JAAT flim Big Mistakes box office news in Hindi: सनी देओल की जाट ने सिनेमाघरों में आते ही धूम मचा दी। गोपीचंद मालिनेनी के निर्देशन में बनी यह फिल्म एक्शन, ड्रामा और सनी पाजी के दमदार अंदाज का शानदार मिश्रण है। सीटियां, तालियां और “गदर काट दिए भाई” वाले जज्बात के साथ फैंस ने इस फिल्म को सराहा। लेकिन हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। जाट में सनी देओल का जलवा तो बरकरार है, पर कुछ छोटी-छोटी चूक ऐसी हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना मुश्किल है। आइए, इस फिल्म की तारीफ और कमियों को करीब से देखते हैं, बिना कहानी का मजा किरकिरा किए।
JAAT: सनी देओल का जलवा और कहानी का जादू
जाट की शुरुआत से ही सनी देओल का दमदार अंदाज दर्शकों को बांध लेता है। उनकी एंट्री पर सिनेमाघरों में सीटियां बजना कोई नई बात नहीं। कहानी में पुराने कनेक्शंस, इमोशंस और रणदीप हुड्डा जैसे खूंखार विलेन के साथ टकराव का तड़का है। फिल्म का एक्शन इतना जबरदस्त है कि आप स्क्रीन से नजरें नहीं हटा पाते। गोपीचंद मालिनेनी ने सनी को एक ऐसे किरदार में पेश किया है, जो फैंस की उम्मीदों पर खरा उतरता है। फिर चाहे वह डायलॉग्स हों या हेलिकॉप्टर से उतरने वाला स्टाइल, हर सीन में सनी का जादू छाया हुआ है।
एक्शन का ओवरडोज, पर कहानी में कमी
जाट को सनी देओल की अब तक की सबसे बड़ी एक्शन फिल्म कहा गया, और यह बात बिल्कुल सही भी लगती है। गन, रॉकेट लॉन्चर और मशीन गन के साथ सनी का हर सीन दमदार है। लेकिन कई बार एक्शन दिखाने की होड़ में कहानी पीछे छूट गई। मिसाल के तौर पर, आखिरी सीन में सनी हेलिकॉप्टर से उतरते हैं और एक के बाद एक हथियारों का इस्तेमाल करते हैं। यह सीन इतना भारी लगता है कि लगता है जैसे हथियारों की प्रदर्शनी चल रही हो। कहानी का फ्लो यहां थोड़ा बिखर सा गया, जो दर्शकों को खटक सकता है।
एंडिंग में क्यों रह गई कमी?
हर अच्छी फिल्म की जान उसकी एंडिंग होती है। जाट की कहानी और एक्शन पूरे समय आपको बांधे रखते हैं, लेकिन क्लाइमेक्स में कुछ कमी सी महसूस होती है। सनी देओल की धमाकेदार एंट्री तो है, लेकिन सामने वाला विलेन इतनी आसानी से हार मान लेता है कि मजा किरकिरा हो जाता है। रणदीप हुड्डा को खूंखार और खतरनाक बताया गया, लेकिन उनके और सनी के बीच कोई दमदार टक्कर नहीं दिखी। यह एकतरफा जंग दर्शकों की उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतरती।
रणदीप हुड्डा का किरदार: जितना सोचा, उतना नहीं
रणदीप हुड्डा का विलेन राणातुंगा गांव वालों पर सालों से जुल्म ढाता है। उसका डर इतना है कि लोग उसका नाम सुनकर कांपते हैं। लेकिन जब वह सनी देओल के सामने आता है, तो उसका रौब फीका पड़ जाता है। फैंस को उम्मीद थी कि दोनों के बीच कोई जबरदस्त भिड़ंत होगी, लेकिन ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला। रणदीप का किरदार जितना खतरनाक दिखाया गया, उतना स्क्रीन पर असर नहीं छोड़ पाया। यह फिल्म की एक और कमी थी।
सनी के डायलॉग्स और कुछ अटपटे सीन
सनी देओल की एक्टिंग और डायलॉग डिलीवरी हमेशा की तरह लाजवाब है। उनके डायलॉग्स में वही जोश और जज्बा है, जो फैंस को “जाट सॉरी बुलवा रहा था” चिल्लाने पर मजबूर करता है। लेकिन कुछ सीन में उनके डायलॉग्स के फ्रेम थोड़े रुके हुए लगे। ऐसा लगा जैसे वह एक ही जगह खड़े होकर लंबे डायलॉग बोल रहे हों। हालांकि, यह छोटी-सी बात फिल्म के मजे को कम नहीं करती, क्योंकि कुल मिलाकर यह एक फुल-ऑन एंटरटेनिंग पैकेज है।
फिर भी क्यों देखें जाट?
इन छोटी-मोटी कमियों के बावजूद जाट एक ऐसी फिल्म है, जो आपको थिएटर में भरपूर मनोरंजन देती है। सनी देओल का जलवा, दमदार एक्शन और भावनाओं का तड़का इसे खास बनाता है। अगर आप सनी पाजी के फैन हैं या एक्शन फिल्मों का मजा लेना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए बनी है। बस, दिमाग को थोड़ा साइड में रखकर इसका लुत्फ उठाएं। जाट भले ही गदर 2 की कमाई को न छू पाई हो, लेकिन सनी देओल का जादू हर फ्रेम में बरकरार है।













