बाद FIR दर्ज की गई।
किन अधिकारियों पर हुई कार्रवाई?
एंटी करप्शन ब्यूरो ने HCS अधिकारी सुभाष सिहाग, S.E.R रमेश मदान, कार्यकारी अधिकारी विनोद नेहरा, XEN पंकज सैनी, ME हरीश कुमार, ME मुनेश्वर भारद्वाज, JE हरीश शर्मा, और JE कपिल काम्बोज के खिलाफ FIR दर्ज की। इनमें से सुभाष सिहाग और रमेश मदान रिटायर हो चुके हैं।
विनोद नेहरा सोनीपत नगर परिषद में DMC, पंकज सैनी XEN, हरीश कुमार अंबाला शहर, मुनेश्वर भारद्वाज यमुनानगर, हरीश शर्मा अंबाला सदर, और कपिल काम्बोज साढौरा में तैनात हैं। इन पर एक कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप (corruption charges) है।
भ्रष्टाचार पर सख्ती का संदेश
हरियाणा भ्रष्टाचार FIR (Haryana corruption FIR) की यह कार्रवाई सरकार और एंटी करप्शन ब्यूरो की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति को दर्शाती है। इस मामले में योग्य कंपनी को बाद में टेंडर दे दिया गया, लेकिन शुरुआती अनियमितता ने कई सवाल खड़े किए।
स्थानीय लोग इस कार्रवाई को सकारात्मक मान रहे हैं, लेकिन मांग कर रहे हैं कि ऐसी घटनाओं की गहन जांच हो। यह मामला हरियाणा में पारदर्शी प्रशासन (transparent administration) की जरूरत को रेखांकित करता है। लोग अब कोर्ट में इस मामले की प्रगति पर नजर रख रहे हैं।










