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Gangaur Puja Vrat Katha in Hindi: गणगौर पूजा की कहानी: पति की लंबी उम्र के लिए महिलाएं क्यों करती हैं ये गुप्त पूजन?

Gangaur Puja Vrat Katha in Hindi: गणगौर पूजा की कहानी: पति की लंबी उम्र के लिए महिलाएं क्यों करती हैं ये गुप्त पूजन?
Gangaur puja 2025 vrat katha, gangaur ki katha, kahani and story know why women do this puja secretly from their husbands: गणगौर पूजा में शिव-पार्वती की कथा है, जहां पार्वती ने गुप्त पूजन कर सुहाग रस बांटा। यह त्योहार पति की लंबी उम्र और सुखी जीवन के लिए मनाया जाता है। राजस्थान में खास गणगौर व्रत की पौराणिक कहानी जानें।
Gangaur Puja Vrat Katha in Hindi: गणगौर का त्योहार महिलाओं के लिए बेहद खास है, खासकर राजस्थान में, जहां इसे बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है। यह पर्व शिव और पार्वती के प्यार और समर्पण का प्रतीक है। मान्यता है कि सच्चे दिल से व्रत और पूजा करने वाली महिलाओं के पति को लंबी उम्र मिलती है और उनके वैवाहिक जीवन में खुशहाली बनी रहती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस पूजा को पति से छिपाकर क्यों किया जाता है? आइए, गणगौर की पौराणिक कथा के जरिए इस रहस्य को समझते हैं और जानते हैं कि यह त्योहार क्यों है इतना अनोखा।

Gangaur Puja Vrat Katha in Hindi: गणगौर की शुरुआत: शिव-पार्वती की अनोखी लीला

कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव, माता पार्वती और नारद जी भ्रमण के लिए निकले। चैत्र शुक्ल तृतीया को वे एक गांव में पहुंचे। गांव की गरीब महिलाएं हल्दी और अक्षत लेकर उनके स्वागत में आईं। उनकी सादगी और श्रद्धा से खुश होकर पार्वती जी ने उन पर सुहाग रस छिड़क दिया, जिससे उन्हें अटूट सौभाग्य मिला। इसके बाद अमीर महिलाएं सोने-चांदी की थालियों में पकवान लेकर आईं। शिव जी ने पार्वती से पूछा, "सारा सुहाग रस तो गरीब महिलाओं को दे दिया, अब इन्हें क्या दोगी?" पार्वती ने मुस्कुराते हुए कहा, "उन्हें बाहरी रस दिया, जो धोती से रहेगा। लेकिन इन धनी महिलाओं को मैं अपनी उंगली चीरकर रक्त का सुहाग रस दूंगी, जो मेरे जैसा सौभाग्य देगा।" ऐसा ही हुआ, और धनी महिलाएं भी सौभाग्यवती बनकर लौटीं।

पार्वती का गुप्त पूजन: कथा में छिपा रहस्य

इसके बाद पार्वती जी नदी स्नान के लिए गईं। वहां उन्होंने बालू से शिव की मूर्ति बनाई, पूजा की, भोग लगाया और दो कण प्रसाद खाकर माथे पर टीका लगाया। पूजा में समय लग गया। जब वे शिव और नारद के पास लौटीं, तो शिव ने देरी का कारण पूछा। पार्वती ने कहा, "नदी किनारे मेरे भाई-भावज मिले, उन्होंने दूध-भात खिलाया, इसलिए देर हुई।" यह सुनकर शिव भी दूध-भात के लालच में नदी की ओर चल पड़े। पार्वती ने मन ही मन शिव से प्रार्थना की कि उनकी लाज रखें। नदी किनारे पहुंचते ही एक मायावी महल दिखा, जहां शिव के साले और सहलज ने उनका स्वागत किया। दो दिन वहां रुकने के बाद पार्वती ने चलने को कहा, पर शिव तैयार नहीं हुए। नाराज पार्वती अकेले चल दीं, तो शिव को भी उनके साथ जाना पड़ा।

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शिव की माला और पार्वती की माया

रास्ते में शिव बोले, "मैं अपनी माला पार्वती के मायके भूल आया।" नारद जी माला लाने गए, लेकिन वहां कोई महल नहीं था। बिजली चमकी और माला एक पेड़ पर टंगी दिखी। नारद ने माला लाकर सारी बात बताई। शिव हंसते हुए बोले, "यह सब पार्वती की लीला है।" पार्वती ने कहा, "यह आपकी ही कृपा है।" नारद जी ने इसे देखकर कहा, "पार्वती के पतिव्रत और गुप्त पूजन की शक्ति से यह संभव हुआ। जो महिलाएं इस दिन गुप्त रूप से पूजा करेंगी, उनके पति को लंबी उम्र मिलेगी।" इसीलिए गणगौर की पूजा को गुप्त रखने की परंपरा बनी।

क्यों खास है गणगौर का त्योहार?

यह कथा बताती है कि गणगौर सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि प्यार, विश्वास और समर्पण का उत्सव है। गुप्त पूजा की शक्ति इसे और प्रभावशाली बनाती है। महिलाएं इस दिन शिव-पार्वती से अपने सुहाग की रक्षा और सुखी जीवन की कामना करती हैं। यह त्योहार हर महिला को अपने रिश्ते की अहमियत याद दिलाता है। तो इस गणगौर, आप भी इस कथा को याद करें और अपने जीवन में सौभाग्य का आशीर्वाद पाएं।

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